डिजिटल कौशल विकास को नई दिशा: वीएमएसबीयूटीयू और नाइलिट के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौताछात्रों को मिलेंगे आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण, रोजगारपरक कौशल और डिजिटल शिक्षा के नए अवसर

Spread the love


देहरादून/नई दिल्ली, 30 जुलाई। उच्च शिक्षा को तकनीकी नवाचारों से जोड़ने और युवाओं को भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुरूप तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (वीएमएसबीयूटीयू), देहरादून और राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (नाइलिट) के बीच नई दिल्ली स्थित नाइलिट के कॉर्पोरेट कार्यालय में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता राज्य और देश के तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा क्षेत्र में एक नई शुरुआत माना जा रहा है, जिससे हजारों विद्यार्थियों को आधुनिक डिजिटल कौशल प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


समझौता ज्ञापन पर विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. (डॉ.) तृप्ता ठाकुर तथा नाइलिट की ओर से महानिदेशक डॉ. एम. एम. त्रिपाठी ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर नाइलिट के निदेशक (योजना एवं कौशल विकास) डॉ. आलोक त्रिपाठी तथा वीएमएसबीयूटीयू के प्रौद्योगिकी संकाय के सहायक प्राध्यापक एवं समन्वयक डॉ. विशाल रमोला सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब देश तेजी से डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और उद्योग जगत में तकनीकी दक्षता रखने वाले प्रशिक्षित मानव संसाधनों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में विश्वविद्यालय और नाइलिट का यह सहयोग विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक कौशल से सुसज्जित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास पर रहेगा विशेष फोकस
एमओयू के तहत दोनों संस्थान डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास तथा प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षण के क्षेत्र में संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। समझौते के प्रमुख बिंदुओं में क्रेडिट आधारित ऑनलाइन शिक्षण प्रणाली, राष्ट्रीय कौशल योग्यता रूपरेखा (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप पाठ्यक्रमों का संचालन, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन तथा नाइलिट डिजिटल यूनिवर्सिटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल स्किलिंग कार्यक्रमों का संचालन शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहयोग विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि उन्हें वास्तविक उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण भी प्रदान करेगा। इससे युवाओं को सूचना प्रौद्योगिकी, डेटा प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और अन्य उभरती तकनीकों से जुड़ी दक्षताओं को विकसित करने का अवसर मिलेगा।
छात्रों के लिए खुलेंगे नए अवसर
इस साझेदारी का सबसे बड़ा लाभ विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को मिलेगा। उन्हें ऐसे उच्च गुणवत्ता वाले पाठ्यक्रमों तक पहुंच प्राप्त होगी जो वर्तमान उद्योग की मांगों और भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को रोजगारपरक कौशल विकसित करने में सहायता मिलेगी, जिससे रोजगार प्राप्त करने और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
विशेष रूप से उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य के विद्यार्थियों के लिए यह पहल बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले छात्र भी ऑनलाइन माध्यम से राष्ट्रीय स्तर के तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जुड़ सकेंगे। इससे शिक्षा और कौशल विकास के अवसरों में समानता सुनिश्चित होगी तथा डिजिटल विभाजन को कम करने में मदद मिलेगी।
शिक्षकों और शोधार्थियों को भी मिलेगा लाभ
यह समझौता केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षकों और शोधार्थियों को भी इसका व्यापक लाभ मिलेगा। शिक्षकों को आधुनिक तकनीकी विषयों में प्रशिक्षण प्राप्त करने और अपने शिक्षण कौशल को अद्यतन करने का अवसर मिलेगा। वहीं शोधार्थियों को नवीनतम डिजिटल तकनीकों और संसाधनों तक पहुंच प्राप्त होगी, जिससे शोध एवं नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान समय में शिक्षकों का तकनीकी रूप से सक्षम होना उतना ही आवश्यक है जितना विद्यार्थियों का। ऐसे में यह सहयोग शिक्षकों को भी नई तकनीकों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने में सहायता करेगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप पहल
यह समझौता राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप भी माना जा रहा है। नई शिक्षा नीति में कौशल आधारित शिक्षा, बहु-विषयक अधिगम, डिजिटल लर्निंग और उद्योग-अकादमिक सहयोग पर विशेष बल दिया गया है। वीएमएसबीयूटीयू और नाइलिट के बीच हुआ यह समझौता इन सभी उद्देश्यों को धरातल पर उतारने की दिशा में एक प्रभावी कदम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में शिक्षा का स्वरूप और अधिक तकनीक आधारित होने जा रहा है। ऐसे में विश्वविद्यालयों और कौशल विकास संस्थानों के बीच इस प्रकार की साझेदारियां युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
उत्तराखण्ड में तकनीकी शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
उत्तराखण्ड में तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास को मजबूत बनाने की दिशा में यह समझौता मील का पत्थर साबित हो सकता है। राज्य सरकार भी डिजिटल शिक्षा और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। ऐसे में विश्वविद्यालय और नाइलिट का यह सहयोग राज्य के युवाओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रदेश के युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और वे सूचना प्रौद्योगिकी तथा डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित कर सकेंगे। साथ ही राज्य में नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और तकनीकी उद्यमिता को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
भविष्य के कुशल मानव संसाधन निर्माण की दिशा में बड़ा कदम
समझौते के अवसर पर दोनों संस्थानों के अधिकारियों ने कहा कि यह साझेदारी केवल एक औपचारिक समझौता नहीं, बल्कि देश के युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने का साझा संकल्प है। डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ ऐसे कुशल मानव संसाधनों की आवश्यकता बढ़ रही है जो तकनीकी रूप से दक्ष होने के साथ-साथ नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता भी रखते हों।
वीएमएसबीयूटीयू और नाइलिट का यह रणनीतिक सहयोग उच्च शिक्षा, कौशल विकास और उद्योग जगत के बीच मजबूत समन्वय स्थापित करेगा। इससे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, लचीली और रोजगारोन्मुख शिक्षा प्राप्त होगी तथा वे बदलती तकनीकी दुनिया में सफलतापूर्वक अपनी भूमिका निभा सकेंगे।
कुल मिलाकर, यह समझौता उत्तराखण्ड सहित पूरे देश के युवाओं के लिए डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में नए अवसरों के द्वार खोलने वाला महत्वपूर्ण कदम साबित होगा, जो भारत को ज्ञान आधारित और तकनीक संचालित अर्थव्यवस्था बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करेगा।


Spread the love