कोर्ट ने कहा कि इस याचिका का आधार जो न्यूज रिपोर्ट है, आंशिक रूप से सही या गलत हो सकती है। हम उसके आधार पर कोई आदेश नहीं दे सकते।
‘Hindustan global Times’ ने 25 सितंबर को रिपोर्ट दी थी कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनावी रोल के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) से जुड़े फैसलों और आदेशों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि ये फैसले उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए थे। अपने दो आयुक्तों द्वारा उठाए गए सवालों के घेरे में आए चुनाव आयोग ने कहा कि किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य बात है और उसके सभी आदेशों को पूरी कानूनी मान्यता प्राप्त है और वे स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार जारी किए गए हैं।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने सीनियर वकील विकास सिंह की दलीलों पर ध्यान दिया और नोटिस जारी किया। बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग के फैसले या तो सर्वसम्मति से होने चाहिए या बहुमत से, और कोर्ट ने माना कि सभी फैसले इसी तरह लिए जाते हैं।
पटना के रहने वाले राकेश कुमार सिंह की ओर से दायर PIL में शीर्ष अदालत से यह तय करने का आग्रह किया गया कि क्या मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) कुमार उन शक्तियों का व्यक्तिगत रूप से इस्तेमाल कर रहे हैं जो कानूनी तौर पर पूरे चुनाव आयोग (EC) की हैं। साथ ही, अगर ऐसा है, तो उन कार्यों को अनधिकृत घोषित करने और उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई।
याचिका में कहा गया, ‘निर्देश दिया जाए कि प्रतिवादी नंबर 3 (CEC) इस याचिका की अंतिम सुनवाई तक भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यों का पालन न करें; निर्देश दिया जाए कि इस दौरान आयोग का कामकाज प्रतिवादी नंबर 4 (सुखबीर सिंह संधू) और 5 (विवेक जोशी) के सर्वसम्मत फैसले से चलाया जाए; और निर्देश दिया जाए कि खाली पद पर कोई भी नियुक्ति एक समिति की सिफारिश पर की जाए, जिसमें भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हों।
