धार्मिक आयोजनों में लगातार सक्रिय राजकुमार ठुकराल, रामलीला से दुर्गा पूजा तक हर मंच पर दिखी मौजूदगी

रुद्रपुर शहर से गांवों तक धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागिता, श्रद्धालुओं से जुड़ाव और सनातन परंपराओं के प्रति आस्था बनी चर्चा का विषय

रुद्रपुर। शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल की लगातार मौजूदगी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। रामलीला का मंच हो, विजयदशमी पर रावण दहन का आयोजन, दुर्गा पूजा का पंडाल, माता की चौकी हो या अन्य धार्मिक अनुष्ठान, विभिन्न आयोजनों में मुख्य अतिथि के रूप में उनकी सहभागिता दिखाई दे रही है। रुद्रपुर शहर से लेकर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों तक आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में पहुंचकर वह पूजा-अर्चना कर रहे हैं और श्रद्धालुओं के साथ पर्वों की खुशियां साझा कर रहे हैं।

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर

धार्मिक आयोजनों में उनकी इस सक्रियता को केवल एक औपचारिक उपस्थिति के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे स्थानीय धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों से उनके जुड़ाव के रूप में भी देखा जा रहा है। पूजा समितियों, रामलीला आयोजकों और स्थानीय लोगों के बीच उनकी उपस्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि, इन आयोजनों में उनकी सक्रियता का वास्तविक सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव कितना होगा, यह आने वाला समय बताएगा।

इंद्रा कॉलोनी की रामलीला में रावण वध, बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश

विजयदशमी के अवसर पर इंद्रा कॉलोनी, रुद्रपुर में श्री शिव नाटक क्लब की ओर से आयोजित रामलीला मंचन के अंतिम दिन भगवान श्रीराम और रावण के बीच भीषण युद्ध का मंचन किया गया। रावण वध के साथ ही रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन कर असत्य पर सत्य तथा बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ श्री शिव नाटक क्लब के संरक्षक एवं पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष हिमांशु गावा, समाजसेवी संजय ठुकराल, कपूर ज्वेलर्स के स्वामी हरीश कपूर और जय गुरुदेव इंडस्ट्रीज के स्वामी रोहित गुंबर ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

रामलीला में विभीषण द्वारा रावण की मृत्यु का रहस्य बताए जाने के बाद प्रभु श्रीराम ने उसकी नाभि पर बाण चलाकर उसका वध किया। मंचन के दौरान रावण के अंतिम समय में लक्ष्मण को दी गई सीख के माध्यम से अहंकार से दूर रहने, चापलूसों की बातों में न आने और पराई स्त्री पर कुदृष्टि न डालने का संदेश प्रस्तुत किया गया। यह प्रसंग दर्शकों को बताता है कि ज्ञान, शक्ति और वैभव होने के बावजूद गलत आचरण तथा अहंकार पतन का कारण बन सकते हैं।

रावण वध के बाद रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतलों का दहन किया गया। राम की भूमिका अभिनव अनेजा, लक्ष्मण की गर्व गुलाटी, रावण की अतुल बांगा, विभीषण की विशाल गुंबर, हनुमान की सन्नी कक्कड़, अंगद की दीपांशु धानुक, सुग्रीव की चिराग चुघ और सीता की भूमिका नैतिक तनेजा ने निभाई।

इसके बाद अयोध्या आगमन पर गुरु वशिष्ठ द्वारा प्रभु श्रीराम का राजतिलक किए जाने का दृश्य प्रस्तुत किया गया। भक्त अशोक नारंग ने भगवान श्रीराम की आरती की। श्रद्धालुओं को चने और हलवे का प्रसाद वितरित किया गया, जबकि महावीर सेवा दल के अध्यक्ष सुरेश राजदेव ने मेवे-मिश्री का प्रसाद बांटा। श्री शिव नाटक क्लब की ओर से सरपरस्तों और कलाकारों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। क्लब अध्यक्ष जगदीश सुखीजा ने आयोजन को सफल बनाने के लिए रामभक्तों का आभार जताया।

दुर्गा पूजा पंडालों में भी पहुंचे पूर्व विधायक

विजयदशमी के अवसर पर रामलीला में सहभागिता के साथ पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने रुद्रपुर और आसपास के क्षेत्रों में आयोजित दुर्गा पूजा महोत्सवों में भी पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन किए। रंपुरा में श्री श्री काली दुर्गा पूजा समिति की ओर से आयोजित महोत्सव के अतिरिक्त खानपुर नंबर दो, धर्मनगर और ट्रांजिट कैंप सहित विभिन्न स्थानों पर उन्होंने पूजा-अर्चना की और श्रद्धालुओं को पर्व की शुभकामनाएं दीं।

विभिन्न पूजा पंडालों में पहुंचने पर आयोजकों और श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया तथा स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। धार्मिक अनुष्ठानों के बीच उन्होंने मां दुर्गा से क्षेत्र की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की।

इस अवसर पर ठुकराल ने कहा कि दुर्गा पूजा भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण पर्व है। मां दुर्गा की आराधना शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने की प्रेरणा देती है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देने के साथ समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता को मजबूत करने का अवसर भी प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाते हैं। इनके माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं, आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है। ऐसे आयोजनों को सफल बनाने में पूजा समितियों, कलाकारों, स्वयंसेवकों और स्थानीय नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

शहर से गांव तक धार्मिक आयोजनों में सहभागिता

रुद्रपुर की सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों पर नजर डालें तो रामलीला, दुर्गा पूजा, माता की चौकी और अन्य धार्मिक आयोजनों में जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति आयोजकों के लिए उत्साह का विषय रहती है। राजकुमार ठुकराल की विभिन्न कार्यक्रमों में लगातार सहभागिता ने भी उन्हें इन आयोजनों में चर्चा के केंद्र में रखा है।

धार्मिक आयोजनों में उनकी उपस्थिति के दौरान स्थानीय लोगों, समिति पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं से मुलाकात होती है। ऐसे अवसर जनप्रतिनिधियों को समाज के अलग-अलग वर्गों से संवाद करने का मंच भी देते हैं। धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक संपर्क बनाए रखना सार्वजनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पहलू माना जाता है।

रुद्रपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन सामाजिक मेलजोल और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देते हैं। रामलीला में भगवान श्रीराम के आदर्श, दुर्गा पूजा में शक्ति की आराधना और विजयदशमी पर रावण दहन जैसे आयोजन लोगों को सत्य, मर्यादा, साहस और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देते हैं।

आस्था, परंपरा और जनसंपर्क का संगम

राजकुमार ठुकराल की धार्मिक कार्यक्रमों में लगातार मौजूदगी के बीच एक बात स्पष्ट रूप से सामने आती है कि स्थानीय धार्मिक आयोजनों का सामाजिक जीवन में अपना विशेष स्थान है। इन कार्यक्रमों में सहभागिता के जरिए श्रद्धालुओं के साथ संवाद, आयोजकों का उत्साहवर्धन और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर मिलता है।

हालांकि, किसी जनप्रतिनिधि की लोकप्रियता या राजनीतिक प्रभाव का आकलन केवल धार्मिक आयोजनों में उसकी उपस्थिति के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए जनसमस्याओं के समाधान, विकास कार्यों, जनता के बीच सक्रियता और लोगों के अनुभवों को भी देखना जरूरी है। फिर भी, धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लगातार दिखाई देने वाली मौजूदगी सार्वजनिक जीवन में एक अलग पहचान अवश्य बनाती है।

फिलहाल रुद्रपुर में रामलीला के समापन से लेकर दुर्गा पूजा पंडालों तक राजकुमार ठुकराल की सक्रियता चर्चा में है। विजयदशमी का संदेश भी यही है कि अहंकार और अन्याय चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः सत्य, मर्यादा और सदाचार का महत्व सर्वोपरि रहता है। धार्मिक आयोजनों की सार्थकता भी तभी है, जब उनसे मिलने वाली प्रेरणा समाज में भाईचारे, सेवा, सद्भाव और जनकल्याण के रूप में दिखाई दे।