उत्तराखंड (कैंची धाम): इतिहास खुद को दोहरा रहा है। आज से ठीक 51 साल पहले, सन् 1975 में जब ‘जय संतोषी मां’ फिल्म रिलीज हुई थी, तब देश के कोने-कोने में एक अभूतपूर्व आध्यात्मिक क्रांति देखी गई थी। हर घर में संतोषी माता के व्रत, आरती और भजनों की गूंज होने लगी थी। थियेटरों के बाहर लोग चप्पलें उतारकर अंदर जाते थे और स्क्रीन पर सिक्कों की बारिश होती थी। उस दौर ने हिंदू धर्म के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक इतिहास को एक नया मोड़ दिया था।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
आज, साल 2026 में ठीक वैसा ही—बल्कि उससे भी कहीं अधिक तीव्र—उन्माद और भक्ति का रेला उत्तराखंड की वादियों में देखने को मिल रहा है। निमित्त बनी है हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘हनुमान अंश’।
सड़कों पर आस्था का सैलाब: डगमगाई ट्रैफिक व्यवस्था
‘हनुमान अंश’ पिक्चर का दर्शकों पर ऐसा जादुई असर हुआ है कि महान संत श्री नीम करोली बाबा के पावन आश्रम कैंची धाम में भक्तों का अनंत तांता लग गया है। दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, गुजरात और देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं।
हालात यह हैं कि भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग चुका है। गाड़ियों का रेला थमा हुआ है और प्रशासन की पूरी ट्रैफिक व्यवस्था डगमगा गई है। लोग गाड़ियों को मीलों दूर छोड़कर पैदल ही बाबा के जयकारे लगाते हुए आश्रम की ओर बढ़ रहे हैं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में कैंची धाम में भक्तों का ऐसा हुजूम पहले कभी नहीं देखा।
सनातन धर्म की पुनर्व्याख्या: क्या बदल गई अध्यात्म की परिभाषा?
‘हनुमान अंश’ फिल्म ने केवल भीड़ नहीं जुटाई, बल्कि इसने आधुनिक पीढ़ी के लिए हिंदू धर्म और अध्यात्म की परिभाषा को ही बदल दिया है। इस फिल्म के जरिए सनातन धर्म के तीन मुख्य स्तंभों की पुनर्व्याख्या हो रही है:
चमत्कार से ऊपर ‘मानव सेवा’:
अक्सर फिल्मों में अध्यात्म को केवल तंत्र-मंत्र या अलौकिक चमत्कारों से जोड़कर देखा जाता था। लेकिन ‘हनुमान अंश’ ने नीम करोली बाबा के उस मूल मंत्र को पुनर्जीवित किया है जिसमें वे कहते थे—“सबकी सेवा करो, सबको प्यार करो, सबको भोजन कराओ और भगवान को याद करो।” आज का युवा समझ रहा है कि किसी भूखे को भोजन कराना ही सबसे बड़ी पूजा है।
हनुमान जी के ‘दास्य भाव’ का आधुनिक स्वरूप:
बाबा नीम करोली को स्वयं हनुमान जी का साक्षात अंश माना जाता है। हनुमान जी का चरित्र अहंकार-शून्य, परम शक्तिशाली होकर भी सेवा भाव में लीन रहने का है। यह फिल्म बताती है कि सनातन धर्म किसी को दबाना नहीं, बल्कि सेवा के माध्यम से खुद को ईश्वर में विलीन कर देना सिखाता है।
- कण-कण में ईश्वर (Universal Love):
फिल्म को देखकर कैंची धाम पहुंच रहे भक्तों में केवल पारंपरिक सनातनी ही नहीं, बल्कि विदेशी और कॉर्पोरेट जगत के युवा भी शामिल हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि हिंदू धर्म का अध्यात्म अत्यंत उदार और वैश्विक है, जो जाति, पंथ और सीमाओं से परे हर आत्मा को अपनी ओर आकर्षित करता है।
एक नया आध्यात्मिक पुनर्जागरण
जैसे ‘जय संतोषी मां’ ने सत्तर के दशक में समाज को एक सूत्र में पिरोया था, वैसे ही ‘हनुमान अंश’ ने आज के इस डिजिटल और तनावपूर्ण युग में भटके हुए इंसानों को आत्मिक शांति का मार्ग दिखाया है। कैंची धाम में लगा यह भक्तों का रेला केवल एक फिल्म की सफलता नहीं है, बल्कि यह हिंदू धर्म के शाश्वत सत्य, करुणा और सेवा भाव का एक नया पुनर्जागरण (Spiritual Renaissance) है।
