उत्तराखंड/नई दिल्ली। देश में अल्पसंख्यक समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास को लेकर केंद्र तथा राज्य सरकारों की विभिन्न योजनाएं लगातार संचालित हैं। इन योजनाओं का प्रमुख उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और स्वरोजगार के अवसरों को मजबूत करना है। मुस्लिम समाज भी इन योजनाओं का प्रमुख लाभार्थी है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
उत्तराखंड सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार राज्य में अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिए कई योजनाएं संचालित हैं। इनमें अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति, मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक मेधावी बालिका प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक प्रोत्साहन योजना, अल्पसंख्यक विकास निधि, अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में विकास कार्य, प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम और मदरसा आधुनिकीकरण योजना प्रमुख हैं।
मदरसा शिक्षा में आधुनिक विषयों पर जोर
उत्तराखंड में मदरसा आधुनिकीकरण योजना के माध्यम से मदरसों में आधारभूत सुविधाएं विकसित करने की व्यवस्था है। इसके तहत फर्नीचर, कंप्यूटर, पुस्तकालय, विद्युत उपकरण, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और अन्य सुविधाओं के साथ कक्षा-कक्ष निर्माण जैसी जरूरतों के लिए सहायता का प्रावधान है। योजना के लाभार्थियों में उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त मदरसे शामिल हैं।
राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने मदरसा शिक्षा में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी और हिंदी जैसे आधुनिक विषयों के साथ व्यावसायिक और कंप्यूटर शिक्षा पर जोर देने को अपने उद्देश्यों में शामिल किया है। इसका उद्देश्य पारंपरिक शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा और रोजगार की बदलती जरूरतों से जोड़ना है।
इस दृष्टि से मदरसे के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का दायरा व्यापक बनाने की दिशा में अवसर तैयार किए जा रहे हैं। आधुनिक विषयों, कंप्यूटर ज्ञान और कौशल प्रशिक्षण से विद्यार्थियों के सामने उच्च शिक्षा तथा रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं।
अल्पसंख्यक विकास निधि में करोड़ों रुपये का प्रावधान
उत्तराखंड में अल्पसंख्यक विकास निधि भी महत्वपूर्ण पहल है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस योजना के तहत वर्ष 2021-22 में 3 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया और 2.93 करोड़ रुपये खर्च हुए।
वर्ष 2022-23 में प्रावधान बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये किया गया, जिसमें 4.59 करोड़ रुपये खर्च हुए और 27 योजनाओं का उल्लेख सरकारी आंकड़ों में है।
वर्ष 2023-24 में भी 5 करोड़ रुपये का प्रावधान रहा और 4.79 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस अवधि में 10 योजनाओं का उल्लेख सरकारी रिकॉर्ड में है। इन योजनाओं के माध्यम से अल्पसंख्यक क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं और शिक्षा से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया।
यह निधि विशेष रूप से उन विकास आवश्यकताओं को पूरा करने में उपयोगी है, जो अन्य योजनाओं के दायरे में पूरी तरह शामिल नहीं हो पातीं।
मुस्लिम बच्चों की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति व्यवस्था
अल्पसंख्यक विद्यार्थियों की शिक्षा जारी रखने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित हैं। उत्तराखंड के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की मौजूदा योजना सूची में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति, पूर्व-दशम छात्रवृत्ति, पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति और मेरिट-कम-मीन्स आधारित छात्रवृत्ति शामिल हैं।
छात्रवृत्ति योजनाओं का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के सामने पढ़ाई जारी रखने में आर्थिक चुनौतियां आती हैं। छात्रवृत्ति सहायता से ऐसे विद्यार्थियों को विद्यालय और उच्च शिक्षा तक पहुंच बनाए रखने में मदद मिलती है।
मेधावी मुस्लिम बेटियों के लिए अवसर
उत्तराखंड सरकार की योजना सूची में मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक मेधावी बालिका प्रोत्साहन योजना भी शामिल है। इसका उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदाय की मेधावी छात्राओं को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन देना है।
मुस्लिम समाज में बेटियों की उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने की दृष्टि से ऐसी योजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। शिक्षा के साथ आर्थिक सहायता मिलने से छात्राओं के लिए आगे की पढ़ाई जारी रखना अपेक्षाकृत आसान होता है।
स्वरोजगार और कौशल विकास पर भी फोकस
उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के आधिकारिक उद्देश्यों में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के लिए स्वरोजगार, कौशल विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना शामिल है। विभाग के अनुसार अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम के माध्यम से सब्सिडी वाले ऋण, टर्म लोन और उच्च तथा व्यावसायिक शिक्षा के लिए ब्याजमुक्त ऋण जैसी व्यवस्थाएं संचालित की जाती हैं।
कौशल विकास योजनाओं का उद्देश्य युवाओं को रोजगार योग्य बनाने के साथ अपना कारोबार शुरू करने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।
इसका सीधा लाभ उन युवाओं को मिल सकता है जो सरकारी नौकरी के साथ-साथ स्वरोजगार और व्यवसाय को भी करियर के विकल्प के रूप में अपनाना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम से बुनियादी सुविधाओं का विस्तार
केंद्र सरकार का प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK) अल्पसंख्यक बहुल और विकास की अतिरिक्त आवश्यकता वाले क्षेत्रों में सामुदायिक आधारभूत सुविधाओं के निर्माण पर केंद्रित है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के अनुसार इस योजना के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और महिला-केंद्रित परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाती है।
इस योजना में स्कूल, अतिरिक्त कक्ष, छात्रावास, कंप्यूटर लैब, डिजिटल कक्षाएं, विज्ञान प्रयोगशालाएं, पेयजल सुविधाएं, शौचालय, अस्पताल, औषधालय, आईटीआई, पॉलीटेक्निक, कामकाजी महिलाओं के छात्रावास और खेल सुविधाओं जैसी परियोजनाएं शामिल हो सकती हैं।
PMJVK की एक खास विशेषता यह है कि इसके तहत निर्मित आधारभूत सुविधाओं का लाभ उस क्षेत्र में रहने वाले सभी लोगों को मिलता है। यानी अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र में बनने वाला विद्यालय, अस्पताल, सड़क-संबंधी सुविधा या अन्य सार्वजनिक ढांचा पूरे स्थानीय समाज के लिए उपयोगी होता है।
महिलाओं और बेटियों को विशेष प्राथमिकता
PMJVK के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास से जुड़े क्षेत्रों में कुल संसाधनों के 80 प्रतिशत उपयोग का प्रावधान है। मंत्रालय के अनुसार इस हिस्से में से कम से कम 33 से 40 प्रतिशत संसाधन महिलाओं और लड़कियों के लिए परिसंपत्तियों और सुविधाओं के निर्माण के लिए निर्धारित किए जाने हैं।
इसका अर्थ है कि अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में लड़कियों के छात्रावास, शिक्षा सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास को संस्थागत प्राथमिकता दी गई है।
उत्तर प्रदेश में PMJVK के अंतर्गत विभिन्न परियोजनाओं के उदाहरण भी सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध हैं। इनमें हरैया में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, लखनऊ में आईटीआई, बाराबंकी के जहांगीराबाद में बालिका छात्रावास, बाराबंकी में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज और बरेली में यूनानी मेडिकल कॉलेज जैसी परियोजनाएं दर्ज हैं।
शिक्षा से रोजगार तक जोड़ने की कोशिश
सरकारी नीतियों का व्यापक उद्देश्य अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित रखने के स्थान पर आधुनिक शिक्षा, तकनीकी ज्ञान और कौशल से जोड़ना है। उत्तराखंड सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों में भी मदरसा विद्यार्थियों को कंप्यूटर और व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने तथा उन्हें राष्ट्रीय मुख्यधारा के विभिन्न क्षेत्रों में भागीदारी के लिए तैयार करने का उल्लेख है।
इस दिशा में शिक्षा को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ना मुस्लिम युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर सकता है। आज का युवा डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी, उद्यमी, तकनीकी विशेषज्ञ या निजी क्षेत्र का पेशेवर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
PM VIKAS से कौशल और विरासत आधारित रोजगार
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (PM VIKAS) योजना भी अल्पसंख्यक समुदायों के लिए कौशल आधारित अवसरों से जुड़ी है। आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, जैन, पारसी और सिख समुदायों के पात्र भारतीय नागरिक इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इस तरह केंद्र की योजनाओं में शिक्षा, कौशल, रोजगार और पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार से जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है।
उत्तराखंड में अल्पसंख्यक कल्याण का व्यापक ढांचा
उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की आधिकारिक सूची से स्पष्ट है कि राज्य में अल्पसंख्यक कल्याण को केवल एक क्षेत्र तक सीमित रखने के स्थान पर शिक्षा, छात्रवृत्ति, बालिका शिक्षा, आधारभूत सुविधाओं, मदरसा आधुनिकीकरण, स्वरोजगार और कौशल विकास जैसे कई क्षेत्रों में योजनाएं संचालित हैं।
विभाग ने अपने विजन में छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन योजनाओं को ऑनलाइन करने, पात्र लोगों को रोजगारोन्मुख ऋण उपलब्ध कराने, हुनर योजना के तहत प्रशिक्षण देने और अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास के लिए आधारभूत सुविधाएं विकसित करने का लक्ष्य भी दर्ज किया है।
मुस्लिम समाज के लिए संदेश
इन योजनाओं का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि मुस्लिम समाज के बच्चों और युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल और रोजगार के रास्ते लगातार विस्तृत किए जा रहे हैं। मदरसे में पढ़ने वाला बच्चा आधुनिक विषयों का ज्ञान हासिल कर सकता है, छात्रवृत्ति के माध्यम से उच्च शिक्षा की ओर बढ़ सकता है और कौशल प्रशिक्षण के जरिए रोजगार या अपना व्यवसाय शुरू कर सकता है।
मुस्लिम बेटियों के लिए छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन योजनाएं उच्च शिक्षा की राह को मजबूत करती हैं। अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, छात्रावास और कौशल विकास संस्थानों जैसी परियोजनाएं पूरे स्थानीय समाज के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में योगदान दे सकती हैं।
सार
केंद्र और राज्य सरकारों की अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं का सकारात्मक पक्ष यह है कि इनका बड़ा हिस्सा शिक्षा, कौशल, महिला सशक्तीकरण, स्वास्थ्य, बुनियादी सुविधाओं और स्वरोजगार पर केंद्रित है। उत्तराखंड में अल्पसंख्यक विकास निधि के तहत 2021-22 से 2023-24 के बीच कुल 13 करोड़ रुपये का प्रावधान और लगभग 12.33 करोड़ रुपये का व्यय सरकारी आंकड़ों में दर्ज है। मदरसा आधुनिकीकरण के तहत कंप्यूटर, पुस्तकालय, फर्नीचर, पेयजल, शौचालय और कक्षा-कक्ष जैसी सुविधाओं का प्रावधान है। PMJVK में शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास को प्राथमिकता दी गई है तथा महिलाओं और बेटियों के लिए परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष जोर है।
मुस्लिम समाज के लिए इसका मूल संदेश यही है कि शिक्षा और कौशल को आगे बढ़ाकर नई पीढ़ी देश की मुख्यधारा के हर क्षेत्र में अपनी मजबूत भागीदारी दर्ज कर सकती है। सरकारी योजनाओं की जानकारी हासिल करना, पात्रता के अनुसार आवेदन करना और उपलब्ध अवसरों का उपयोग करना इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं।
