राज्य आंदोलनकारियों ने नियुक्ति और लंबित परिणाम घोषित करने की मांग उठाई, धरना दूसरे दिन भी जारी

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देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संयुक्त मंच का धरना शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। राज्य आंदोलनकारियों को प्रदत्त 10 प्रतिशत क्षेत्रीय आरक्षण की बहाली के बावजूद वर्ष 2013 की परीक्षा में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को नियुक्ति न दिए जाने के विरोध में आंदोलनकारी धरने पर बैठे हैं। धरने की शुरुआत केदारनाथ आपदा में मृत लोगों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर की गई।
धरने को समर्थन देने पहुंचे पूर्व उक्रांद प्रवक्ता मनोरथ ध्यानी ने राज्य आंदोलनकारियों के साथ हो रहे व्यवहार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अधिनियम बनाए जाने के बावजूद वर्ष 2013 की परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों में से केवल सात लोगों को ही नियुक्ति दी गई, जबकि इस श्रेणी के लगभग 25 अभ्यर्थी अब भी नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ राज्य आंदोलनकारियों के परिणाम उच्च न्यायालय में लंबित मामले के कारण अब तक घोषित नहीं किए गए हैं। उन्होंने उत्तराखंड सरकार से सभी लंबित परिणाम शीघ्र घोषित करने की मांग की।
रामनगर से पहुंचे आंदोलनकारी भगवती कुकरेती ने कहा कि वर्ष 2013 के अभ्यर्थियों के साथ जो स्थिति बनी थी, वैसी समस्या भविष्य में राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों के सामने नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलन को मजबूत करने के लिए जल्द ही अन्य जिलों से भी आंदोलनकारी देहरादून पहुंचेंगे।
मंच संयोजक अम्बुज शर्मा ने धरने को समर्थन देने पहुंचे सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने सरकार और संबंधित पक्षों से इस विषय पर गंभीरता से विचार कर न्यायोचित समाधान निकालने की अपील की।
धरने में राम किशन, अम्बुज शर्मा, पंकज सिंह रावत, शैलेश सेमवाल सहित अनेक आंदोलनकारी शामिल रहे। वहीं समर्थन देने वालों में मनोरथ प्रसाद ध्यानी, प्रभात डंडरियाल, कमलेश नौटियाल, राजेश कुमार, मनोज कुमार, आनंद सिंह गोसाई, गुरु प्रसाद, सुशील घिल्डियाल, भगवती प्रसाद तथा समाजसेवी मोहन सिंह खत्री प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।


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