गढ़वाल सभा गुरुग्राम के त्रिवार्षिक चुनाव में नारायण सिंह रावत निर्विरोध प्रधान निर्वाचित, पांचों पदों पर सर्वसम्मति से चयन


गुरुग्राम। उत्तराखंड की गढ़वाली संस्कृति, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली गढ़वाल सभा (पंजीकृत), गुरुग्राम की नई कार्यकारिणी का त्रिवार्षिक निर्वाचन संपन्न हो गया। निर्वाचन प्रक्रिया के तहत प्रधान पद पर नारायण सिंह रावत सहित पांचों पदों के लिए निर्विरोध निर्वाचन हुआ। सभी पदों पर एक-एक नामांकन प्राप्त होने और जांच में वैध पाए जाने के बाद मतदान कराने की आवश्यकता नहीं पड़ी। निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र रावत ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को चुनाव परिणाम घोषित करते हुए नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के नामों की औपचारिक घोषणा की।

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर


सभा की नई कार्यकारिणी के गठन को संगठन की एकजुटता और आपसी सहमति का प्रतीक माना जा रहा है। नई टीम से उम्मीद की जा रही है कि वह पिछले चार दशकों से अधिक समय से चली आ रही सभा की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।
पांच पदों पर निर्विरोध निर्वाचन, नई टीम को मिली जिम्मेदारी
गढ़वाल सभा, गुरुग्राम की कार्यकारिणी के त्रिवार्षिक चुनाव के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पांच पदों पर नामांकन आमंत्रित किए गए थे। निर्वाचन के दौरान प्रत्येक पद के लिए एक ही नामांकन-पत्र प्राप्त हुआ। निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र रावत ने नामांकन-पत्रों की जांच की, जिसमें सभी पांचों नामांकन वैध पाए गए। किसी भी पद पर अन्य प्रत्याशी सामने नहीं आने के कारण सभी पदों पर निर्विरोध निर्वाचन संपन्न हुआ।
नवनिर्वाचित कार्यकारिणी में नारायण सिंह रावत को प्रधान, गंगा सिंह नेगी को उपप्रधान, राय सिंह भंडारी को महासचिव, जगदीप सिंह रावत को संयुक्त सचिव और ईश्वर प्रसाद रतूड़ी को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नई कार्यकारिणी के गठन के साथ ही सभा के सदस्यों को संगठन के आगामी कार्यकाल से नई उम्मीदें जुड़ गई हैं। सदस्यों का विश्वास है कि पदाधिकारी आपसी समन्वय, सहयोग और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से सभा के उद्देश्यों को आगे बढ़ाएंगे तथा समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप गतिविधियों का संचालन करेंगे।
विजयदशमी पर विधि-विधान से हुई पूजा-अर्चना
निर्वाचन परिणाम की घोषणा के अवसर पर विजयदशमी का पावन पर्व भी श्रद्धा और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। पंडित सुमित शास्त्री ने विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई। इस दौरान उपस्थित सदस्यों ने भगवान से गढ़वाल सभा की निरंतर उन्नति, संगठन की एकता, उज्ज्वल भविष्य और समाजसेवा के कार्यों में सफलता की कामना की।
धार्मिक आयोजन ने निर्वाचन कार्यक्रम को आध्यात्मिक वातावरण प्रदान किया। उपस्थित सदस्यों ने पर्व की शुभता के बीच संगठन की भावी गतिविधियों और सामाजिक जिम्मेदारियों को लेकर सकारात्मक विचार व्यक्त किए। सदस्यों ने आशा जताई कि नई कार्यकारिणी धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ समाज के लोगों को एक मंच पर जोड़ने का कार्य करेगी।
विजयदशमी का पर्व असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देता है। ऐसे पावन अवसर पर सभा के नए पदाधिकारियों की घोषणा और पूजा-अर्चना का आयोजन सदस्यों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर संगठन की परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक सहभागिता को बनाए रखने की भावना भी प्रमुख रूप से सामने आई।
चार दशक से अधिक समय से समाजसेवा में सक्रिय है गढ़वाल सभा
गढ़वाल सभा, गुरुग्राम पिछले 40 वर्षों से अधिक समय से उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल से जुड़े लोगों की एक प्रतिष्ठित संस्था के रूप में सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में योगदान देती आ रही है। सभा ने अपने लंबे सफर में प्रवासी गढ़वाली समाज को एक साझा मंच उपलब्ध कराने तथा अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित होते महानगर में उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों के बीच आपसी संपर्क, सहयोग और सांस्कृतिक जुड़ाव बनाए रखना विशेष महत्व रखता है। ऐसे में सामाजिक संस्थाओं की भूमिका केवल कार्यक्रम आयोजित करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे लोगों को अपनी जड़ों, भाषा, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़े रखने का माध्यम भी बनती हैं।
गढ़वाल सभा इसी उद्देश्य के साथ वर्षों से सक्रिय रही है। संस्था के सदस्य समय-समय पर सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से समाज की सहभागिता सुनिश्चित करते रहे हैं। नई कार्यकारिणी के गठन के बाद संगठन के सामने अपनी इन परंपराओं को और मजबूत बनाने तथा आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की जिम्मेदारी भी रहेगी।
सभा के सदस्यों ने उम्मीद जताई कि नई टीम वरिष्ठ सदस्यों के अनुभव और युवाओं की सहभागिता का समन्वय करते हुए संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाएगी। साथ ही समाज के लोगों के बीच भाईचारे, सहयोग और एकजुटता की भावना को मजबूत करने के प्रयास किए जाएंगे।
संस्थापक सदस्य सहित अनेक गणमान्य सदस्य रहे उपस्थित
निर्वाचन परिणाम की घोषणा और धार्मिक आयोजन के अवसर पर सभा के संस्थापक सदस्य मोहन सिंह रावत सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे। इनमें गबर सिंह रावत, अशोक बहुखंडी, कमल सिंह भंडारी, बलवंत सिंह नेगी, सतपाल सिंह रावत, भक्त दर्शन सिंह नेगी, हनुमंत सिंह जंगवान, नेत्र सिंह असवाल, कुंदन सिंह गुसाईं, रविंद्र सिंह नेगी और संतोष रौठाण सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।
उपस्थित सदस्यों ने नई कार्यकारिणी के गठन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दीं। सभी ने सभा की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने और समाजहित के कार्यों में मिलकर योगदान देने का संकल्प व्यक्त किया।
निर्विरोध निर्वाचन को संगठन के भीतर आपसी सहमति और सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है। नई कार्यकारिणी से अपेक्षा है कि वह सदस्यों के सुझावों को महत्व देते हुए सभा की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करेगी और सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजनों में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी।
नई कार्यकारिणी से समाज को बड़ी उम्मीदें
गढ़वाल सभा के त्रिवार्षिक निर्वाचन के संपन्न होने के साथ संगठन को आगामी कार्यकाल के लिए नया नेतृत्व मिल गया है। नारायण सिंह रावत के नेतृत्व में गठित कार्यकारिणी के सामने सभा की परंपराओं को संरक्षित रखने, सांस्कृतिक आयोजनों को प्रोत्साहित करने और समाज के लोगों को एकजुट रखने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।
सदस्यों ने विश्वास जताया कि नई टीम वरिष्ठजनों के मार्गदर्शन और सभी सदस्यों के सहयोग से सभा को आगे बढ़ाएगी। संगठन की एकता, सामाजिक सहभागिता और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण आगामी कार्यकाल में महत्वपूर्ण विषय बने रहेंगे।
विजयदशमी के पावन अवसर पर संपन्न निर्वाचन और पूजा-अर्चना के साथ गढ़वाल सभा, गुरुग्राम ने अपने नए कार्यकाल की दिशा में कदम बढ़ाया है। सभा के सदस्यों की सामूहिक भावना यही रही कि संगठन की प्रतिष्ठा, सामाजिक प्रतिबद्धता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाते हुए समाजहित के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाया जाए।
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