गड्ढामुक्त उत्तराखंड पर कटाक्षउत्तराखंड को गड्ढामुक्त करने का अभियान जारी है, मगर बाजपुर की तस्वीर व्यवस्था पर ही सवाल खड़े करती है। सड़क की मरम्मत का जिम्मा विभाग का है, लेकिन जिलाधिकारी को खुद मौके पर खड़े होकर गड्ढे भरवाने पड़ रहे हैं। सवाल है—जब डीएम साहब सड़क बनवाएंगे तो पीडब्ल्यूडी के अधिकारी आखिर क्या करेंगे? क्या विभाग तब जागेगा, जब जिलाधिकारी निरीक्षण के लिए पहुंचेंगे? सड़कें बार-बार टूटें, फिर मरम्मत हो और दोबारा वही कहानी शुरू हो—यह व्यवस्था कब बदलेगी? गड्ढे भरना जरूरी है, लेकिन उससे ज्यादा जरूरी है यह तय करना कि गड्ढे पड़े ही क्यों और इसके लिए जवाबदेह कौन है


गड्ढामुक्त उत्तराखंड या विभागीय लापरवाही? डीएम को खुद संभालनी पड़ी सड़क
डीएम साहब सड़क बनवा रहे हैं, फिर पीडब्ल्यूडी क्या कर रहा है?
गड्ढे सड़क पर, सवाल सिस्टम पर—डीएम की मौजूदगी ने खोली विभाग की पोल

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


गड्ढामुक्त उत्तराखंड की मुहिम पर बड़ा सवाल यह है कि सड़क विभाग की जिम्मेदारी निभाने के लिए जिलाधिकारी को खुद मौके पर खड़े होकर गड्ढे भरवाने की जरूरत क्यों पड़ रही है? बाजपुर में डीएम नितिन सिंह भदौरिया ने सड़क का निरीक्षण कर अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से मरम्मत के निर्देश दिए हैं। उनकी सक्रियता सराहनीय है, लेकिन इससे लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल भी उठते हैं। सड़क बार-बार खराब होने के कारण, निर्माण गुणवत्ता, रखरखाव और जिम्मेदार अधिकारियों-ठेकेदारों की जवाबदेही तय किए बिना केवल गड्ढे भरना स्थायी समाधान नहीं है। जनता को अभियान नहीं, टिकाऊ और सुरक्षित सड़क चाहिए।