मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, एक्स पर किया पोस्ट

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उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि वे पिछले 4 दशकों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधारों के लिए समर्पित रहे हैं. उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सेवा का मौका मिलने के लिए आभार जताया.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा, “मेरे युवा साथियों, मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं. मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है. मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं. भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है.”

लेटर में धर्मेंद्र प्रधान ने क्या लिखा?

उन्होंने आगे कहा, “आदरणीय प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ उसके लिए मैं प्रधानमंत्री जी का आभार प्रकट करता हूं. किंतु 3 मई 2026 को हुई NEET-UG की परीक्षा में सामने आई अनियमितता पाई गई. भारत सरकार ने इसको तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद्द किया एवं पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की गई. इसके साथ ही अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी (Computer-based-test) मोड में करने का निर्णय लिया गया. इस दौरान हमारी प्रमुख प्राथमिकता यह रही कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित की जाए. इसके लिए whole of government approach के तहत काम किया गया. इसमें भारत सरकार के साथ राज्य सरकार, विशेषकर जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही. साथ ही, छात्रों, अभिभावक और माता-पिता के सहयोग से 21 जून 2026 को यह परीक्षा पूर्ण हुई.”

‘जिम्मेदारी से कभी मुंह नहीं मोड़ा’

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “पहले ही दिन से, इसपर मैंने जिम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा. मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे, किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे. 16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी सफलता मिली. परंतु इस दौरान भी कई छात्रों को गुमराह करने के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे मन अत्यंत व्यथित हुआ.”

चौतरफा बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक दबाव के आगे झुकते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा भेजने की घोषणा करते हुए कहा कि देश के छात्रों के भविष्य, राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोपरि रखते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया है। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है, बल्कि लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच भी नई बहस छेड़ दी है कि आखिर इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह क्या रही।

क्या छात्रों का आंदोलन बना इस्तीफे की सबसे बड़ी वजह?

NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ता गया। दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर कई राज्यों के विश्वविद्यालयों और जिला मुख्यालयों तक विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। छात्रों की मांग थी कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। लगातार बढ़ते दबाव ने इस मुद्दे को केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का विषय बन गया।

धर्मेंद्र प्रधान ने आखिर अपने पत्र में क्या कहा?

अपने विस्तृत संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने चार दशक से अधिक समय शिक्षा और छात्र हितों के लिए समर्पित होकर काम किया है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की आकांक्षाओं और उनके भविष्य का सम्मान करना हर जनप्रतिनिधि की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में काम करने का अवसर मिलने पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रहित हमेशा उनके व्यक्तिगत पद से बड़ा रहा है।

सत्ता के गलियारों में सन्नाटा: क्या ‘परीक्षा माफिया’ के चक्रव्यूह में घिरी सरकार?

NEET-UG परीक्षा में सामने आई विसंगतियों के पहले ही दिन से शिक्षा मंत्रालय लगातार कटघरे में खड़ा था। इस बीच धर्मेंद्र प्रधान की तरफ से एक भावुक और बेहद गंभीर पत्र सामने आया है, जिसमें उन्होंने अपने चार दशकों के सार्वजनिक जीवन और छात्र-शिक्षक हितों के प्रति अपनी निष्ठा का हवाला दिया है। पत्र में केंद्रीय मंत्री ने स्वीकार किया कि 3 मई 2026 को आयोजित हुई परीक्षा में भारी अनियमितताएं पाई गई थीं, जिसके बाद सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तुरंत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी थी। सरकार ने परीक्षा रद्द कर 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा भी आयोजित कराई, लेकिन छात्रों और विपक्ष का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा था। सवाल यह उठता है कि क्या परदे के पीछे सक्रिय ‘परीक्षा माफिया’ के सिंडिकेट ने व्यवस्था को इस कदर बेबस कर दिया कि देश के शिक्षा मंत्री को इतना बड़ा कदम उठाना पड़ा?

देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा NEET-UG को लेकर हफ़्तों से जारी देशव्यापी संग्राम अब अपने सबसे निर्णायक और चौंकाने वाले मोड़ पर पहुंच गया है। एक बेहद सनसनीखेज खबर ने देश के सियासी गलियारों से लेकर जंतर-मंतर पर डटे छात्रों के बीच हड़कंप मचा दिया है।


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