खटीमा की ऐतिहासिक रामलीला में राम-केवट मिलन ने मोहा दर्शकों का मन, भरत-राम मिलन देखकर भावविभोर हुए श्रद्धालु


केवट सम्मेलन और भरत-राम संवाद रहे मंचन के मुख्य आकर्षण, ‘मेरी नैया पार लगा दो भगवान’ के भजनों से गूंजा रामलीला मैदान
खटीमा। खटीमा की सबसे पुरानी एवं ऐतिहासिक रामलीला का मंचन रामलीला मैदान में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ किया गया। रामलीला के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। इस दौरान राम-केवट मिलन, केवट सम्मेलन, भरत-राम वार्ता और राजा दशरथ के परलोक गमन के प्रसंगों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। रामलीला देखने के लिए मैदान में सैकड़ों की संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
रामलीला मंचन में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के चौदह वर्ष के वनवास के दौरान गंगा नदी पार करने का प्रसंग विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। जब केवट अपने परिवार के साथ भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को अपनी नाव से गंगा नदी पार कराने पहुंचा, तो मंच पर भक्ति और समर्पण का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। इस प्रसंग के दौरान प्रस्तुत भजन ‘मेरी नैया पार लगा दो भगवान’ में दर्शकों ने भी साथ गाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। पूरा रामलीला मैदान प्रभु श्रीराम के जयकारों और भक्ति भाव से गूंज उठा।

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट उत्तराखंड | देश-दुनिया की खबरों पर नजर


भरत-राम मिलन ने दर्शकों को किया भावुक
रामलीला में भरत-राम वार्ता और भरत मिलाप का प्रसंग भी दर्शकों के लिए बेहद भावुक रहा। भरत द्वारा भगवान श्रीराम से अयोध्या वापस लौटने का निवेदन करने के दृश्य ने भाइयों के बीच प्रेम, त्याग, निष्ठा और समर्पण की भावना को जीवंत कर दिया। दोनों भाइयों के एक-दूसरे के प्रति अगाध प्रेम को देखकर दर्शक भावविभोर हो गए। इसके साथ ही राजा दशरथ के परलोक गमन के प्रसंग का भी प्रभावशाली मंचन किया गया।
रामलीला के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से कलाकारों ने मर्यादा, पारिवारिक संबंधों, त्याग और धर्म के आदर्शों को प्रस्तुत किया। ऐतिहासिक रामलीला के मंचन का दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया।
कलाकारों ने निभाईं महत्वपूर्ण भूमिकाएं
रामलीला में भगवान श्रीराम की भूमिका आशीष कुंवर, माता सीता की भूमिका मनीष मौर्य तथा लक्ष्मण की भूमिका सुशांत कुमार ने निभाई। केवट की भूमिका रामचंद्र कश्यप और वीरेंद्र रावत ने प्रस्तुत की।
केवट के परिवार की भूमिकाओं में अर्चित अग्रवाल, नागेश गुप्ता, गुरु गुंबर, आर्यन जोशी, अनुराग बत्रा, अशोक रस्तोगी, अर्जुन बत्रा, अजय कटारिया, राहुल गुप्ता, मुकेश कश्यप और हार्दिक गुप्ता ने अभिनय किया। कलाकारों ने अपने अभिनय से रामायण के प्रसंगों को जीवंत बनाने का प्रयास किया, जिसे दर्शकों ने सराहा।
पदाधिकारियों ने संभाली रामलीला की व्यवस्था
रामलीला कार्यक्रम की अध्यक्षता गौरीशंकर अग्रवाल ने की, जबकि विजय कुमार ने मुख्य संबोधक की भूमिका निभाई। रामलीला के सफल आयोजन और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में महामंत्री इंद्रेश गुंबर के साथ मनोज वाधवा, राजू श्रीवास्तव, विनोद भारती, जतिन कक्कड़, रोहित ठाकुर, मनोज श्रीवास्तव और विशाल अग्रवाल सहित अन्य लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
खटीमा की इस ऐतिहासिक रामलीला में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक सहभागिता का सुंदर संगम देखने को मिला। सैकड़ों दर्शकों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई। राम-केवट मिलन और भरत-राम मिलन जैसे प्रसंगों ने एक बार फिर भगवान श्रीराम के आदर्शों, भाइयों के प्रेम और भक्त की अटूट श्रद्धा का संदेश जनमानस तक पहुंचाया।