कलश स्थापना: वैदिक परंपरा के अनुसार पूजा-विधान
नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना या कलश स्थापना का विशेष महत्व है। इसे देवी शक्ति के आह्वान और शुभ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ करें। चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें। मिट्टी के पात्र में जौ बोएं। इसके बाद परंपरा के अनुसार जल से भरा कलश स्थापित करें। कलश पर स्वस्तिक बनाएं, उसमें अक्षत, सुपारी और सिक्का डालें तथा आम के पत्ते रखें। लाल चुनरी में लिपटा नारियल कलश के ऊपर स्थापित कर मां दुर्गा का ध्यान करें।
पूजा के दौरान धूप, दीप, पुष्प, अक्षत, फल और नैवेद्य अर्पित करें। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार अखंड ज्योति प्रज्वलित कर सकते हैं। दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखें और उसकी निरंतर निगरानी करें। नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशती, देवी मंत्रों, दुर्गा चालीसा और आरती के माध्यम से मां की आराधना की जाती है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड
घटस्थापना मुहूर्त, 11 अक्टूबर 2026: प्रकाशित पंचांग संबंधी जानकारी के अनुसार प्रातः 6:19 से 10:12 बजे तक तथा अभिजीत मुहूर्त में लगभग 11:44 से 12:31 बजे तक का समय बताया गया है। मुहूर्त की सटीक अवधि स्थान और पंचांग के अनुसार अलग हो सकती है, इसलिए रुद्रपुर सहित अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग से पुष्टि करना उचित रहेगा।
नवरात्रि के नौ स्वरूप और पूजा की तिथियां
शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना की जाती है। वर्ष 2026 के प्रचलित पंचांग के अनुसार पूजा का क्रम इस प्रकार है।
11 अक्टूबर, रविवार: मां शैलपुत्री — दृढ़ता, श्रद्धा और संकल्प की प्रतीक।
12 अक्टूबर, सोमवार: मां ब्रह्मचारिणी — तप, त्याग और साधना का संदेश।
13 अक्टूबर, मंगलवार: मां चंद्रघंटा — साहस, शौर्य और निर्भयता का प्रतीक।
14 अक्टूबर, बुधवार: मां कूष्मांडा — सृजन और जीवन ऊर्जा की अधिष्ठात्री।
15 अक्टूबर, गुरुवार: मां स्कंदमाता — मातृत्व, वात्सल्य और करुणा का स्वरूप।
16 अक्टूबर, शुक्रवार: मां कात्यायनी — धर्म की रक्षा और अन्याय के विरुद्ध शक्ति का प्रतीक।
17 अक्टूबर, शनिवार: मां कालरात्रि — भय और अज्ञान पर विजय का संदेश।
18 अक्टूबर, रविवार: मां कालरात्रि की सप्तमी पूजा का क्रम कुछ पंचांगों में इस तिथि तक विस्तारित बताया गया है; स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा करें।
19 अक्टूबर, सोमवार: महाष्टमी तथा महानवमी का संयोग; मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा।
20 अक्टूबर, मंगलवार: विजयादशमी, दशहरा और परंपरा के अनुसार दुर्गा विसर्जन।
इस वर्ष तिथियों के विशेष संयोग के कारण अष्टमी और नवमी की पूजा एक ही दिन पड़ सकती है। इसलिए कन्या पूजन, हवन और व्रत पारण के लिए स्थानीय पंचांग का अनुसरण करना चाहिए।
व्रत, साधना और कन्या पूजन का महत्व
नवरात्रि में व्रत रखने का उद्देश्य केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि मन, वाणी और व्यवहार को संयमित करना भी है। श्रद्धालु अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या सात्त्विक भोजन ग्रहण करते हैं। मंत्र-जप, ध्यान, दान, जरूरतमंदों की सहायता और जीवों के प्रति दया को भी देवी आराधना का महत्वपूर्ण अंग माना गया है।
अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन की परंपरा में बालिकाओं को देवी स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है। इस परंपरा का सार तभी सार्थक है, जब बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और समान अवसरों को भी महत्व दिया जाए।
नारी सम्मान ही शक्ति-उपासना का वास्तविक संदेश
नवरात्रि का आध्यात्मिक संदेश मंदिरों और पूजा स्थलों तक सीमित नहीं है। मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूप हमें यह स्मरण कराते हैं कि शक्ति का सम्मान जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में होना चाहिए। परिवार में बेटी को शिक्षा का अवसर देना, महिलाओं के निर्णयों का सम्मान करना, कार्यस्थलों पर समानता सुनिश्चित करना और हिंसा तथा भेदभाव के विरुद्ध खड़ा होना भी शक्ति की आराधना का व्यावहारिक रूप है।
यदि हम नौ दिनों तक मां जगदम्बा की पूजा करें, लेकिन अपने आसपास की महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की उपेक्षा करें, तो हमारी साधना का सामाजिक उद्देश्य अधूरा रह जाता है। सच्ची भक्ति वह है, जिसमें श्रद्धा के साथ सेवा, पूजा के साथ सदाचार और धार्मिक आस्था के साथ मानवीय संवेदना भी जुड़ी हो।
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
मां जगदम्बा से सुख, शांति और सद्बुद्धि की प्रार्थना
शारदीय नवरात्रि का यह पावन पर्व सभी श्रद्धालुओं के जीवन में सद्भाव, सकारात्मकता और आध्यात्मिक चेतना का संचार करे। मां दुर्गा से प्रार्थना है कि वे समस्त समाज को साहस, विवेक और सद्बुद्धि प्रदान करें, किसानों के जीवन में समृद्धि आए, परिवारों में प्रेम बना रहे और समाज में नारी सम्मान तथा मानवीय मूल्यों की स्थापना हो।
जय माता दी! जय मां दुर्गा!
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की ओर से समस्त श्रद्धालुओं को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।
