सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और संगठित परीक्षा माफिया पर सख्त शिकंजा कसने के लिए केंद्र सरकार पब्लिक एग्जामिनेशन अमेंडमेंट बिल, 2026 को मंगलवार को लोकसभा से पारित कराने की तैयारी में है।

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सरकार का कहना है कि छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़े इस महत्वपूर्ण विधेयक को विपक्ष के विरोध के कारण लंबित नहीं रखा जा सकता।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

सोमवार को संसद में हंगामे के बीच कार्मिक राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह विधेयक लोकसभा में पेश किया। सरकार के सूत्रों के मुताबिक विधेयक पर सभी दलों को विस्तार से अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा, लेकिन छात्रों के हितों से जुड़े इस कानून को अनिश्चितकाल तक टालना उचित नहीं होगा।

सरकार का दावा है कि यह संशोधन केवल सजा बढ़ाने का कानून नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की व्यापक पहल है। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री के निर्देश पर राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में संरचनात्मक और तकनीकी बदलावों के साथ यह संशोधन उसी सुधार प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।

प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के लिए सजा को और कठोर बनाया गया है। दोषियों को 5 से 10 वर्ष तक की जेल और ₹50 लाख तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। परीक्षा संचालन से जुड़े सर्विस प्रोवाइडर्स पर ₹5 करोड़ तक का जुर्माना और 8 वर्षों तक ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान है। यदि किसी कंपनी के प्रबंधन की मिलीभगत सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों को 3 से 10 वर्ष तक की जेल और ₹5 करोड़ तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। वहीं संगठित पेपर लीक गिरोहों के लिए 7 से 10 वर्ष तक की जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।

विधेयक में जांच और न्यायिक प्रक्रिया को भी समयबद्ध बनाने का प्रस्ताव है। इसके तहत सीबीआई या एसटीएफ को दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी। मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में रोजाना होगी और तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हाईकोर्ट में अपील की सुनवाई दो न्यायाधीशों की पीठ करेगी और तीन महीने के भीतर अपील का निपटारा करने का प्रावधान भी जोड़ा गया है।

हालांकि विपक्ष इस विधेयक को लेकर सरकार पर लगातार हमला कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार नए कानून की आड़ में पेपर लीक के पुराने मामलों और छात्रों के आंदोलन पर जवाबदेही से बच रही है। विपक्षी दलों का कहना है कि जंतर-मंतर पर पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज, दर्ज मामलों और प्रशासनिक कार्रवाई पर पहले सरकार को जवाब देना चाहिए।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में छात्र आंदोलनों से जुड़े छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने वाले छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जाना उचित है।

उधर सरकार का कहना है कि यह विधेयक किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए लाया गया है। सरकार का दावा है कि व्यापक चर्चा के बाद भी यदि विपक्ष सहयोग नहीं करता, तब भी वह इस संशोधन विधेयक को मंगलवार को लोकसभा से पारित कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।

संसद में अब मुकाबला केवल एक विधेयक को लेकर नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और सरकार की जवाबदेही के दो अलग-अलग राजनीतिक नैरेटिव के बीच दिखाई दे रहा है। ऐसे में मंगलवार को लोकसभा में होने वाली चर्चा और मतदान पर सभी की नजरें टिकी हैं।


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