ऐसे में अगर आप आज घर में गणपति की स्थापना करने जा रहे हैं तो पूजा का समय पहले से तय कर लें। खास बात यह भी है कि इस बार हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ रहे हैं।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
गणपति स्थापना का सबसे शुभ समय
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा और स्थापना के लिए मध्याह्न काल को विशेष महत्व दिया गया है। पंचांग के अनुसार 14 सितंबर को गणेश पूजा का शुभ समय सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक रहेगा। इस दौरान गणपति की प्रतिमा स्थापित करके पूजा, संकल्प, मंत्र जाप, नैवेद्य और आरती की जा सकती है। करीब 2 घंटे 29 मिनट का यह समय गणेश पूजा के लिए महत्वपूर्ण है।
सुबह के समय भी हैं शुभ काल
अगर किसी कारण से मध्याह्न के मुख्य पूजा मुहूर्त से पहले गणपति स्थापना की तैयारी करनी है तो दिन के अन्य शुभ काल भी देखे जा सकते हैं। लेकिन गणेश चतुर्थी की मुख्य स्थापना के लिए केवल सामान्य चौघड़िया देखकर समय तय करने के बजाय मध्याह्न पूजा मुहूर्त को प्राथमिकता दी जाती है। सुबह अमृत और शुभ चौघड़िया जैसे समय भी पंचांग में आते हैं, लेकिन इन्हें गणेश चतुर्थी के विशेष मध्याह्न मुहूर्त का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
राहुकाल में न करें गणपति स्थापना
14 सितंबर को सोमवार होने के कारण राहुकाल सुबह के समय रहेगा। दिल्ली की गणना के अनुसार राहुकाल करीब सुबह 7:38 बजे से 9:11 बजे तक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार राहुकाल में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। इसलिए गणपति स्थापना के लिए इस अवधि को छोड़ना बेहतर रहेगा।
अभिजीत मुहूर्त में क्या कर सकते हैं?
दिन में अभिजीत मुहूर्त भी आता है। इसकी अवधि करीब 11:51 बजे से 12:41 बजे तक है। यह समय गणेश पूजा के मध्याह्न मुहूर्त के भीतर ही पड़ रहा है। इसलिए अगर आप स्थापना का समय चुन रहे हैं तो यह अवधि भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
गणपति की स्थापना कैसे करें?
गणपति स्थापना से पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। पूजा की चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें। प्रतिमा स्थापित करते समय भगवान गणेश का मुख उचित दिशा में रखने का ध्यान रखें। इसके बाद कलश स्थापित करें और गणेश जी का आह्वान करें। पूजा में सबसे पहले भगवान गणेश को जल अर्पित करें। इसके बाद चंदन, रोली, अक्षत और फूल चढ़ाएं। गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें। नैवेद्य में मोदक, लड्डू, फल और अन्य मिठाइयां रखी जा सकती हैं। धूप और दीप जलाने के बाद गणेश जी के मंत्रों का जाप करें। अंत में गणेश आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
गणेश पूजा की सामग्री क्या रखें?
गणपति स्थापना से पहले पूजा की सामग्री एक जगह तैयार कर लें। पूजा में मुख्य रूप से ये चीजें रखी जा सकती हैं-
– गणेश जी की प्रतिमा
– पूजा की चौकी और साफ कपड़ा
– कलश और जल
– रोली
– अक्षत
– चंदन
– दूर्वा
– लाल फूल
– धूप और दीप
– कपूर
– मोदक या लड्डू
– फल
– नारियल
– सुपारी
– पान
– मौली
– पंचामृत
– नैवेद्य
गणेश जी को दूर्वा और मोदक क्यों चढ़ाते हैं?
गणेश पूजा में दूर्वा और मोदक का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा के दौरान गणेश जी को दूर्वा की जुड़ी अर्पित की जाती है। इसी तरह मोदक को भगवान गणेश का प्रिय भोग माना जाता है। अगर मोदक उपलब्ध न हो तो श्रद्धा के अनुसार अन्य मिठाई या नैवेद्य भी अर्पित किया जा सकता है।
गणेश जी का कौन सा मंत्र पढ़ें?
गणपति पूजा में “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप किया जा सकता है। पूजा के दौरान इस मंत्र का श्रद्धा से जाप करें। इसके बाद गणेश जी की आरती करके पूजा संपन्न करें।
गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा क्यों नहीं देखना चाहिए?
गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन को लेकर धार्मिक मान्यता है। कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा को देखने से मिथ्या कलंक का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से चतुर्थी पर एक निश्चित अवधि में चंद्र दर्शन से बचने की परंपरा है।
सुबह हरतालिका तीज, फिर गणपति पूजा
इस बार 14 सितंबर का दिन इसलिए भी खास है क्योंकि हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों एक ही दिन हैं। हरतालिका तीज की तृतीया तिथि सुबह करीब 7:06 बजे समाप्त होती है। वहीं गणेश चतुर्थी की चतुर्थी तिथि शुरू होने के बाद गणपति पूजा का मध्याह्न काल आता है। ऐसे में घरों में सुबह शिव-पार्वती की पूजा और व्रत से जुड़े अनुष्ठान किए जा सकते हैं। इसके बाद गणपति स्थापना की तैयारी करके मध्याह्न काल में भगवान गणेश की पूजा की जा सकती है।
गणेश उत्सव कब तक चलेगा?
गणेश चतुर्थी के साथ गणेशोत्सव की शुरुआत होती है। भक्त अपनी परंपरा के अनुसार गणपति को अलग-अलग दिनों तक घर में रखते हैं। कुछ लोग डेढ़ दिन, कुछ तीन, पांच, सात या दस दिन तक गणपति की पूजा करते हैं। दस दिवसीय गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन होता है। इस दिन गणपति विसर्जन की परंपरा है।
