आज के दौर में लोग रिश्ते तलाशने के लिए सोशल मीडिया और मैट्रिमोनियल वेबसाइटों का सहारा लेते हैं। लेकिन यही भरोसा कुछ शातिर लोगों के लिए कमाई का जरिया बन गया। कानपुर में पुलिस ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो शादी कराने का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये ऐंठ रहा था।

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इस गिरोह का तरीका इतना प्लैनिंग के साथ बना था कि पढ़े-लिखे लोग भी आसानी से इसके जाल में फंस जाते थे। गिरोह के सदस्य पहले अविवाहित युवकों की जानकारी जुटाते और फिर उन्हें शादी का सपना दिखाकर पैसे वसूलते थे।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड।

कॉल सेंटर से चलता था पूरा खेल

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने शहर के अलग-अलग इलाकों में तीन कॉल सेंटर खोल रखे थे। बाहर से देखने पर ये सामान्य मैरिज ब्यूरो लगते थे, लेकिन अंदर बैठकर लोगों को ठगने का खेल खेला जाता था। यहां काम करने वाली टेलीकॉलर युवतियां खुद को मैरिज काउंसलर, रिलेशनशिप एडवाइजर या मैरिज मैनेजर बताती थीं। वे फोन पर बात करके युवकों की आर्थिक स्थिति, नौकरी, परिवार और बैंकिंग क्षमता जैसी जानकारी निकालती थीं।

इसके बाद उन्हें शादी के लिए आकर्षक प्रोफाइल भेजी जाती थी। इन प्रोफाइल में इंटरनेट से ली गई तस्वीरें और पूरी तरह मनगढ़ंत जानकारी शामिल होती थी।

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‘दुल्हनिया’ बनकर जीतती थीं भरोसा

गिरोह की सबसे बड़ी ताकत थीं वे युवतियां जो खुद को शादी के लिए इच्छुक लड़की बताकर बात करती थीं। पहले मैरिज काउंसलर के जरिए संपर्क कराया जाता, फिर दूसरी युवती सीधे युवक से बात करती। फोन पर बातचीत के दौरान वह शादी में रुचि दिखाती, परिवार की बातें करती और जल्द रिश्ता तय होने का भरोसा देती। कुछ दिनों में युवक को लगने लगता कि रिश्ता लगभग तय हो चुका है। यही वह समय होता था जब पैसों की मांग शुरू होती थी।

पैकेज बेचकर शुरू होती थी वसूली

गिरोह ने ठगी को व्यवस्थित रूप देने के लिए अलग-अलग पैकेज बना रखे थे। गोल्ड, सिल्वर और प्लेटिनम जैसे नामों वाले पैकेज तीन हजार से लेकर बीस हजार रुपये तक में बेचे जाते थे। पैकेज लेने के बाद भी युवक को राहत नहीं मिलती थी। रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोफाइल चार्ज, मैचिंग फीस, संपर्क शुल्क और पारिवारिक सहमति शुल्क जैसे नए-नए बहाने बनाकर रकम मांगी जाती थी।

अगर कोई व्यक्ति सवाल उठाता तो उसे फर्जी भुगतान रसीदें और स्क्रीनशॉट भेज दिए जाते थे। इससे उसे लगता था कि दूसरी तरफ से भी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

फोन पर बात करने के भी लगते थे पैसे

पुलिस के मुताबिक, युवक की कथित दुल्हन से बात कराने के बाद उसे 24 घंटे तक फोन न करने की सलाह दी जाती थी। लेकिन अगर युवक दोबारा संपर्क करता तो उससे पांच हजार रुपये तक अतिरिक्त वसूले जाते थे। इस तरह इमोशनली जोड़कर धीरे-धीरे बड़ी रकम निकलवाई जाती थी। कई लोग शादी की उम्मीद में बार-बार भुगतान करते रहे।

मजदूर से ठगे गए चार लाख रुपये

मामले का खुलासा तब हुआ जब बाराबंकी के रहने वाले एक मजदूर ने शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया कि उसकी शादी कराने का भरोसा दिलाकर चार महीने में उससे करीब चार लाख रुपये ले लिए गए। उसके पास खुद का बैंक खाता नहीं था, इसलिए वह ग्राहक सेवा केंद्र के माध्यम से आरोपियों के बताए खातों में पैसे जमा करता रहा। लेकिन शादी तो दूर, उसे सिर्फ नए-नए बहाने सुनने को मिले।

पुलिस छापे में खुली पोल

शिकायत मिलने के बाद साइबर टीम ने कॉल डिटेल और बैंक खातों की जांच शुरू की। कई नंबरों की लोकेशन एक ही इलाके में मिलने पर क्राइम ब्रांच ने तीन अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान 23 युवतियां कॉलिंग करते हुए मिलीं। पूछताछ के बाद पुलिस ने पूरे नेटवर्क का संचालन करने वाले मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

मौके से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, कंप्यूटर, रजिस्टर, एटीएम कार्ड, चेकबुक, क्यूआर कोड और बैंकिंग दस्तावेज बरामद किए गए।

करोड़ों के नेटवर्क की आशंका

जांच में आरोपियों से जुड़े 11 बैंक खातों का पता चला है। शुरुआती जांच में चार खातों से ही 41 लाख रुपये से अधिक के लेनदेन की जानकारी मिली है। पुलिस अब अन्य खातों और संभावित पीड़ितों की भी जानकारी जुटा रही है।अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।


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