इसके लिए फोर्ट्रेस नामक पहल के तहत अमेरिका के मुख्य सैन्य ठिकानों को कम से कम 90 दिनों तक बाहरी सहायता के बिना चलाने की योजना बताई गई है। इसका उद्देश्य बिजली आपूर्ति बाधित होने, पानी की कमी पैदा होने या नागरिक आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति में सैन्य गतिविधियों को जारी रखना है।
अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर
प्रस्तावित उपायों में छोटे परमाणु रिएक्टर, स्थानीय बिजली नेटवर्क, बैटरी भंडारण और वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था शामिल हैं। साथ ही, रक्षा उपकरणों के उत्पादन के लिए नागरिक कारखानों की क्षमता इस्तेमाल करने तथा जरूरी सामग्रियों का सुरक्षित भंडार तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है। हालांकि, रिपोर्टों में वर्णित योजनाओं और पूरी तरह लागू हो चुकी व्यवस्थाओं के बीच अंतर समझना जरूरी है।
सैन्य ठिकानों को बाहरी सहायता के बिना चलाने की तैयारी
फोर्ट्रेस पहल का प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना बताया गया है कि बड़े युद्ध या व्यापक बुनियादी ढांचा संकट की स्थिति में सैन्य अड्डों का संचालन अचानक बंद न हो। यदि राष्ट्रीय बिजली नेटवर्क प्रभावित होता है, तो स्थानीय माइक्रोग्रिड और वैकल्पिक ऊर्जा प्रणालियां कुछ जरूरी सेवाएं चालू रखने में मदद कर सकती हैं।
योजना में पानी, ईंधन, संचार और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता भी ध्यान दिया जा रहा है। पोर्टेबल परमाणु रिएक्टरों का संभावित इस्तेमाल इसी ऊर्जा व्यवस्था का हिस्सा बताया गया है। हालांकि, ऐसे उपकरणों की तैनाती के लिए तकनीकी, सुरक्षा और नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करना जरूरी होगा।
हथियारों और जरूरी सामग्री का भंडार बढ़ाने पर जोर
संकट के समय अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखलाएं बाधित होने से सैन्य उपकरणों और जरूरी सामान की कमी पैदा हो सकती है। इस जोखिम को कम करने के लिए रणनीतिक भंडार, वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं और घरेलू उत्पादन क्षमता को मजबूत बनाने पर विचार किया जा रहा है।
रक्षा क्षेत्र से बाहर काम करने वाली फैक्ट्रियों को आपात स्थिति में सैन्य उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने की संभावना भी इस रणनीति का हिस्सा बताई गई है। इसका उद्देश्य जरूरत पड़ने पर उत्पादन बढ़ाने की क्षमता तैयार रखना है।
विदेशी तकनीकी क्षमताओं पर नजर रखने की व्यवस्था
रिपोर्टों में प्रौद्योगिकी सहायता कार्यालय यानी टीएसओ का भी उल्लेख है। इससे जुड़ी गतिविधियों का उद्देश्य विदेशी विरोधियों की उभरती तकनीकी क्षमताओं का आकलन करना और उनसे पैदा होने वाले सुरक्षा जोखिमों का मुकाबला करने के विकल्प तलाशना बताया गया है।
साइबर उपकरणों, हथियार प्रणालियों और तकनीकी कमजोरियों से संबंधित काम अत्यंत संवेदनशील हो सकता है। इस क्षेत्र में वास्तविक गतिविधियों और उनके परिणामों के बारे में उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी सीमित है।
प्रोजेक्ट मेरिडियन में आधुनिक तकनीक पर ध्यान
अमेरिकी रक्षा विभाग की भविष्य की युद्ध संबंधी योजनाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, स्वचालित प्रणालियों और लेजर आधारित हथियारों जैसी तकनीकों पर जोर दिए जाने की बात कही गई है। प्रोजेक्ट मेरिडियन को इसी व्यापक तकनीकी दिशा से जोड़ा गया है।
रिपोर्ट में एलन मस्क, पामर लकी और न्यूट गिंगरिच जैसे नामों का उल्लेख परियोजना के नेतृत्व से संबंधित संदर्भ में किया गया है। इन भूमिकाओं और परियोजना की मौजूदा स्थिति की पुष्टि आधिकारिक घोषणाओं से करना आवश्यक है।
अमेरिका की रणनीति का मुख्य उद्देश्य
इन पहलों का साझा लक्ष्य आपात परिस्थितियों में सैन्य संचालन जारी रखने, जरूरी संसाधनों की उपलब्धता बनाए रखने और तकनीकी बढ़त विकसित करने की क्षमता तैयार करना है। लेकिन इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव उनके क्रियान्वयन, लागत और तकनीकी तैयारियों पर निर्भर करेगा।
