रुद्रपुर। शहर के रम्पुरा क्षेत्र में स्थित मंदिर और उससे जुड़ी भूमि को लेकर विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मंदिर संचालक एवं भाईचारा एकता मंच के अध्यक्ष कांता प्रसाद गंगवार ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधम सिंह नगर को प्रार्थना पत्र सौंपकर न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने और आरोपित लोगों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह मुख्यमंत्री आवास के समक्ष धरना-प्रदर्शन, भूख हड़ताल अथवा अन्य लोकतांत्रिक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
प्रार्थना पत्र के अनुसार, रम्पुरा वार्ड संख्या 6/20 में लगभग 120×125 फीट क्षेत्रफल की भूमि पर चंद्रदेव मंदिर, मां काली मंदिर, भैरव बाबा मंदिर तथा कुछ अन्य कमरे बने हुए हैं। कांता प्रसाद गंगवार का दावा है कि वह लंबे समय से इन मंदिरों का संचालन और देखरेख कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कुछ लोग मंदिर परिसर और उससे संबंधित भूमि पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं।
शिकायतकर्ता के अनुसार, इस विवाद को लेकर उन्होंने सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रुद्रपुर की अदालत में स्थायी निषेधाज्ञा के लिए वाद संख्या 252/2025 दायर किया था। उनका कहना है कि न्यायालय ने 4 अक्टूबर 2025 को पारित आदेश में प्रतिवादियों को संबंधित भूमि और मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने, कब्जा करने, निर्माण कार्य कराने अथवा संपत्ति को क्षति पहुंचाने से रोकने के निर्देश दिए थे।
कांता प्रसाद गंगवार का आरोप है कि न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद प्रतिवादी लगातार मंदिर परिसर में हस्तक्षेप करते रहे। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने न्यायालय में अवमानना याचिका भी दायर की है, जो वर्तमान में विचाराधीन है।
उन्होंने अपने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि हाल ही में जब वह लगभग 15 दिनों के लिए शहर से बाहर गए हुए थे, तब कुछ लोग एकजुट होकर मंदिर परिसर में पहुंचे और वहां बने कमरों के ताले तोड़ दिए। शिकायतकर्ता का कहना है कि आरोपित लोगों ने मंदिर पर कब्जा करने का प्रयास किया तथा मंदिर में रखे दानपात्र और कमरों में रखे अन्य सामान को भी नुकसान पहुंचाया।
कांता प्रसाद गंगवार ने यह भी दावा किया है कि इस मामले में उन्होंने पहले मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस अधिकारियों द्वारा मामले की जांच कराई गई। उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार, क्षेत्राधिकारी नगर रुद्रपुर की जांच रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और न्यायालय के आदेशों के अनुरूप विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए थाना रुद्रपुर को निर्देशित किया गया था।
शिकायतकर्ता के अनुसार, क्षेत्राधिकारी नगर द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में प्रभारी निरीक्षक को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए थे कि न्यायालय के आदेशों का पालन कराया जाए। इसके अतिरिक्त 11 अप्रैल 2026 को एक अन्य जांच रिपोर्ट में भी संबंधित अधिकारियों ने न्यायालय के आदेशों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही थी।
कांता प्रसाद गंगवार ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद स्थानीय पुलिस ने न्यायालय के आदेशों का पालन कराने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि रुद्रपुर कोतवाली और रम्पुरा चौकी पुलिस प्रतिवादियों के विरुद्ध कार्रवाई करने में गंभीरता नहीं दिखा रही है।
प्रार्थना पत्र में उन्होंने 21 दिसंबर 2025 की एक घटना का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि उस दिन बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर में पहुंचे थे, जहां उनके परिजनों और पुजारी के साथ मारपीट की घटना हुई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसके बाद मंदिर परिसर में कई बार तोड़फोड़ और चोरी की घटनाएं भी सामने आई हैं।
कांता प्रसाद गंगवार ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि न्यायालय के आदेशों का तत्काल प्रभाव से पालन कराया जाए और जिन लोगों पर चोरी, तोड़फोड़, अवैध कब्जे के प्रयास तथा न्यायालय के आदेशों की अवहेलना के आरोप लगाए गए हैं, उनके विरुद्ध निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पुलिस प्रशासन ने समय रहते उचित कदम नहीं उठाए और प्रतिवादियों का मंदिर परिसर में आना-जाना जारी रहा, तो वह संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भी न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। उनका कहना है कि यदि उनके या उनके परिवार के किसी सदस्य के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित पुलिस प्रशासन की होगी।
कांता प्रसाद गंगवार ने स्पष्ट किया कि न्याय नहीं मिलने की स्थिति में वह मुख्यमंत्री आवास के समक्ष धरना-प्रदर्शन, भूख हड़ताल अथवा अन्य लोकतांत्रिक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। चूंकि यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए अंतिम स्थिति अदालत के निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ।
