सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार भारत में घुसपैठ कराने वाले संगठित नेटवर्क बांग्लादेशियों को केवल सीमा पार कराने तक सीमित नहीं हैं।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
यह उन्हें भारत के अलग-अलग राज्यों के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिवेश के अनुरूप ढालने का भी प्रयास कर रहे है।
सुरक्षा एजेंसियों को जांच में यह संकेत मिले हैं कि अलग-अलग राज्यों के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे हैं। इसी इनपुट के आधार पर एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर केंद्रीय शासित प्रदेश से लेकर उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश में भी जांच को आगे बढ़ाना शुरू किया है। वहीं पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ मिल यहां गजवा-ए-हिन्द करवाने की साज़िश कर रहा है।
वहीं स्थानीय लोगो का कहना है कि लंबे अरसे से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशी लोगो ने यहां की भाषा और परिवेश बदल लिया है और यह लोग कई आपराधिक वारदातों में शामिल हैं इन लोगों को एक साजिश के तहत बसाया गया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि जब इनको बसाया गया तब से यह लोग यहां के लिए खतरा हैं। इनको एक योजनाबद्ध तरीके से लाया गया है। इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे और खतरा बन गए हैं। अब यह लोग एक जगह पर नहीं बल्कि दूसरी जगह पर बसेरा बना रहे हैं। यह लोग नशे और चोरियों के साथ-साथ नशे के कारोबार में भी लिप्त है।
पूर्व डी.जी.पी. जम्मू-कश्मीर पुलिस शेष पॉल वैद
वहीं जम्मू कश्मीर की पुलिस के पूर्व डी.जी.पी. शेष पॉल वैद ने कहा कि यह भी गजवा हिंद का ही हिस्सा है। पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ मिल कर इसको अंजाम दे रहा है। भारत सरकार और उनकी एजेंसी को पूरे नेटवर्क को रोकना होगा। एस.पी. वैद ने कहा कि इस गजवा हिंद के तहत धर्मांतरण करवाया जा रहा है। बाकी देशों की तरह यहां की सबसे पुरानी संस्कृति को खत्म करने के लिए यह एक बहुत बड़ी साजिश है। देश की संस्कृति को बचाने के देश की सर्वोच्च न्यायालय और सरकार को आगे आना होगा।
