हल्द्वानी में मैथिली ठाकुर ने गाया ‘बेडू पाको बारमासा’, कुमाऊंनी सुरों पर झूम उठा महोत्सव का माहौल


मुख्यमंत्री धामी की तारीफ के बाद मैथिली ठाकुर ने कुमाऊंनी गीत गाकर जीता लोगों का दिल, ‘मेरी छैला’ के सुरों ने बांधा समां
हल्द्वानी, नैनीताल। कुमाऊं की लोकसंस्कृति और संगीत की मिठास से सजे ‘कुमाऊं द्वार महोत्सव’ में उस समय माहौल और भी खुशनुमा हो गया, जब भजन गायिका एवं युवा विधायक मैथिली ठाकुर ने कुमाऊंनी लोकगीतों के सुर छेड़ दिए। मंच से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की तारीफ करने के बाद मैथिली ठाकुर ने जब लोकप्रिय कुमाऊंनी गीत ‘बेडू पाको बारमासा, नरैण काफल पाको चैता, मेरी छैला…’ गाया, तो महोत्सव में मौजूद लोगों का उत्साह देखते ही बना।
मैथिली ठाकुर की मधुर आवाज में कुमाऊंनी लोकगीत की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। उत्तराखंड की लोकधुनों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े इस गीत ने श्रोताओं को अपनी ओर आकर्षित किया। कुमाऊं की पहचान बन चुके ‘बेडू पाको बारमासा’ के सुर गूंजते ही महोत्सव का वातावरण लोकसंगीत के रंग में रंग गया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सामने बैठे थे। उनकी मौजूदगी में मैथिली ठाकुर ने अपने अंदाज में मुख्यमंत्री के गुणों की सराहना की। इसके बाद कुमाऊंनी गीत की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को एक यादगार सांस्कृतिक रंग दे दिया।

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर


मैथिली ठाकुर की इस प्रस्तुति ने यह संदेश भी दिया कि लोकभाषा और लोकसंगीत किसी भी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उत्तराखंड के पारंपरिक गीतों को दूसरे क्षेत्रों के कलाकारों की आवाज में सुनना लोकसंस्कृति के व्यापक प्रसार का माध्यम बनता है।
कुमाऊं द्वार महोत्सव में मैथिली ठाकुर की प्रस्तुति लोकसंस्कृति के सम्मान और उत्तराखंड की सांगीतिक विरासत के प्रति जुड़ाव का खूबसूरत उदाहरण बनकर सामने आई।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | अवतार सिंह बिष्ट, रुद्रपुर
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