भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम के जमीन घोटाले में बड़ा ऐक्शन तो ले लिया, लेकिन मामले में अभी भी कई राज खुलने बाकी हैं।

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फिलहाल सीएम धामी के आदेश के बाद आरोपी और तत्कालीन नगर आयुक्त आईएएस वरुण चौधरी और तत्कालीन डीएम कमेंद्र सिंह पर बर्खास्तगी की तलवार लटक रही है। हरिद्वार के तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह की भी तीन वेतन वृद्धियां रोकने के आदेश जारी हुए हैं। जांच में यह भी सामने आया था कि एक कथित भाजपा नेता के खाते में 99 लाख ट्रांसफर हुए थे। जांच एजेंसियों ने उससे पूछताछ भी की थी, लेकिन मामले में न मुकदमा हुआ और न ही जांच आगे बढ़ी।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड।

हरिद्वार जमीन घोटाले की जांच में सामने आए बैंक लेनदेन ने पूरे प्रकरण को नया मोड़ दे दिया था। जांच में यह तथ्य सामने आया कि रानीपुर क्षेत्र से जुड़े एक कथित भाजपा नेता के बैंक खाते में भूमि विक्रेताओं की ओर से 99 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। जांच एजेंसियों ने इस लेनदेन को संदेहास्पद मानते हुए नेता से भी पूछताछ की थी।

अधिकारी का करीबी है नेता

आरोप यह भी रहे कि यह नेता एक अधिकारी का करीबी था और उसके खाते का इस्तेमाल कमीशन के लेनदेन के लिए किया गया। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार भूमि खरीद के भुगतान के बाद धनराशि कई खातों में स्थानांतरित हुई। जांच में सामने आया कि करीब 14 अलग-अलग बैंक खातों से धन का लेनदेन हुआ। इन्हीं लेनदेन की कड़ियों को जोड़ते हुए जांच एजेंसी ने बैंक खातों, ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और संबंधित लोगों से पूछताछ की। रानीपुर क्षेत्र के कथित भाजपा नेता के खाते में 99 लाख रुपये पहुंचे थे। हालांकि, लंबी जांच के बावजूद विजिलेंस ने इस रकम को लेकर अब तक कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है और न ही किसी व्यक्ति के खिलाफ इस आधार पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया है।

अधिकारी के साथ की थी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी

जिस कथित भाजपा नेता के खाते में पैसे आए हैं उसका पार्टनर और दोस्त एक अधिकारी के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की थी। अधिकारी का चयन हो गया लेकिन उसका चयन नहीं हो पाया। हरिद्वार आने के बाद अधिकारी और उसमें गहरी दोस्ती हो गई और उसकी प्रॉपर्टी का काम बढ़िया चला। चर्चा यहां तक है कि कमीशन प्रॉपर्टी डीलर और कथित भाजपा नेता की खाते में ही ली गई थी।

रिपोर्ट में तत्कालीन तहसीलदार का नाम नहीं

हरिद्वार। कृषि भूमि को व्यावसायिक भूमि बनाने के आरोप पर एसडीएम अजयवीर सिंह पर कार्रवाई हुई जबकि रिपोर्ट नीचे से आई है। जिनके हस्ताक्षर रिपोर्ट पर हैं, उन अधिकांश लोगों पर कार्रवाई की गई है, लेकिन तत्कालीन तहसीलदार को छोड़ दिया गया है। घोटाले के सामने आने के बाद तत्कालीन तहसीलदार को बाकायदा प्रमोशन तक दिया गया है। जिनके खिलाफ शासन से मुकदमा दर्ज करने के आदेश हुए हैं, उनमें भी तत्कालीन तहसीलदार का नाम नहीं है जिसके बाद हरिद्वार में यह मामला चर्चाओं का विषय बना रहा।

भूमि बेचने का आवेदन कर दिया गया गायब

लोगों ने कृषि भूमि बेचने के लिए नगर निगम में आवेदन किया था। इनमें से एक आवेदन पत्र ही नगर निगम की फाइलों से गायब कर दिया गया था। विजिलेंस ने कई बार नगर निगम जाकर उसे आवेदन पत्र की तलाश की लेकिन आवेदन पत्र नहीं मिल पाया।

35 करोड़ किए थे होल्ड

सूत्रों के अनुसार नगर निगम ने भूमि विक्रेताओं के खातों में 54 करोड़ का भुगतान किया गया था। बाद में जांच शुरू होने पर लगभग 35 करोड़ रुपये की राशि बैंक खातों में होल्ड करा दी गई, ताकि सरकारी धन की रिकवरी सुनिश्चित की जा सके। हालांकि शेष राशि की वसूली और रजिस्ट्री निरस्त करने की प्रक्रिया अब भी पूरी नहीं हो सकी है। प्रशासनिक और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भूमि की रजिस्ट्री निरस्त नहीं होती और भुगतान की पूरी रिकवरी नहीं हो जाती, तब तक यह मामला पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता।

निगम को मिले थे 100 करोड़

हाईवे पर जमीन आने के बाद नगर निगम को करोड़ों रुपये मिले थे, इसके अलावा हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण को एकता मॉल बनाने के लिए हाईवे के बाद ज्वालापुर में जमीन दी गई थी। इन दोनों से करीब हरिद्वार नगर निगम को 100 करोड़ रुपये मिले थे इसी राशि के आधार पर निगम ने जमीन खरीदने की योजना बनाई थी।


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