श्रीदेव सुमन के बलिदान को नमन, उत्तराखंड क्रांति दल ने मनाया 48वां स्थापना दिवस

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उत्तराखंड क्रांति दल का 48वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया

रुद्रपुर। उत्तराखंड क्रांति दल के 48वें स्थापना दिवस के अवसर पर जिले में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर दल के संघर्ष और उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में उसके योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं ने दल की स्थापना से लेकर राज्य निर्माण तक के संघर्ष को स्मरण करते हुए संगठन को मजबूत करने का संकल्प लिया।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

कार्यक्रम की अध्यक्षता एमसी पांडे ने किया। कार्यक्रम का संचालन जीवन सिंह नेगी,मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी प्रदेश उपाध्यक्ष आनंद सिंह असगोला, विशिष्ट अतिथि कांति भाकुनी, राजेंद्र प्रसाद जोशी, रोशन बिष्ट की उपस्थिति में संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल ने उत्तराखंड की अस्मिता, अधिकारों और राज्य के हितों के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया है। राज्य गठन के बाद भी पहाड़ के मूल मुद्दों, रोजगार, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय युवाओं के अधिकारों को लेकर संघर्ष जारी रखने की आवश्यकता है।

वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल की स्थापना का उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को मजबूती से उठाना और उत्तराखंड के हितों की रक्षा करना रहा है। स्थापना दिवस के अवसर पर कार्यकर्ताओं ने दल की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने तथा आगामी समय में संगठन को और मजबूत करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में महिला प्रकोष्ठ  सहित दल के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस दौरान स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उत्तराखंड के हितों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया गया।श्री देव सुमन का बलिदान दिवस हर साल 25 जुलाई को मनाया जाता है। उन्होंने टिहरी रियासत की क्रूर राजशाही के खिलाफ लड़ते हुए 25 जुलाई 1944 को जेल में अपने प्राण त्यागे थे। आज (25 जुलाई 2026) उनकी 82वीं पुण्यतिथि (बलिदान दिवस) है।बलिदान से जुड़ी मुख्य बातें84 दिनों की भूख हड़ताल: उन्होंने जेल में अमानवीय व्यवहार और अधिकारों के हनन के खिलाफ लगातार 84 दिनों तक ऐतिहासिक आमरण अनशन किया था।अटल देशभक्ति: भारी यातनाएं मिलने के बावजूद उन्होंने राजा के सामने झुकने या माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया था।अंतिम संस्कार की क्रूरता: उनकी शहादत के बाद जन-आक्रोश के डर से उनके शव को गुपचुप तरीके से भिलंगना नदी में फेंक दिया गया था। सरदार सुमन अर्पित किए गए कार्यक्रम में और कार्यक्रम आहूजा धर्मशाला रुद्रपुर में आयोजित किया गया जिसमें उत्तराखंड क्रांति दल के लोगों की उपस्थिति में कार्यक्रम उपस्थित हुआ दीप प्रज्वलित के उपरांत सभी लोगों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किया और उनके द्वारा किए गए बलिदान के बारे मेंविस्तार से बताया

मिशन 2027: उत्तराखंड क्रांति दल की सियासत का मुख्य मुद्दा,उत्तराखंड क्रांति दल ने मिशन 2027 को आगामी विधानसभा चुनाव की राजनीतिक रणनीति का प्रमुख आधार बनाने की तैयारी तेज कर दी है। दल का फोकस उत्तराखंड के मूल सवालों को चुनावी मुद्दा बनाकर जनता के बीच अपनी मजबूत राजनीतिक जमीन तैयार करना है। यूकेडी रोजगार, पलायन, स्थायी निवास, स्थानीय युवाओं के अधिकार, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा और पहाड़ों के विकास को प्रमुख मुद्दों के रूप में उठा सकता है।

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दल की राजनीति में मूल निवास और स्थानीय लोगों के अधिकार का सवाल महत्वपूर्ण स्थान रखता है। साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा पलायन रोकने के लिए प्रभावी नीति की मांग को भी प्रमुखता दी जा रही है।

स्थापना दिवस के अवसर पर उपस्थित लोगों में मुख्य रूप से इंदु बोरा बबीता बोरा, जिला महामंत्री भानु प्रताप सिंह मेहरा, ब्लॉक अध्यक्ष ईश्वर सिंह दानू, नारायण पाठक, हरेंद्र प्रसाद उत्तराखंड, हेमंत दानू, बच्ची सिंह बिष्ट, चंदन सिंह बिष्ट , अनूप गंगवार, ठाकुर शेर बहादुर सिंह, देवेंद्र सिंह रावत, परविंदर गंगवार, अजय गुप्ता, इंदर मेहरा रवि कोरंगा ,खड़क सिंह कोरंगा, गुड्डू राम, आनंद सिंह कोरंगा, वीरेंद्र सिंह बिष्ट, नंदन सिंह मेहरा, ठाकुर शेर बहादुर सिंह, राजेंद्र जोशी , प्रदीप जोशी, कन्हैया गौतम,दीपक ढोड़ीयाल, भुवन विष्ट, दिनेश भट्ट, प्रकाश राम, और रोशन बिष्ट ने सहभागिता की। इसके अलावा राजेन्द्र बिष्ट, दिनेश बिष्ट, वैभव मंदोलिया, मनीष राणा, गौरव और योगेश जोशी आदि उपस्थित थे।


मिशन 2027 के जरिए यूकेडी राज्य आंदोलन की मूल भावना को फिर से राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने का प्रयास कर रहा है। दल का लक्ष्य आंदोलनकारियों के सम्मान, शहीदों के सपनों और उत्तराखंड की अस्मिता से जुड़े मुद्दों को जनता तक पहुंचाना है।
आगामी चुनाव में यूकेडी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन मुद्दों को संगठित जनसमर्थन और मजबूत चुनावी विकल्प में बदलने की होगी।


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