उत्तराखंड में मानसून का कहर: सीमांत क्षेत्रों का संपर्क टूटा, सड़कें बंद, नदियां उफान पर; 2027 चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा, 1 सितंबर से शुरू होगा खेल महाकुंभ

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उत्तराखंड सहित देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने उत्तर भारत, मध्य भारत और पूर्वी भारत के कई राज्यों के लिए भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गए हैं, नदियां उफान पर हैं और सीमांत क्षेत्रों का संपर्क जिला मुख्यालयों से कट गया है।
सबसे गंभीर स्थिति पिथौरागढ़ जिले में सामने आई है, जहां चीन सीमा को जोड़ने वाले टनकपुर-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर धारचूला से लगभग सात किलोमीटर दूर कूलागाड़ में एक विशाल बोल्डर पुल पर गिर गया। बोल्डर गिरने से वैली ब्रिज का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर खिसक गया, जिससे धारचूला का चीन और नेपाल सीमा से लगा लगभग दो-तिहाई क्षेत्र पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया है।
मंगलवार देर रात हुई इस घटना के बाद दारमा, व्यास और चौदास घाटी का संपर्क धारचूला तहसील मुख्यालय से टूट गया। पुल टूटने के कारण दोनों ओर वाहनों की आवाजाही बंद हो गई है। स्थानीय लोगों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
तवाघाट-लिपुलेख मार्ग पर मलघाट के पास तीसरे दिन भी यातायात बहाल नहीं हो सका। मंगलवार शाम तक सड़क खुलने की प्रतीक्षा करने वाले कई वाहन वापस धारचूला लौट गए। जिले में एक राष्ट्रीय राजमार्ग, दो सीमा मार्ग और कुल 19 सड़कें बंद होने से लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं।
बारिश का असर धार्मिक यात्राओं पर भी दिखाई दे रहा है। गुंजी और कुटी में पूजा-अर्चना के लिए जाने वाले श्रद्धालु रास्ते में फंस गए हैं। मार्ग बाधित होने के कारण यात्रियों को पुल खुलने का इंतजार करना पड़ रहा है। सीमांत क्षेत्रों में तैनात सेना और सुरक्षा बलों की गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं।
उधर, रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ पैदल मार्ग पर एक दर्दनाक हादसा सामने आया। चीरबासा के पास पहाड़ी से गिरे पत्थरों की चपेट में आने से नई दिल्ली की अंजली की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जबकि कर्नाटक के शिदप्पा घायल हो गए। प्रशासन ने यात्रियों से मौसम को देखते हुए सावधानी बरतने की अपील की है।
चमोली जिले में भी हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। देवाल-लोहाजंग राजमार्ग दूसरे दिन और हाटकल्याड़ी-सवाड़ मार्ग चौथे दिन भी बंद रहा। हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी रेखा को पार कर गया है, जिससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
चमोली में टीएचडीसी की पीपलकोटी-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना में हुए भूस्खलन के बाद चलाया गया बचाव अभियान मंगलवार को समाप्त हो गया। 13 अगस्त को हुई इस दुर्घटना में 22 श्रमिक टनल के भीतर फंस गए थे। 117 घंटे तक चले अभियान के बाद सभी श्रमिकों को बाहर निकाल लिया गया। मंगलवार को दो और शव बरामद होने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। 12 श्रमिकों को सुरक्षित बचाकर जिला अस्पताल गोपेश्वर में भर्ती कराया गया था, जबकि एक महिला को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
उत्तराखंड के अलावा हिमाचल प्रदेश भी बारिश के कहर से जूझ रहा है। सिरमौर जिले में चूना पत्थर की एक खान ढहने से तीन मजदूर मलबे में दब गए। लाहौल-स्पीति में तीन स्थानों पर बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे कई सड़कें बह गई हैं। नीलकंठ यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं और किसानों के वाहन भी विभिन्न स्थानों पर फंस गए हैं।
मौसम विभाग ने बुधवार को देहरादून और बागेश्वर जिलों के लिए भारी से अत्यधिक भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के किनारे जाने से बचने और अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह दी है।
देहरादून में भारी बारिश के दौरान एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। स्वारना नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से ट्रेकिंग पर गए यूपीईएस विश्वविद्यालय के छह छात्र नदी के बीच फंस गए। सूचना मिलने के बाद एसडीआरएफ की टीम लगभग छह किलोमीटर का कठिन रास्ता तय करके घटनास्थल पर पहुंची और रस्सियों की सहायता से सभी छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
जम्मू-कश्मीर में भी मानसून का असर दिखाई दे रहा है। शोपियां, कुपवाड़ा और कई ऊपरी इलाकों में बारिश दर्ज की गई है। श्रीनगर मौसम विज्ञान केंद्र ने जम्मू संभाग के लिए ऑरेंज अलर्ट और कश्मीर के लिए 19 से 21 अगस्त तक येलो अलर्ट जारी किया है।
इसी बीच उत्तराखंड की राजनीति भी तेजी से बदलते घटनाक्रमों की साक्षी बन रही है। भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। सरकार, संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि लोकसभा सांसद अनिल बलूनी उत्तराखंड की राजनीति में लगातार सक्रिय बने हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वह भविष्य में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में अपनी दावेदारी मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
भाजपा संगठन में हाल ही में हुए बदलावों के बाद कई नेताओं की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, संजय मयूख को संगठन से बाहर किए जाने और रितुराज सिन्हा को नई जिम्मेदारी दिए जाने के पीछे संगठनात्मक संतुलन साधने की रणनीति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भाजपा की कोर कमेटी ने सरकार, संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय को मजबूत करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार सांसदों, विधायकों और जिलाध्यक्षों के साथ बैठकें कर रहे हैं। पार्टी का उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनाव में किसी भी प्रकार के आंतरिक मतभेद को समाप्त करते हुए एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरना है।
पार्टी ने सिटिंग-गेटिंग के फार्मूले पर आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं। इससे वर्तमान विधायकों को राहत मिली है। जिन विधायकों की स्थिति पार्टी के सर्वे में कमजोर मानी गई है, उन्हें भी अपनी स्थिति सुधारने का अवसर मिल सकता है।
भाजपा ने राज्य के सभी आठ सांसदों को आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। प्रत्येक सांसद को अपने संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ सीटों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य भी दिया गया है।
राजनीतिक गतिविधियों के बीच राज्य में खेल महाकुंभ की तैयारियां भी जोरों पर हैं। युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग ने खेल महाकुंभ मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी के आयोजन की विस्तृत कार्ययोजना जारी कर दी है।
यह आयोजन एक सितंबर से शुरू होकर 30 अक्टूबर तक चलेगा। प्रतियोगिताएं न्याय पंचायत स्तर से शुरू होकर विधानसभा, संसदीय और राज्य स्तर तक आयोजित की जाएंगी। अंडर-14 और अंडर-19 वर्ग के साथ महिला और दिव्यांगजन वर्ग को भी इसमें शामिल किया गया है।
एक से 10 सितंबर तक न्याय पंचायत स्तर पर कबड्डी, एथलेटिक्स, खो-खो और मुर्गा झपट जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इसके बाद 11 से 20 सितंबर तक विधानसभा स्तर पर विधायक चैंपियनशिप ट्रॉफी का आयोजन किया जाएगा।
21 से 30 सितंबर तक सांसद चैंपियनशिप ट्रॉफी के अंतर्गत मलखंब, रस्साकसी, फुटबॉल, बैडमिंटन और कंचा प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी के तहत राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं 10 सितंबर से 30 अक्टूबर तक चलेंगी।
लगातार हो रही बारिश, भूस्खलन, बंद सड़कें और बढ़ते जलस्तर ने उत्तराखंड के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। दूसरी ओर, राजनीतिक दल आगामी चुनावों की रणनीति तैयार करने में जुटे हैं और सरकार खेल एवं युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए नए कार्यक्रमों को गति दे रही है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन राज्य के लिए मौसम और राजनीति दोनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं।


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