प्रधानमंत्री का ‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत’ अभियान स्वागत योग्य, उत्तराखंड में धामी सरकार कब करेगी निर्णायक कार्रवाई?अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘नशा मुक्त युवा-विकसित भारत संकल्प अभियान’ निश्चित रूप से देश के युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने की दिशा में एक सराहनीय और दूरदर्शी पहल है। एक करोड़ से अधिक युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य, 28 हजार से अधिक स्थानों पर एक साथ अभियान की शुरुआत तथा समाज, शिक्षा जगत और आध्यात्मिक संगठनों की भागीदारी इस अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देती है। यदि यह अभियान धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू हुआ तो विकसित भारत के संकल्प को नई ऊर्जा मिलेगी।
लेकिन उत्तराखंड के संदर्भ में कुछ गंभीर सवाल भी खड़े होते हैं। क्या केवल शपथ दिलाने और जागरूकता कार्यक्रमों से नशा समाप्त हो जाएगा? क्या राज्य में तेजी से फैल रहे स्मैक, हेरोइन, गांजा, चरस, कच्ची शराब और मेडिकल स्टोरों से खुलेआम बिक रही नशीली गोलियों के नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार होगा?
आज उत्तराखंड के अनेक शहरों और कस्बों में नशे का कारोबार युवाओं का भविष्य निगल रहा है। कई स्थानों पर देसी और अंग्रेजी शराब की दुकानें आबादी के बीच संचालित हैं। अवैध कच्ची शराब का कारोबार भी समय-समय पर सामने आता रहा है। यदि सरकार वास्तव में नशामुक्त उत्तराखंड चाहती है तो केवल अभियान पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि नशे के स्रोतों पर कठोर कार्रवाई करनी होगी।
धामी सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या राज्य में नशा तस्करों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा? क्या कच्ची शराब के अवैध कारोबार का पूर्ण उन्मूलन होगा? क्या मेडिकल स्टोरों से बिना वैध चिकित्सकीय पर्चे के बिकने वाली नशीली दवाओं पर सख्त नियंत्रण लगाया जाएगा? क्या स्कूलों और कॉलेजों के आसपास संचालित शराब की दुकानों की समीक्षा होगी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में परिवार, समाज और उपचार की भूमिका पर विशेष बल दिया। यह संदेश अत्यंत महत्वपूर्ण है। किंतु उत्तराखंड में इस विजन को सफल बनाने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की भी है। यदि नशे की उपलब्धता पहले जैसी बनी रहती है तो जागरूकता अभियान का अपेक्षित परिणाम मिलना कठिन होगा।
उत्तराखंड की युवा पीढ़ी को बचाने के लिए समय आ गया है कि सरकार अभियान के साथ कठोर नीति भी अपनाए। नशा तस्करों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई, अवैध कच्ची शराब पर पूर्ण रोक, नशीली दवाओं की अवैध बिक्री पर सख्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में शराब दुकानों की नीति की समीक्षा जैसे ठोस कदम ही इस अभियान को वास्तविक सफलता दिला सकते हैं।
प्रधानमंत्री का विजन देश को नशामुक्त बनाने का है। अब उत्तराखंड की जनता की निगाहें धामी सरकार पर हैं कि वह इस संकल्प को केवल नारों तक सीमित रखती है या धरातल पर ऐसी निर्णायक कार्रवाई करती है जिससे हर युवा सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ सके।


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