देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल के नेतृत्व में शुक्रवार को उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस दौरान राज्य आंदोलनकारियों से जुड़े वर्षों से लंबित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में आंदोलनकारियों ने चिन्हीकरण, 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, पुरानी पेंशन, नियुक्तियों और आयु सीमा सहित कई महत्वपूर्ण विषय मुख्यमंत्री के समक्ष रखे।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने आंदोलनकारियों की समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक रुख अपनाते हुए लंबित मामलों के निस्तारण हेतु कैबिनेट की एक उप समिति गठित करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि राज्य आंदोलनकारियों के लंबित विषयों का शीघ्र समाधान कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस आश्वासन के बाद आंदोलनकारी प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि लंबे समय से लंबित मांगों पर अब ठोस निर्णय सामने आएंगे।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
मुलाकात के दौरान उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपते हुए राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित होने वाले आंदोलनकारी मंच के प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण आंदोलन के योगदान और संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए यह सम्मेलन महत्वपूर्ण रहेगा।
बैठक में प्रदेश प्रवक्ता एवं जिला अध्यक्ष प्रदीप कुकरेती ने मुख्यमंत्री से विशेष आग्रह किया कि राज्य आंदोलनकारियों के सभी लंबित मामलों के समाधान के लिए त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित की जाए। उनका कहना था कि सरकार, संबंधित विभागों और आंदोलनकारी संगठनों के बीच सीधे संवाद से वर्षों से लंबित विषयों का समयबद्ध समाधान संभव होगा। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों को न्याय दिलाने के लिए प्रभावी पहल की आवश्यकता है।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष बताया कि बागेश्वर, पौड़ी, चमोली, उधम सिंह नगर और देहरादून सहित कई जिलों में आज भी अनेक पात्र आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण पूरा नहीं हो पाया है। इस कारण बड़ी संख्या में आंदोलनकारी सरकार द्वारा घोषित सुविधाओं और सम्मान से वंचित हैं। उन्होंने चिन्हीकरण प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की मांग उठाई।
बैठक में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का विषय भी प्रमुखता से रखा गया। आंदोलनकारियों ने कहा कि आरक्षण का लाभ सभी पात्र राज्य आंदोलनकारियों तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा है। कई योग्य अभ्यर्थी इस व्यवस्था का लाभ पाने से वंचित रह गए हैं। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से इस विषय में स्पष्ट और प्रभावी व्यवस्था लागू करने का अनुरोध किया।
वर्ष 2005 के शासनादेश के अंतर्गत सरकारी सेवाओं में नियुक्त राज्य आंदोलनकारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिए जाने की मांग भी बैठक में उठाई गई। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि इस वर्ग के कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का अधिकार मिलना चाहिए और इस संबंध में लंबित निर्णय जल्द लिया जाना आवश्यक है।
बैठक में वर्ष 2011-12 में चयनित राज्य आंदोलनकारियों की नियुक्तियों का मुद्दा भी प्रमुखता से रखा गया। आंदोलनकारियों ने कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी कई अभ्यर्थियों को अब तक नियुक्ति नहीं मिल सकी है। उन्होंने इस विषय में शीघ्र निर्णय लेकर नियुक्तियां सुनिश्चित करने की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि पूर्व में कैबिनेट द्वारा दिए गए आदेशों में उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग का उल्लेख किया गया था, जबकि उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग और चिकित्सा चयन बोर्ड जैसी अन्य संस्थाओं को इसमें शामिल नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि सभी संबंधित चयन संस्थाओं को समान रूप से इस व्यवस्था में शामिल किया जाए, ताकि किसी भी पात्र आंदोलनकारी के साथ असमानता की स्थिति उत्पन्न न हो।
बैठक में राज्य आंदोलनकारियों की अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने तथा आंदोलनकारियों से जुड़े मामलों की समीक्षा करने वाली समिति को अधिक अधिकार संपन्न बनाने की मांग भी रखी गई। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि अधिकार संपन्न समिति बनने से निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और वर्षों से लंबित मामलों का समाधान समयबद्ध तरीके से हो सकेगा।
मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की सभी बातों को गंभीरता से सुना और संबंधित विषयों पर आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों का योगदान उत्तराखण्ड के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ कार्य करेगी।
इस अवसर पर उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल, उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी, प्रदेश प्रवक्ता एवं जिला अध्यक्ष प्रदीप कुकरेती सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। आंदोलनकारी नेताओं ने मुख्यमंत्री के आश्वासन का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि कैबिनेट उप समिति के गठन के बाद लंबे समय से लंबित सभी विषयों पर शीघ्र और प्रभावी निर्णय लिए जाएंगे।
