उत्तराखंड में बुधवार का दिन कई बड़ी घटनाओं के कारण चर्चा में रहा। देहरादून के डोईवाला क्षेत्र में भीषण सड़क हादसे में चार लोगों की जान चली गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। दूसरी ओर, बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने तीनों दोषियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। हरिद्वार के लक्सर में सामने आए कथित ब्लड बैंक घोटाले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, चमोली में टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे के बाद श्रमिक संगठनों ने मृतकों के परिवारों के लिए उचित मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन तेज कर दिया है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
देहरादून जिले के डोईवाला क्षेत्र में मणिमाई मंदिर के पास हुए सड़क हादसे ने सभी को झकझोर दिया। पुलिस के अनुसार, सुबह लगभग साढ़े दस बजे देहरादून की ओर से आ रहे एक वाहन का पिछला टायर अचानक निकल गया। टायर निकलते ही वाहन चालक का नियंत्रण बिगड़ गया और गाड़ी डिवाइडर से टकरा गई। इसी दौरान पीछे आ रही एक इको वैन भी अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त वाहन से टकरा गई।
टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों वाहनों में सवार कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। कुछ यात्री वाहन से बाहर जा गिरे। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां दो लोगों को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। बाद में उपचार के दौरान दो अन्य लोगों ने भी दम तोड़ दिया।
मृतकों में हरियाणा के रोहतक निवासी नरेश और विनोद की पहचान हो चुकी है, जबकि दो अन्य मृतकों की शिनाख्त की प्रक्रिया जारी है। घायलों में विपेंद्र सिंह और उत्तर प्रदेश के बदायूं निवासी विक्की शामिल हैं। तीसरे घायल की पहचान की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर राज्य में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और वाहन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
इसी बीच, सड़क सुरक्षा को लेकर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में दुर्घटनाओं के कारणों की वैज्ञानिक जांच करने, सड़क संरचना का तकनीकी मूल्यांकन करने और सड़क सुरक्षा ऑडिट को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। दोपहिया वाहनों पर चालक और पीछे बैठने वाले दोनों के लिए हेलमेट अनिवार्य करने के साथ सख्त कार्रवाई की बात भी कही गई।
बैठक में पहाड़ी क्षेत्रों की सड़कों को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए विशेष रणनीति पर चर्चा हुई। दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान कर वहां क्रैश बैरियर लगाने, सड़क किनारे सुरक्षा संबंधी उपायों को मजबूत करने और अन्य राज्यों के सफल मॉडलों का अध्ययन करने पर भी जोर दिया गया।
उधर, देहरादून के नया गांव बद्रीपुर क्षेत्र में तीर्थयात्रा पर गए एक परिवार के घर पर कब्जा करने और चोरी का मामला सामने आया है। नेहरू कॉलोनी थाना पुलिस ने पूर्व ग्राम प्रधान समेत सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित राकेश कुमार के अनुसार, वह 31 जुलाई को अपने परिवार के साथ राजस्थान स्थित खाटू श्याम और सालासर धाम की यात्रा पर गए थे। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले कुछ लोगों ने उनके घर का ताला तोड़ दिया। आरोप है कि पहले सीसीटीवी कैमरे का कनेक्शन काटा गया और उसके बाद घर में घुसकर नकदी, सोने का मंगलसूत्र और महत्वपूर्ण दस्तावेज चोरी कर लिए गए।
परिवार का आरोप है कि घरेलू सामान को बाहर फेंककर मकान पर कब्जा कर लिया गया और नया लोहे का दरवाजा लगा दिया गया। पांच अगस्त को जब परिवार वापस लौटा तो विरोध करने पर बेटियों के साथ मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी बुधवार का दिन विशेष रहा। कुमाऊं के प्रसिद्ध लोकपर्व सातूं-आठूं यानी गौरा-महेश्वर उत्सव की धूम विभिन्न क्षेत्रों में देखने को मिली। महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार बिरुड़े धोने के बाद धान और अन्य पौधों से मां गौरा की प्रतिमा तैयार की।
महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में मंदिर पहुंचीं और भजन-कीर्तन के साथ मां गौरा को मंदिर में विराजमान कराया। कंजाबाग पटिया स्थित हनुमान मंदिर में विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न हुई। गुरुवार को भगवान महेश्वर को विराजमान कराया जाएगा। इस लोकपर्व ने पूरे क्षेत्र को भक्ति और संस्कृति के रंग में रंग दिया है।
चमोली जिले में टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में 13 अगस्त को हुए हादसे के बाद श्रमिक संगठनों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ऑल इंडिया फेडरेशन के नेतृत्व में श्रमिकों ने टीएचडीसी परिसर से लेकर कार्यालय तक रैली निकालकर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिक अपने परिवारों के एकमात्र सहारा थे। ऐसे में मृतकों के आश्रितों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। श्रमिकों ने मांग की कि परिवारों को ऐसा मुआवजा दिया जाए, जिससे बच्चों की शिक्षा और परिवार के भरण-पोषण की व्यवस्था लंबे समय तक सुनिश्चित हो सके।
प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं है। उनका उद्देश्य मृतकों के परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करना है। श्रमिकों ने चेतावनी दी कि जब तक मुआवजे के संबंध में ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।
इस बीच, चमोली के जिलाधिकारी ने टनल हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। प्रशासन के अनुसार, टनल में अचानक भारी जल प्रवाह और मलबा आने के कारण संरचना को नुकसान पहुंचा था। घटना के समय टनल के भीतर 22 श्रमिक काम कर रहे थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राज्य के सबसे चर्चित मामलों में शामिल अंकिता भंडारी हत्याकांड में भी बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। नैनीताल हाईकोर्ट ने मामले के तीनों दोषियों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया।
दो दिनों तक चली लंबी सुनवाई के दौरान अभियुक्तों की ओर से कई तर्क प्रस्तुत किए गए, लेकिन अदालत ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। पिछले वर्ष कोटद्वार की अदालत ने तीनों को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
वर्ष 2022 में सामने आए इस हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था। अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास स्थित वनंतरा रिसॉर्ट में कार्यरत थीं। सितंबर 2022 में वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थीं और बाद में उनका शव चीला बैराज से बरामद हुआ था। पुलिस जांच में रिसॉर्ट संचालक पुलकित आर्य और उसके सहयोगियों की भूमिका सामने आने के बाद तीनों को गिरफ्तार किया गया था।
वहीं, हरिद्वार के लक्सर क्षेत्र में कथित ब्लड बैंक घोटाले ने स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि रक्तदान शिविरों की आड़ में खून एकत्र कर उसे दूसरे जिलों में बेचा जा रहा था।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में बिजनौर के एक राजनीतिक नेता और अधिवक्ता की भूमिका की भी जांच की जा रही है। कुछ महीने पहले एक ट्रस्ट बनाकर ब्लड बैंक की शुरुआत की गई थी। आधिकारिक तौर पर इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रक्तदान को बढ़ावा देना बताया गया था।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई शिविरों में चिकित्सक मौजूद ही नहीं होते थे। रक्त निकालने और उसे सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी कुछ ऐसे लोगों के पास थी, जिनकी शैक्षणिक योग्यता और डिप्लोमा की सत्यता पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने का निर्णय लिया है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भी ब्लड सेंटर का निरीक्षण किया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़े गंभीर अपराध के रूप में देखा जाएगा।
एक ही दिन में सामने आई इन घटनाओं ने उत्तराखंड के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियों को उजागर किया है। सड़क सुरक्षा, श्रमिकों की सुरक्षा, महिलाओं के खिलाफ अपराध, स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रियाओं की मजबूती जैसे मुद्दे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। अब सभी की नजर प्रशासन, न्यायालय और संबंधित विभागों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
