चेतावनी: निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच का निर्णय न हुआ तो प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा में जनआंदोलन
रुद्रपुर, 29 जुलाई। उत्तराखण्ड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद ने रुद्रपुर में 19 वर्षीय पर्वतीय क्षेत्र की युवती के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण को अत्यंत गंभीर बताते हुए जिलाधिकारी ऊधम सिंह नगर के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजा। परिषद ने इस प्रकरण की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग उठाई। साथ ही सुझाव दिया कि यदि सीबीआई जांच संभव न हो तो विशेष जांच दल (SIT) अथवा सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित कर पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
RTI डेटा से उत्तराखंड में महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रशासनिक नाकामी उजागर हुई है, जहां 5 वर्षों में 10,500 महिलाएं लापता हुईं और 757 अभी भी लापता हैं। पिछले तीन वर्षों में 1,822 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि 318 अज्ञात शवों में से केवल 87 की पहचान हो पाई है, जिससे कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इसे सरकार की विफलता बताते हुए तीव्र आक्रोश व्यक्त किया
परिषद के अध्यक्ष एवं हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स के संपादक अवतार सिंह बिष्ट ने कहा कि रुद्रपुर की घटना ने पूरे उत्तराखण्ड को झकझोर दिया है। ज्ञापन में कहा गया कि घटना के प्रत्येक पहलू की गहन जांच होनी चाहिए, ताकि जनता के मन में उठ रहे सभी प्रश्नों का समाधान हो सके और न्याय प्रक्रिया पर विश्वास और मजबूत हो।
परिषद ने अपने ज्ञापन में कहा कि उत्तराखण्ड का निर्माण मातृशक्ति के सम्मान, पारदर्शी शासन और सुरक्षित समाज के संकल्प के साथ हुआ था। आज महिलाओं के विरुद्ध सामने आ रहे जघन्य अपराध उस मूल भावना को चुनौती देते दिखाई दे रहे हैं। संगठन का कहना है कि हिमालयी गांवों से लेकर तराई और औद्योगिक क्षेत्रों तक महिलाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बननी चाहिए।
ज्ञापन में कहा गया कि रुद्रपुर, पंतनगर, काशीपुर, सितारगंज और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में हजारों महिलाएं और युवतियां रोजगार कर रही हैं। रात्रिकालीन ड्यूटी, सुरक्षित परिवहन, महिला सुरक्षा, सीसीटीवी, प्रकाश व्यवस्था और पुलिस गश्त जैसे विषयों पर व्यापक समीक्षा समय की मांग है।
परिषद ने यह भी मांग की कि उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद महिलाओं के विरुद्ध हुए चर्चित जघन्य अपराधों की समीक्षा कर आवश्यक मामलों में स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि पीड़ित परिवारों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास और मजबूत हो सके।
संगठन ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि महिला सुरक्षा पर विशेष कार्ययोजना लागू की जाए, औद्योगिक क्षेत्रों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए, महिला हेल्पलाइन को और प्रभावी बनाया जाए तथा दोष सिद्ध होने पर अपराधियों को कठोरतम कानूनी दंड सुनिश्चित किया जाए।
परिषद ने कहा कि यदि इस प्रकरण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच का निर्णय समयबद्ध अवधि में लिया जाता है तो जनता का विश्वास और मजबूत होगा। यदि ऐसा कदम उठाया जाता, तो प्रदेश में न्याय व्यवस्था के प्रति सकारात्मक संदेश जाएगा।
उत्तराखण्ड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद ने चेतावनी दी कि यदि इस मांग पर संतोषजनक निर्णय न लिया गया तो लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से पूरे प्रदेश में चरणबद्ध जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में धरना, प्रदर्शन और ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की मानी जाएगी।
परिषद ने कहा कि देवभूमि की प्रत्येक बेटी की सुरक्षा केवल कानून व्यवस्था का विषय भर सीमित माना जाना उचित प्रतीत होता ही था, ऐसी स्थिति स्वीकार करना कठिन है। यह पूरे समाज, शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की साझा जिम्मेदारी है। उत्तराखण्ड की जनता सुरक्षित, पारदर्शी और न्यायपूर्ण व्यवस्था की अपेक्षा रखती है तथा सरकार से उसी भावना के अनुरूप ठोस निर्णय की प्रतीक्षा कर रही है।
