सूर्य गणना के अनुसार सावन का आखिरी सोमवार: कुमाऊं से गढ़वाल तक देवभूमि के   शिवालयों में उमड़ा आस्था का महासैलाब

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राज्य ब्यूरो, उत्तराखंड: उत्तराखंड की पारंपरिक सौर (सूर्य) गणना के अनुसार आज, 10 अगस्त 2026 को सावन मास का अंतिम और चौथा सोमवार पूरे प्रदेश में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। देश के अन्य हिस्सों में जहां चंद्रमा आधारित पंचांग का पालन होता है, वहीं देवभूमि उत्तराखंड में ज्योतिष, महीने और त्योहार पूरी तरह सूर्य की गति (संक्रांति) के अनुसार चलते हैं। बीती 16 जुलाई को कर्क संक्रांति से शुरू हुआ सावन का सौर महीना आगामी 17 अगस्त को सिंह संक्रांति के साथ समाप्त हो रहा है। अगले सोमवार को सूर्य देव के राशि बदलते ही भादो का महीना शुरू हो जाएगा, इसलिए सूर्य गणना पद्धति के अनुसार आज ही सावन का आखिरी और सबसे पवित्र सोमवार है। इस विशेष अवसर और सोम प्रदोष व्रत के महासंयोग पर प्रदेश के मैदानी इलाकों से लेकर सुदूर पर्वतीय अंचलों के करीब 50 छोटे-बड़े प्रसिद्ध शिवालयों में शिवभक्तों का भारी जमावड़ा लगा हुआ है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

गढ़वाल मंडल के प्रमुख शिवालयों में गूंजे जयकारे
पहाड़ों के दुर्गम रास्तों से लेकर शहरों तक, गढ़वाल के विख्यात शिव मंदिरों में सुबह से ही लंबी कतारें देखी जा रही हैं:

  1. श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग (रुद्रप्रयाग): सावन के अंतिम सोमवार पर बाबा केदार के दर्शन के लिए हजारों की भीड़ उमड़ी।
  2. तुंगनाथ महादेव (रुद्रप्रयाग): विश्व का सबसे ऊंचा शिव मंदिर, जहां भक्तों ने विशेष पूजा-अर्चना की।
  3. रुद्रनाथ मंदिर (चमोली): पंच केदार में शामिल, जहां शिव के मुख की पूजा होती है।
  4. मदमहेश्वर महादेव (रुद्रप्रयाग): भगवान शिव की नाभि की पूजा के लिए प्रसिद्ध स्थल।
  5. कल्पेश्वर महादेव (चमोली): जहां जटाओं की पूजा होती है और यह सालभर खुला रहता है।
  6. टपकेश्वर महादेव (देहरादून): गुफा मंदिर जहां प्राकृतिक रूप से शिवलिंग पर पानी टपकता है।
  7. नीलकंठ महादेव (ऋषिकेश/पौड़ी): वह स्थान जहां शिव ने समुद्र मंथन का विष पिया था।
  8. विश्वनाथ मंदिर (उत्तरकाशी): काशी की तरह ही गंगा किनारे स्थित अत्यंत प्राचीन पौराणिक मंदिर।
  9. कोटेश्वर महादेव (रुद्रप्रयाग): अलकनंदा नदी के तट पर स्थित एक अद्भुत गुफा मंदिर।
  10. कमलेश्वर महादेव (श्रीनगर गढ़वाल): निसंतान दंपत्तियों के लिए विशेष महत्व रखने वाला सिद्धपीठ।
  11. बासुकेदार मंदिर (रुद्रप्रयाग): केदारनाथ मार्ग पर स्थित पांडवकालीन ऐतिहासिक धरोहर।
  12. ताड़केश्वर महादेव (लेंसडाउन): देवदार के घने जंगलों के बीच शांत वातावरण में स्थित सिद्धपीठ।
  13. लाखामंडल शिव मंदिर (देहरादून): महाभारत कालीन ऐतिहासिक मंदिर, जहां का शिवलिंग जल चढ़ाने पर चमकता है।
  14. अगस्त्यमुनि महादेव (रुद्रप्रयाग): महर्षि अगस्त्य की तपस्थली पर स्थित पूजनीय शिव मंदिर।
  15. त्रिगुणीनारायण मंदिर (रुद्रप्रयाग): शिव-पार्वती के विवाह स्थल के रूप में विख्यात अखंड धूनी वाला मंदिर।
  16. गोपीनाथ मंदिर (गोपेश्वर): कत्यूरी राजवंश द्वारा निर्मित एक भव्य और ऐतिहासिक शिव मंदिर।
  17. बैरासकुंड महादेव (चमोली): मान्यता है कि यहां रावण ने शिव को प्रसन्न करने के लिए सिर चढ़ाया था।
  18. बूढ़ा केदार (टिहरी): धर्मगंगा और बालगंगा के संगम पर स्थित प्राचीन और शांत शिव स्थल।
  19. दक्षेश्वर महादेव (हरिद्वार): कनखल स्थित राजा दक्ष की नगरी का मुख्य ऐतिहासिक शिवधाम।
  20. बिल्वेश्वर महादेव (हरिद्वार): जहां माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए तपस्या की थी।
  21. सुरकंडा शिव मंदिर (टिहरी): पहाड़ी की चोटी पर स्थित पूजनीय स्थल।
  22. भीमाशंकर महादेव (ऊधमसिंह नगर/काशीपुर बॉर्डर): उप-ज्योतिर्लिंग के रूप में मान्यता प्राप्त।
  23. पौरगढ़ महादेव (पिथौरागढ़ मार्ग): पहाड़ी क्षेत्र का प्राचीन और जाग्रत शिवालय।
  24. कोटेश्वर मंदिर (टिहरी): भागीरथी नदी के किनारे स्थित गुफा रूपी पवित्र स्थान।
  25. नाथद्वारा/नालद्वारा शिव मंदिर (गुप्तकाशी क्षेत्र): स्थानीय जनता की अगाध आस्था का केंद्र, जहां आज भारी भीड़ उमड़ी।

कुमाऊं मंडल के ऐतिहासिक शिव मंदिरों में उमड़ी भीड़
सूर्य गणना को पूरी निष्ठा से मानने वाले कुमाऊं क्षेत्र के छोटे-बड़े 25 प्रमुख मंदिरों में भी जलाभिषेक का महादौर चल रहा है:
26. जागेश्वर धाम (अल्मोड़ा): 124 छोटे-बड़े पत्थरों के मंदिरों का समूह, जिसे आठवां ज्योतिर्लिंग भी माना जाता है।
27. महामृत्युंजय मंदिर (जागेश्वर): इस परिसर का सबसे प्राचीन और शक्तिशाली शिव मंदिर।
28. बागनाथ मंदिर (बागेश्वर): सरयू और गोमती के संगम पर स्थित कुमाऊं का सबसे बड़ा शिव तीर्थ।
29. बैजनाथ महादेव (बागेश्वर): गोमती नदी के किनारे कत्यूरी राजाओं द्वारा निर्मित ऐतिहासिक धरोहर।
30. मोटेश्वर महादेव (काशीपुर): तराई क्षेत्र का अत्यंत जाग्रत और विशाल शिवलिंग।
31. बालेश्वर मंदिर (चम्पावत): पत्थर की बेजोड़ नक्काशी के लिए प्रसिद्ध प्राचीन शिव मंदिर।
32. बिनसर महादेव (रानीखेत/अल्मोड़ा): घने जंगलों के बीच स्थित शांत और अलौकिक शिवधाम।
33. थल्केदार महादेव (पिथौरागढ़): पहाड़ी की चोटी पर स्थित सीमांत क्षेत्र का सबसे पुराना शिव मंदिर।
34. पाताल भुवनेश्वर (पिथौरागढ़): गुफा के भीतर बसा रहस्यों से भरा शिव का संसार।
35. कपिलेश्वर महादेव (पिथौरागढ़): एक प्राचीन गुफा मंदिर जिसका ऐतिहासिक महत्व है।
36. गणनाथ मंदिर (अल्मोड़ा): प्राकृतिक गुफा में स्थित शिव मंदिर, जहां शिवरात्रि और सावन में मेला लगता है।
37. भीमेश्वर महादेव (भीमताल): मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान भीम ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी।
38. शीशमहल शिव मंदिर (काठगोदाम/हल्द्वानी): हल्द्वानी क्षेत्र के भक्तों की आस्था का मुख्य केंद्र।
39. अंग्यारी महादेव (बागेश्वर): पहाड़ों के बीच स्थित एक छोटा और स्थानीय जाग्रत शिव स्थान।
40. अर्जुनेश्वर महादेव (पिथौरागढ़): पांडव पुत्र अर्जुन द्वारा स्थापित माना जाने वाला मंदिर।
41. क्रान्तेश्वर महादेव (चम्पावत): चम्पावत नगर की ऊंची पहाड़ी पर स्थित पुराना शिव मंदिर।
42. ऋषेश्वर महादेव (लोहाघाट): लोहावती नदी के किनारे स्थित ऐतिहासिक शिवधाम।
43. सौरी महादेव (पिथौरागढ़): ग्रामीण अंचल के लोगों के लिए विशेष आस्था का प्रतीक।
44. पंचेश्वर महादेव (चम्पावत): काली और सरयू नदी के अंतरराष्ट्रीय संगम पर स्थित शिव का रूप।
45. गंगेश्वर महादेव (लालकुआं/गंगापुर): मैदानी तराई क्षेत्र का सुप्रसिद्ध शिव मंदिर।
46. शिव मंदिर (बिंदुखत्ता): स्थानीय ग्रामीण क्षेत्र का मुख्य और सबसे व्यस्त शिवालय।
47. शिव शक्ति मंदिर (शांतिपुरी): पंतनगर के समीप स्थित श्रद्धा का केंद्र।
48. प्राचीन शिव मंदिर (नगला): तराई क्षेत्र के पुराने कस्बों में गिना जाने वाला जाग्रत मंदिर।
49. शिव मंदिर (किच्छा): ऊधमसिंह नगर के शहरी भक्तों का मुख्य जलाभिषेक स्थल।
50. सिद्धेश्वर महादेव (खटीमा): सीमांत क्षेत्र खटीमा का सबसे प्रसिद्ध और आस्थावान शिव मंदिर।

प्रशासनिक व्यवस्थाएं रहीं चाक-चौबंद
सावन के इस अंतिम और चौथे सोमवार को देखते हुए कुमाऊं और गढ़वाल दोनों मंडलों के जिला प्रशासनों ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। भारी भीड़ वाले मैदानी क्षेत्रों जैसे हरिद्वार, रुद्रपुर, काशीपुर, और हल्द्वानी से लेकर पहाड़ी अंचलों के बागेश्वर व जागेश्वर धाम में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन करने में कोई असुविधा न हो।


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