ऊधम सिंह नगर में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से धान की पैदावार को बड़ा झटका, उत्पादन में भारी गिरावट


रफीनगर में क्रॉप कटिंग के दौरान सामने आई चिंताजनक तस्वीर, पिछले वर्षों के मुकाबले धान की उपज में भारी कमी
रुद्रपुर। ऊधम सिंह नगर जिले में खरीफ सीजन 2026 के दौरान धान की फसल पर बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का प्रतिकूल प्रभाव सामने आया है। जिले की तहसील गदरपुर के न्याय पंचायत गोविंदपुर अंतर्गत राजस्व ग्राम रफीनगर में 21 अक्टूबर 2026 को आयोजित प्रतिदर्श (नमूना) क्रॉप कटिंग के दौरान धान की उपज के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे किसानों के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं। क्रॉप कटिंग के परिणामों में एक प्लॉट में प्रति हेक्टेयर 17.52 क्विंटल और दूसरे प्लॉट में 28.14 क्विंटल धान की उपज दर्ज की गई। पिछले वर्षों में जहां धान का उत्पादन लगभग 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताया गया था, वहीं इस बार सामने आए आंकड़े काफी कम हैं।
मुख्य कृषि अधिकारी, ऊधम सिंह नगर की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, खरीफ 2026 की धान फसल की वास्तविक उपज का आकलन करने के लिए राजस्व ग्राम रफीनगर में प्रतिदर्श क्रॉप कटिंग की गई। इस दौरान संबंधित राजस्व कर्मचारियों और कृषकों की मौजूदगी में निर्धारित क्षेत्रफल से धान की कटाई कर उत्पादन का वजन किया गया।

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर


पहले प्लॉट में 17.52 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज
क्रॉप कटिंग के दौरान पहले प्लॉट में 43.50 वर्ग मीटर क्षेत्रफल से धान की फसल काटी गई। इस क्षेत्रफल से कुल 7.620 किलोग्राम धान प्राप्त हुआ। इसके आधार पर गणना करने पर प्रति हेक्टेयर उत्पादन 1,751.72 किलोग्राम यानी लगभग 17.52 क्विंटल दर्ज किया गया।
यह उत्पादन पिछले वर्षों में बताई गई 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज की तुलना में काफी कम है। यदि यह अंतर व्यापक स्तर पर भी दिखाई देता है, तो इससे धान उत्पादक किसानों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
दूसरे प्लॉट में 28.14 क्विंटल उत्पादन
दूसरे प्लॉट में कृषक श्रीमती मनवीर कौर के खेत में क्रॉप कटिंग के दौरान 12.240 किलोग्राम धान प्राप्त हुआ। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस प्लॉट में प्रति हेक्टेयर उत्पादन 2,813.79 किलोग्राम यानी लगभग 28.14 क्विंटल दर्ज किया गया।
दोनों प्लॉटों के आंकड़ों से स्पष्ट है कि इस क्षेत्र में धान की उपज में काफी अंतर देखने को मिला है। पहले प्लॉट में जहां 17.52 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन रहा, वहीं दूसरे प्लॉट में यह 28.14 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज किया गया। हालांकि, इन दो नमूनों के आधार पर पूरे जिले की औसत उपज का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, लेकिन ये आंकड़े फसल उत्पादन की स्थिति का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि को बताया प्रमुख कारण
मुख्य कृषि अधिकारी की ओर से दी गई जानकारी में धान की उपज में कमी का प्रमुख कारण बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि को बताया गया है। खरीफ सीजन के दौरान मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई हैं। धान की फसल को नुकसान होने से किसानों की मेहनत और खेती पर किए गए खर्च की भरपाई करना मुश्किल हो सकता है।
किसानों के लिए धान की फसल केवल एक कृषि उपज नहीं, बल्कि उनकी सालभर की आर्थिक योजनाओं का महत्वपूर्ण आधार होती है। बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और कृषि मशीनों पर होने वाले खर्च के बाद जब उत्पादन अपेक्षा से कम मिलता है, तो किसानों की आय पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में इस बार उपज में दर्ज की गई कमी ने कृषि क्षेत्र की चुनौतियों को फिर सामने ला दिया है।
क्रॉप कटिंग से मिलेगा उत्पादन का आकलन करने में आधार
क्रॉप कटिंग के माध्यम से निर्धारित क्षेत्रफल में फसल काटकर वास्तविक उत्पादन का आकलन किया जाता है। इस प्रक्रिया से प्राप्त आंकड़े फसल की उत्पादकता समझने और कृषि संबंधी आकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रफीनगर में हुई क्रॉप कटिंग के दौरान पटवारी श्रीमती वीना मियां, श्री बलदेव राज और कृषक श्रीमती मनप्रीत कौर उपस्थित रहीं। दूसरे प्लॉट का विवरण कृषक श्रीमती मनवीर कौर के खेत से संबंधित है।
धान की उपज में आई कमी को देखते हुए क्षेत्र में अन्य खेतों की उत्पादकता का आकलन भी महत्वपूर्ण होगा, ताकि फसल पर मौसम के प्रभाव की व्यापक तस्वीर सामने आ सके। यदि जिले के अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह उत्पादन कम मिलता है, तो किसानों को हुए नुकसान का आकलन करने और राहत संबंधी संभावनाओं पर विचार करने के लिए आंकड़े उपयोगी साबित हो सकते हैं।
किसानों की निगाहें अब आगे की कार्रवाई पर
रफीनगर में क्रॉप कटिंग के दौरान सामने आए परिणामों ने खरीफ 2026 में धान की पैदावार को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पिछले वर्षों में लगभग 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई गई उपज की तुलना में इस बार दर्ज उत्पादन काफी कम है। हालांकि, वास्तविक स्थिति का व्यापक आकलन जिले के अन्य नमूनों और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकेगा।
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसल उत्पादन में कमी किसानों के सामने आर्थिक चुनौती खड़ी कर सकती है। ऐसे में जरूरी है कि संबंधित विभाग क्रॉप कटिंग के आंकड़ों का समुचित आकलन करें और किसानों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदमों पर विचार करें।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | अवतार सिंह बिष्ट, उत्तराखंड
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