रुद्रपुर/हल्द्वानी। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के बीच भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक गतिविधियों के साथ विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच संवाद और संपर्क तेज कर दिया है। रुद्रपुर में आयोजित सिख सम्मेलन में बड़ी संख्या में सिख समाज के लोगों की भागीदारी रही। कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सांसद अजय भट्ट, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, विधायक शिव अरोड़ा, महापौर विकास शर्मा सहित भाजपा के अनेक पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
सिख सम्मेलन में भाजपा नेताओं ने सिख समाज के बलिदान, देशप्रेम, सेवा भावना, आध्यात्मिक परंपरा और राष्ट्र निर्माण में योगदान को प्रमुखता से रेखांकित किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सिख समाज की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए सिख समाज का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
सांसद अजय भट्ट ने सिख समाज से आगामी विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में मतदान का आह्वान किया। सम्मेलन को भाजपा की ओर से सिख समाज के बीच राजनीतिक संवाद मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है। रुद्रपुर और ऊधमसिंह नगर की राजनीति में सिख मतदाताओं की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में 2027 से पहले इस वर्ग के साथ सीधा संवाद राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
युवाओं से सीधा संवाद, रोजगार और स्वरोजगार पर चर्चा
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने युवाओं के साथ संवाद भी किया। इस दौरान युवाओं ने प्रदेश एवं देश के विकास से जुड़े विषयों पर सवाल पूछे। युवाओं ने सरकार की विभिन्न योजनाओं को लेकर अपने अनुभव साझा किए तथा रोजगार, स्वरोजगार और प्रदेश में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने को लेकर सुझाव रखे।
नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की युवा शक्ति के लिए तैयार किए जा रहे अवसरों का उल्लेख किया। उन्होंने डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया और खेलो इंडिया जैसी योजनाओं को युवाओं के लिए नए अवसरों का माध्यम बताया।
उन्होंने कहा कि तकनीक और बदलती अर्थव्यवस्था के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप, नवाचार, डिजिटल तकनीक और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में संभावनाएं बढ़ रही हैं। उत्तराखंड के युवाओं की प्रतिभा और ऊर्जा को प्रदेश के विकास से जोड़कर राज्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की आवश्यकता है।
नितिन नवीन ने पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार, स्वरोजगार, पर्यटन, कौशल विकास और उद्यमिता के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं से भविष्य की चुनौतियों को अवसरों में बदलने और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
सैनिक परंपरा को नमन
हल्द्वानी में नैनीताल रोड स्थित गौरव सेनानी मिलन समारोह में भी भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उत्तराखंड की वीर सैन्य परंपरा को नमन किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड वीर सैनिकों और सैन्य अधिकारियों की भूमि है तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल में उत्तराखंड का विशेष स्थान है।
उन्होंने सैनिकों के शौर्य और बलिदान को देश की सुरक्षा का आधार बताते हुए घोड़ाखाल सैनिक स्कूल के योगदान का उल्लेख किया। उत्तराखंड को देश का पहला सीडीएस देने का गौरव प्राप्त होने की बात भी उन्होंने कही। सैन्य धाम को पांचवां धाम कहे जाने के संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया।
इस कार्यक्रम ने भाजपा के उस राजनीतिक संदेश को भी मजबूत किया जिसमें राष्ट्रवाद, सैनिक सम्मान और उत्तराखंड की सैन्य परंपरा को प्रमुख स्थान दिया जा रहा है।
महालक्ष्मी मंदिर में मुख्यमंत्री ने की पूजा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को नैनीताल जिले के भ्रमण के दौरान बरेली रोड स्थित श्री महालक्ष्मी अष्टभुजा मंदिर, बेरीपड़ाव में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने मां महालक्ष्मी से प्रदेश एवं देशवासियों की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
इस अवसर पर भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, सांसद अजय भट्ट, अनिल बलूनी, कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट सहित अन्य जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
धार्मिक कार्यक्रम, सैनिक सम्मेलन, सिख समाज से संवाद और युवाओं के साथ चर्चा—इन तमाम गतिविधियों को एक साथ देखा जाए तो भाजपा उत्तराखंड में सामाजिक संपर्क के विभिन्न आयामों को सक्रिय करती दिखाई दे रही है।
लोक कलाकारों की मांगों ने सरकार के सामने अलग सवाल खड़े किए
एक ओर भाजपा के कार्यक्रमों में विकास, रोजगार और सामाजिक संवाद की तस्वीर सामने आई, वहीं प्रदेश के लोक कलाकार अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करते दिखाई दिए। भुगतान, कार्यक्रम आवंटन में पारदर्शिता और रोस्टर का पालन जैसी मांगों को लेकर लोक कलाकार गांधी पार्क में एकत्र हुए और मुख्यमंत्री आवास कूच किया।
लोक कलाकारों की मांगें उत्तराखंड की लोक संस्कृति और कलाकारों की आर्थिक स्थिति से जुड़ी हुई हैं। राज्य की सांस्कृतिक पहचान को देश-दुनिया तक पहुंचाने में लोक कलाकारों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में उनके लंबित भुगतान और कार्यक्रमों में अवसरों के आवंटन से जुड़े सवाल सरकार के सामने बने हुए हैं।
अनुसूचित जाति आयोग कार्यालय में सेंधमारी से हड़कंप
देहरादून में उत्तराखंड राज्य अनुसूचित जाति आयोग के कार्यालय में सेंधमारी का मामला भी सामने आया है। कार्यालय में बीते शनिवार को ताला तोड़कर प्रवेश करने और शासकीय अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ किए जाने की शिकायत के बाद पुलिस ने बुधवार को आयोग की सचिव कविता टम्टा की तहरीर पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
इंस्पेक्टर नेहरू कॉलोनी देवेंद्र चौहान के अनुसार कार्यालय के ताले और अलमारियों के लॉक तोड़े गए। महत्वपूर्ण एवं गोपनीय सरकारी दस्तावेजों को खंगाले जाने तथा उनमें छेड़छाड़ की बात सामने आई है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। दस्तावेजों की सुरक्षा और आयोग जैसे संवेदनशील संवैधानिक संस्थान की सुरक्षा को लेकर घटना ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
पहाड़ों के पारंपरिक घर भी बदलाव की कहानी कह रहे
उत्तराखंड के गांवों में बदलती जीवनशैली का असर पारंपरिक वास्तुकला पर भी दिखाई दे रहा है। कभी पत्थर, लकड़ी और मिट्टी से बने घर पहाड़ी गांवों की पहचान हुआ करते थे। स्थानीय मौसम, उपलब्ध संसाधनों और पीढ़ियों से चले आ रहे अनुभवों के आधार पर इन घरों का निर्माण किया जाता था।
उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में पत्थर और लकड़ी से बने मकानों की ढलानदार छतें बारिश और बर्फ के पानी को आसानी से नीचे पहुंचाती थीं। मोटी दीवारें तापमान संतुलित रखने में सहायक होती थीं। कई मकानों में नीचे पशुओं के लिए स्थान, अलग अनाज भंडारण और ऊपर परिवार के रहने की व्यवस्था होती थी।
सीमेंट-कंक्रीट के आधुनिक मकानों ने इस परंपरा को तेजी से बदल दिया है। पलायन के कारण बंद पड़े पुराने मकानों की देखभाल भी कठिन हो गई है। इसके साथ स्थानीय कारीगरों और पारंपरिक निर्माण तकनीकों का ज्ञान भी धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है। पहाड़ी घरों का संरक्षण केवल भवनों को बचाने का विषय नहीं, बल्कि स्थानीय इतिहास, शिल्प और संस्कृति को सुरक्षित रखने का सवाल भी है।
नंदा देवी राजजात से जुड़ी आस्था और परंपरा
उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान में नंदा देवी राजजात का विशेष स्थान है। चमोली के उच्च हिमालयी क्षेत्र में आयोजित होने वाली यह यात्रा लगभग 280 किलोमीटर के मार्ग से गुजरती है। यात्रा में 20 पड़ाव आते हैं, जिनमें कई दुर्गम और निर्जन क्षेत्र भी शामिल हैं।
चौसिंग्या खाडू यानी चार सींग वाला मेढ़ा इस यात्रा का प्रमुख प्रतीक और पथप्रदर्शक माना जाता है। नौटी से प्रारंभ होकर यात्रा हिमालय की ऊंचाइयों तक पहुंचती है और होमकुंड में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ पूर्ण होती है।
नंदा को हिमालय की पुत्री और शिव की अर्धांगिनी के रूप में श्रद्धा से देखा जाता है। राजजात से जुड़ी लोक मान्यताएं, गीत, परंपराएं और धार्मिक अनुष्ठान उत्तराखंड की सामूहिक सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा हैं।
थराली में 2027 की राजनीतिक तस्वीर पर नजर
चमोली जिले की थराली विधानसभा सीट भी आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। परिसीमन के बाद पिंडर सीट का नाम थराली हुआ और यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र है। क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पलायन, सड़क, मौसम और भूस्खलन जैसे विषय लंबे समय से शामिल हैं।
2012 में कांग्रेस के जीत राम ने भाजपा के मगन लाल को कड़े मुकाबले में हराया था। 2017 में भाजपा के मगन लाल शाह ने जीत हासिल की। उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी मुन्नी देवी शाह भाजपा के टिकट पर विजयी हुईं। 2022 में भाजपा ने भूपाल राम टम्टा को प्रत्याशी बनाया और उन्होंने जीत दर्ज की।
2027 के चुनाव को लेकर भाजपा, कांग्रेस और उत्तराखंड क्रांति दल की संभावित रणनीतियों पर चर्चा शुरू हो चुकी है। स्थानीय मुद्दों के साथ उम्मीदवार चयन और तीसरे विकल्प की सक्रियता मुकाबले को प्रभावित कर सकती है।
2027 की जमीन पर कई मोर्चों से सक्रियता
रुद्रपुर का सिख सम्मेलन, युवाओं से संवाद, सैनिकों का सम्मान, धार्मिक स्थलों पर मुख्यमंत्री की मौजूदगी, लोक कलाकारों का आंदोलन, अनुसूचित जाति आयोग कार्यालय की सुरक्षा का सवाल, पहाड़ी संस्कृति और पारंपरिक वास्तुकला का संरक्षण तथा थराली जैसे क्षेत्रों की चुनावी राजनीति—उत्तराखंड की मौजूदा तस्वीर कई अलग-अलग मुद्दों को एक साथ सामने ला रही है।
भाजपा की गतिविधियों में जहां राष्ट्रवाद, विकास, युवा, सैनिक सम्मान, धार्मिक आस्था और सामाजिक संपर्क प्रमुख दिखाई दे रहे हैं, वहीं विपक्ष और विभिन्न सामाजिक समूह रोजगार, पारदर्शिता, भुगतान, संरक्षण तथा जनहित से जुड़े सवाल उठा रहे हैं।
2027 की चुनावी परीक्षा में जनता इन सभी मुद्दों को किस दृष्टि से देखती है, इसका फैसला आने वाले महीनों में राजनीतिक दलों की रणनीति, स्थानीय समस्याओं और जनता के बीच उनके संवाद से तय होगा।
