पंतनगर में 120वें अखिल भारतीय किसान मेले का शुभारंभराज्यपाल बोले—समृद्ध किसान और आधुनिक तकनीक से बनेगा सशक्त उत्तराखंड‘बीज से बाजार तक’ मजबूत हो पूरी श्रृंखला, कृषि में तकनीक और युवा शक्ति को मिले बढ़ावा


पंतनगर, 3 अक्टूबर। जी.बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में शनिवार को 120वें अखिल भारतीय किसान मेले एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी का भव्य शुभारंभ हुआ। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि.) गुरमीत सिंह ने फीता काटकर एवं दीप प्रज्ज्वलित कर मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि समृद्ध किसान, आधुनिक तकनीक और युवा शक्ति मिलकर सशक्त उत्तराखंड की नींव तैयार कर सकते हैं।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


राज्यपाल ने कहा कि 120वें किसान मेले तक पहुंची यह गौरवशाली परंपरा कृषि के प्रति निरंतर विश्वास और किसानों के साथ संवाद की पहचान है। पंतनगर कृषि शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और किसान सेवा का महत्वपूर्ण केंद्र है। अब आवश्यकता इस बात की है कि विश्वविद्यालय में विकसित ज्ञान और तकनीक को उत्तराखंड के प्रत्येक कृषि क्षेत्र और किसान तक पहुंचाया जाए।
उन्होंने कहा कि किसान केवल खेत में फसल पैदा करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का निर्माता है। भारतीय संस्कृति में अन्न को जीवन का आधार माना गया है। बदलते दौर में किसान जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, जल संकट, बढ़ती उत्पादन लागत, श्रम की कमी और बाजार की अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में विज्ञान और तकनीक को खेती से जोड़ना आवश्यक है।
एआई, ड्रोन और डिजिटल तकनीक को खेती से जोड़ने पर जोर
राज्यपाल ने कहा कि डिजिटल कृषि के माध्यम से किसान रजिस्ट्री, मौसम एवं उपग्रह आधारित जानकारी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और बिग डेटा जैसी तकनीकों को कृषि से जोड़ा जा रहा है। एआई के माध्यम से मौसम पूर्वानुमान, फसलों में रोग की शुरुआती पहचान, मिट्टी के विश्लेषण, सिंचाई की आवश्यकता और उत्पादन के अनुमान में सहायता मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि ड्रोन खेतों की निगरानी और छिड़काव में उपयोगी हो रहे हैं, जबकि सेंसर और डिजिटल उपकरण मिट्टी, पानी और फसल की स्थिति की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। तकनीक का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि लागत घटाना, संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और किसान के निर्णय को अधिक सटीक बनाना होना चाहिए। तकनीक तभी सार्थक है, जब उसका लाभ छोटे और सीमांत किसानों तक पहुंचे।
उत्तराखंड में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कृषि मॉडल जरूरी
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड में मैदान, भाबर, तराई तथा निम्न, मध्य और उच्च हिमालयी क्षेत्र हैं। इसलिए पूरे प्रदेश में एक जैसा कृषि मॉडल लागू करने के बजाय स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कृषि मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है।
पर्वतीय क्षेत्रों में सीमित भूमि को देखते हुए फल, सब्जियां, फूल, सुगंधित एवं औषधीय पौधे, मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन सहित उच्च मूल्य वाली कृषि गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। ‘बीज से उत्पादन, उत्पादन से प्रसंस्करण, प्रसंस्करण से पैकेजिंग और पैकेजिंग से बाजार’ तक पूरी श्रृंखला को मजबूत करना होगा।
किसान बन रहे कृषि उद्यमी
राज्यपाल ने कहा कि आज किसान केवल उत्पादक नहीं, बल्कि कृषि उद्यमी के रूप में भी आगे बढ़ रहे हैं। किसान उत्पादक संगठन, सहकारी संस्थाएं, स्वयं सहायता समूह, स्थानीय प्रसंस्करण इकाइयां और कृषि आधारित छोटे उद्यम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं।
उन्होंने पारंपरिक कृषि ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि स्थानीय बीज और पीढ़ियों से संचित कृषि ज्ञान हमारी अमूल्य धरोहर हैं। परंपरा हमारी जड़ है और विज्ञान हमारी गति। दोनों का समन्वय कृषि को अधिक टिकाऊ और सक्षम बना सकता है।
राज्यपाल ने जल संरक्षण को कृषि के केंद्र में रखने की आवश्यकता बताते हुए वर्षा जल संचयन, कम पानी वाली फसलों, सूक्ष्म सिंचाई और मिट्टी की नमी संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कृषि क्षेत्र में महिलाओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं अब कृषि श्रम के साथ-साथ कृषि उद्यमिता, उत्पादक समूहों के नेतृत्व और स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन में भी आगे बढ़ रही हैं।
युवाओं के लिए कृषि में बढ़ रहे नए अवसर
उन्होंने कहा कि एग्री-टेक, ड्रोन सेवा, कृषि प्रसंस्करण, डिजिटल बाजार और कृषि आधारित स्टार्टअप युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं। किसान का अनुभव और युवा की तकनीकी क्षमता मिलकर कृषि नवाचार और रोजगार का नया आधार बन सकते हैं।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के शोध को किसानों की वास्तविक समस्याओं से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र स्थानीय समस्याओं के समाधान के केंद्र बनें और वैज्ञानिक ज्ञान प्रदेश के सभी जिलों तक पहुंचे। शोध का अंतिम लक्ष्य केवल शोधपत्र नहीं, बल्कि किसान के खेत में दिखाई देने वाला परिवर्तन होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि खेत में विज्ञान, किसान के हाथ में तकनीक, गांव तक एआई, पानी की हर बूंद का सदुपयोग और स्थानीय उत्पादों को उचित बाजार मिलना समय की आवश्यकता है। समृद्ध किसान से समृद्ध गांव और समृद्ध गांव से सशक्त उत्तराखंड का निर्माण होगा।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने गिनाईं सरकार की योजनाएं
काबीना मंत्री कृषि एवं कृषक कल्याण गणेश जोशी ने 120वें अखिल भारतीय किसान मेले के आयोजन के लिए सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय के बीजों की देशभर में पहचान है तथा किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के हितों के लिए लगातार काम कर रही है और किसानों को किसान सम्मान निधि का लाभ दिया जा रहा है। कृषि क्षेत्र में किसानों की आय बढ़ाने के लिए भी विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।
10 प्रगतिशील किसानों को किया सम्मानित
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. कश्यप ने विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय हमेशा किसानों के साथ खड़ा रहा है और उन्नत बीज तथा आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने 10 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। इसके साथ ही कृषि से संबंधित साहित्य का विमोचन भी किया गया।
इस अवसर पर उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहानी, कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.एस. बिष्ट, निदेशक प्रसार जितेंद्र क्वात्रा, निदेशक शोध एस.के. वर्मा, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, डीन बी.एस. चलाल सहित विश्वविद्यालय के डीन, निदेशक, वैज्ञानिक, शिक्षक, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।