रुद्रपुर। गदरपुर के विधायक प्रेमानंद महाजन ने एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं को जारी किए गए नोटिसों के मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि किसी भी पात्र मतदाता के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि कहीं प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की विसंगति है तो उसे दूर कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि वे घबराने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएं, ताकि मतदाता सूची पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिरहित बन सके।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
इसी क्रम में बंगाली कल्याण समिति (पंजीकृत) उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप अधिकारी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी ऊधम सिंह नगर को ज्ञापन सौंपकर एसआईआर प्रक्रिया में सामने आ रही समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया। समिति का कहना है कि बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं को भी नोटिस जारी किए गए हैं, जिन्होंने पहले ही बीएलओ को अपने सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा दिए थे तथा पूर्व में मतदाता सूची में संशोधन भी करा लिया था। इसके बावजूद दोबारा नोटिस मिलने से लोगों में असमंजस और चिंता का माहौल है।
ज्ञापन में कहा गया है कि ऊधम सिंह नगर जनपद में बंगाली समाज की बड़ी आबादी निवास करती है। विशेष रूप से दिनेशपुर, शक्तिफार्म, खटीमा, झनकैया, सितारगंज और रुद्रपुर सहित कई क्षेत्रों में हजारों बंगाली परिवार रहते हैं। इसके अलावा रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप, रवीन्द्र नगर, संजय नगर, आदर्श इंदिरा बंगाली कॉलोनी, जगतपुरा, मुखर्जी नगर सहित अनेक मोहल्लों में भी बंगाली समाज के लोग बड़ी संख्या में बसे हुए हैं।
समिति का दावा है कि कई मोहल्लों में लगभग एक हजार मतदाताओं में से करीब सात सौ लोगों को एसआईआर संबंधी नोटिस प्राप्त हुए हैं। इससे लोगों के मन में यह आशंका बढ़ गई है कि यदि समय पर सभी औपचारिकताएं पूरी नहीं हो सकीं तो उनके नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि अधिकांश लोग वैध मतदाता हैं और वर्षों से मतदान करते आ रहे हैं। ऐसे में उन्हें दोबारा व्यापक स्तर पर दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा जाना लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।
बंगाली कल्याण समिति ने यह भी कहा कि वर्तमान में नोटिसों के निस्तारण के लिए जो समय सीमा निर्धारित की गई है, वह पर्याप्त नहीं है। कई आवश्यक प्रमाण-पत्र विभिन्न सरकारी विभागों से जारी होते हैं, जिन्हें प्राप्त करने में 15 से 20 दिन तक का समय लग जाता है। ऐसे में छह या नौ अगस्त जैसी अल्प समय सीमा के भीतर सभी दस्तावेज जुटा पाना अनेक परिवारों के लिए संभव नहीं है।
समिति ने जिलाधिकारी से मांग की है कि एसआईआर प्रक्रिया के लिए कम से कम एक माह का अतिरिक्त समय दिया जाए, ताकि सभी पात्र मतदाता बिना किसी जल्दबाजी के अपने आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर सकें। साथ ही प्रत्येक मतदान केंद्र पर बीएलओ के साथ एक सक्षम अधिकारी की भी तैनाती की जाए, जिससे मौके पर ही दस्तावेजों का सत्यापन, आवश्यक संशोधन और समस्याओं का समाधान किया जा सके। इससे लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेंगे।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि किसी तकनीकी कारण से पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटते हैं तो इसका सबसे अधिक प्रभाव तराई क्षेत्र के बंगाली समाज पर पड़ेगा। इसलिए प्रशासन को पूरी संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ प्रत्येक मामले की जांच करनी चाहिए तथा वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
समिति ने प्रशासन से यह भी अनुरोध किया कि जिन लोगों ने पहले ही बीएलओ को अपने दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं, उनके मामलों की प्राथमिकता के आधार पर जांच की जाए और अनावश्यक रूप से दोबारा नोटिस जारी करने से बचा जाए। इससे मतदाताओं की परेशानी कम होगी और पुनरीक्षण प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी ढंग से पूरी हो सकेगी।
बंगाली कल्याण समिति के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप अधिकारी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रक्रिया का विरोध करना नहीं, बल्कि पात्र मतदाताओं के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार करेगा और समय सीमा बढ़ाने सहित आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करेगा, ताकि किसी भी पात्र नागरिक का मतदान का अधिकार प्रभावित न हो।
ज्ञापन सौंपने के दौरान समिति के पदाधिकारियों ने प्रशासन से निष्पक्ष, पारदर्शी और जनहित में निर्णय लेने का आग्रह किया। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं कि एसआईआर प्रक्रिया में उठाई गई इन मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
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