उत्तराखंड की राजनीति भी गजब है। कल तक सोशल मीडिया पर तल्ख बयान, आरोप-प्रत्यारोप, वीडियो, प्रेस कॉन्फ्रेंस और तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर चल रहा था। ऐसा माहौल बनाया गया कि मानो दोनों नेताओं के बीच कभी संवाद की संभावना ही नहीं बची।
एक तरफ पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, दूसरी तरफ वर्तमान विधायक उमेश कुमार। दोनों के बीच का राजनीतिक संघर्ष कई बार सुर्खियों में रहा। सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं के समर्थक भी किसी युद्ध से कम माहौल तैयार नहीं करते। कभी बयानबाजी, कभी आरोप और कभी ऐसी घटनाएं, जिन्होंने राजनीतिक तापमान को लगातार बढ़ाया।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
मगर राजनीति का मंच बड़ा अद्भुत होता है।
हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान दोनों नेता एक साथ हवन करते हुए दिखाई दिए। अग्निकुंड में आहुति देते समय दोनों के चेहरों पर मुस्कान थी। तस्वीरें और वीडियो देखकर जनता भी हैरान रह गई। कई लोगों ने मजाक में कहना शुरू कर दिया कि राजनीति में स्थायी दुश्मनी जैसी कोई चीज होती ही नहीं।
इस बीच पूर्व विधायक चैंपियन ने एक वीडियो जारी कर मुझे बिना किसी ठोस प्रमाण के विकास विरोधी बताया। मित्र, आपको विनम्रता के साथ याद दिलाना चाहता हूं कि मैं 27 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। सार्वजनिक मंच से कोई भी बात कहने से पहले तथ्यों और प्रमाणों की जांच करना मेरी पेशेवर जिम्मेदारी रही है। राजनीतिक आरोप लगाना आसान है, मगर सार्वजनिक जीवन में तथ्यों का महत्व सबसे अधिक होता है।
अब चर्चा मिशन 2027 की भी होने लगी है। राजनीतिक गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच चुनावी रणनीति को लेकर सहमति बन चुकी है। चर्चाएं तो यहां तक हैं कि उमेश कुमार हरिद्वार से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं, जबकि चैंपियन अपनी पारंपरिक सीट से ही दावेदारी पेश करेंगे।
यह दावा कितना सही है, इसका जवाब आने वाला समय देगा, मगर हवन की तस्वीरों ने इतना संदेश जरूर दे दिया है कि राजनीति में कोई स्थायी मित्र या शत्रु नहीं होता, केवल परिस्थितियां स्थायी होती हैं।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि नेताओं के समर्थक सोशल मीडिया पर एक-दूसरे से भिड़ते रहते हैं, जबकि नेता अवसर आने पर एक ही मंच पर मुस्कुराते हुए दिखाई देते हैं। शायद इसी वजह से जनता अक्सर कहती है कि नेताओं की लड़ाई से ज्यादा खतरनाक उनके समर्थकों की लड़ाई होती है।
तो अगली बार यदि कोई नेता किसी दूसरे नेता के खिलाफ बहुत तीखा बयान दे, तो थोड़ा इंतजार कर लीजिए। क्या पता, कुछ दिनों बाद दोनों किसी हवन, मंच, सम्मेलन या चाय की मेज पर साथ बैठे दिखाई दे जाएं।
उत्तराखंड की राजनीति का सबसे बड़ा मंत्र शायद यही है- राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है।
राजनीति का सबसे बड़ा सच यही है कि यहां स्थायी मित्र और स्थायी विरोधी जैसी कोई स्थिति लंबे समय तक नहीं रहती। पत्रकारिता भी इसी सिद्धांत पर चलती है। एक पत्रकार का काम तथ्यों को सामने रखना होता है, व्यक्तिगत संबंधों को आधार बनाकर पक्ष या विपक्ष तय करना नहीं।
वर्तमान विधायक उमेश कुमार ने कई अवसरों पर यह साबित किया है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संवाद के रास्ते हमेशा खुले रहने चाहिए। उन्होंने समय-समय पर कई बड़े राजनीतिक चेहरों को चुनौती देकर अपनी अलग पहचान बनाई है।
वहीं, पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन अपनी राजघराने की परंपरा, बेबाक शैली और दबंग छवि के कारण हमेशा चर्चा में रहे हैं। उनकी राजनीतिक शैली में आज भी वही पहलवानी वाला अंदाज दिखाई देता है, जिसने उन्हें उत्तराखंड की राजनीति में एक अलग पहचान दिलाई है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि व्यक्तिगत स्तर पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से दोनों नेताओं की छवि अपेक्षाकृत अलग रही है। यही कारण है कि उनके समर्थक उन्हें पारंपरिक राजनीति से अलग मानते हैं।
मिशन 2027 को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। यदि दोनों नेता अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ते हुए उत्तराखंड की राजनीति में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत होगा।
दोनों नेताओं को शुभकामनाएं कि वे जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उत्तराखंड के विकास में अपनी प्रभावी भूमिका निभाएं।
