हरतालिका तीज हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक है. यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है. सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं.

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कुंवारी कन्याएं भी मनचाहे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत कर सकती हैं.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

14 सितंबर को रखा जाएगा व्रत

हिंदू पंचांग के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत इस साल 14 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा. तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह 7:08 बजे शुरू होगी और 14 सितंबर की सुबह 7:06 बजे समाप्त होगी. उदया तिथि के नियम के अनुसार व्रत 14 सितंबर को ही रखा जाएगा.

हरतालिका तीज के दिन पूजा का शुभ समय सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक बताया गया है. इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना शुभ माना जाता है.

बनेंगे शुभ संयोग

इस बार हरतालिका तीज पर कई शुभ संयोग बनने की बात कही जा रही है. 14 सितंबर को चित्रा नक्षत्र और ब्रह्म योग का संयोग रहेगा. इसके साथ ही गणेश चतुर्थी का संयोग भी पड़ रहा है. ऐसे में शिव-पार्वती के साथ भगवान गणेश की पूजा का भी विशेष महत्व माना जा रहा है.

कैसे करें हरतालिका तीज की पूजा?

व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें. इसके बाद चौकी पर कपड़ा बिछाकर मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें.

सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें और उन्हें दूर्वा अर्पित करें. इसके बाद माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री और भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाएं. फल, मिठाई, वस्त्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने के बाद हरतालिका तीज की कथा सुनें या पढ़ें. अंत में भगवान गणेश और फिर शिव-पार्वती की आरती करें.

शिव-पार्वती से जुड़ा है व्रत

धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठिन तपस्या की थी. इसी वजह से हरतालिका तीज को वैवाहिक सुख और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है. महिलाएं इस दिन श्रद्धा से शिव-पार्वती की पूजा कर सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं.✧ धार्मिक और अध्यात्मिक


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