उत्तराखंड में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की फसलें बर्बाद, मुआवजे की मांग तेज; धान खरीद शुरू न होने से दोहरी मार


रुद्रपुर/उत्तराखंड। उत्तराखंड के तराई क्षेत्रों में बेमौसम बारिश, तेज आंधी-तूफान और भारी ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में खड़ी धान, गन्ने और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचने से किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। एक ओर प्राकृतिक आपदा ने महीनों की मेहनत बर्बाद कर दी, वहीं दूसरी ओर सरकारी धान क्रय केंद्रों पर तौल शुरू न होने से किसान अपनी उपज बेचने के लिए परेशान हैं। ऐसे में किसानों को तत्काल आर्थिक राहत देने और धान खरीद व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग उठने लगी है।

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट उत्तराखंड | देश-दुनिया की खबरों पर नजर


प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों की मदद के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर सांकेतिक प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर बर्बाद धान की फसल के लिए 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजे की मांग उठाई। साथ ही गन्ने और अन्य फसलों को हुए नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने, किसानों के बिजली बिल माफ करने तथा आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ने का समर्थन मूल्य 700 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित करने की मांग की गई। तीन दिन के भीतर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी भी दी गई।
भारतीय किसान यूनियन चढूनी की ओर से भी बाजपुर और गदरपुर क्षेत्र में बारिश से खराब हुई फसलों के लिए प्रति एकड़ 50 हजार रुपये मुआवजा देने की मांग की गई है। किसान संगठनों का कहना है कि यदि समय पर धान की खरीद शुरू हो जाती तो किसानों की उपज मंडियों तक पहुंचकर सुरक्षित हो सकती थी।
धान खरीद केंद्रों पर तौल का इंतजार, किसान मजबूरी में बेच रहे उपज
सितारगंज और नानकमत्ता क्षेत्र में सरकारी धान क्रय केंद्रों पर खरीद व्यवस्था शुरू नहीं होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दस दिन बाद भी कई केंद्रों पर तौल शुरू नहीं हो सकी थी। सितारगंज के एसएमओ क्रय केंद्र पर 1,700 कुंतल धान की खरीद होने की जानकारी सामने आई, जबकि अन्य केंद्रों पर केवल बैनर लगे होने की शिकायत की गई है।
किसानों का आरोप है कि सरकारी खरीद और कच्चे आढ़तियों के यहां तौल शुरू नहीं होने के कारण उन्हें बिचौलियों को लगभग 1,800 रुपये प्रति कुंतल तक धान बेचना पड़ रहा है। इसमें भी विभिन्न कटौतियां किए जाने की शिकायतें हैं। राइस मिलरों के पंजीकरण और कच्चे आढ़तियों की व्यवस्था से जुड़े मुद्दों के कारण खरीद प्रक्रिया प्रभावित होने की बात कही जा रही है। ऐसे में मौसम की मार झेल रहे किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने की चिंता भी सता रही है।
किसानों को 25 हजार रुपये प्रति एकड़ राहत देने की अपील
किसानों की पीड़ा को सामने रखते हुए उत्तराखंड कांग्रेस के एक पदाधिकारी एवं पूर्व दर्जा राज्य मंत्री ने सरकार से कम से कम 25 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से तत्काल मुआवजा देने की अपील की है। उनका कहना है कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की महीनों की मेहनत, परिवार की उम्मीदों और आर्थिक योजनाओं को प्रभावित किया है। फसल बर्बाद होने के बाद भी किसानों को बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च और कर्ज चुकाने जैसी जिम्मेदारियां निभानी हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किए जाने के बाद अब किसानों को राहत पहुंचाने के लिए तेजी से कदम उठाए जाने चाहिए। प्रभावित खेतों का निष्पक्ष सर्वेक्षण कर वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाए और पात्र किसानों को समयबद्ध तरीके से मुआवजा दिया जाए, ताकि वे आर्थिक संकट से उबर सकें।
अब सरकार के सामने राहत और खरीद व्यवस्था सुधारने की चुनौती
प्रभावित किसानों की प्रमुख मांगों में फसलों के नुकसान का तत्काल सर्वेक्षण, उचित मुआवजा, सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की तौल शुरू कराना, किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाना और गन्ने के आगामी पेराई सत्र की समय पर शुरुआत शामिल हैं। चीनी मिलों को नवंबर के प्रथम सप्ताह तक चालू करने की मांग भी उठाई गई है, ताकि किसान समय पर खेत खाली कर गेहूं की बुआई कर सकें।
प्राकृतिक आपदा के बाद किसानों को राहत देने के लिए सर्वेक्षण और मुआवजे की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है तथा धान खरीद व्यवस्था कब सुचारु होती है, इस पर प्रभावित किसानों की निगाहें टिकी हैं। किसानों की मांग है कि राहत केवल घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि उन्हें समय पर आर्थिक सहायता और अपनी उपज बेचने की ठोस व्यवस्था भी मिले।