मेरठ हत्याकांड: पति के बिस्तर में छोड़ा सांप, पत्नी और प्रेमी को फांसी की सजा; दारोगा इंदू वर्मा की सूझबूझ से खुला राज


पांच बार सांप से डसवाकर हत्या को प्राकृतिक मौत दिखाने की साजिश, 86 तारीखों तक चली सुनवाई; 12 गवाहों की गवाही बनी अहम आधार
मेरठ, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित अमित कश्यप हत्याकांड में जिला अदालत ने पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को हत्या का दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली विवेचक दारोगा इंदू वर्मा की सूझबूझ ने एक ऐसी वारदात से पर्दा उठाया, जिसे शुरुआत में सांप के काटने से हुई सामान्य मौत माना जा रहा था।

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर


मामले की जांच के दौरान इंदू वर्मा को परिस्थितियों पर संदेह हुआ। परिजनों और पत्नी के विरोध के बावजूद उन्होंने अमित के शव का पोस्टमार्टम कराने पर जोर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद जांच की दिशा बदल गई और कथित साजिश की परतें खुलने लगीं।
बिस्तर में सांप छोड़कर रची गई हत्या की साजिश
पुलिस के आरोपपत्र के अनुसार, 12 अप्रैल 2025 की रात अमित कश्यप की हत्या की साजिश उसकी पत्नी रविता ने अपने पड़ोसी प्रेमी अमरदीप के साथ मिलकर रची थी। आरोप था कि वारदात के दौरान रविता ने अमित का हाथ पकड़ा, जबकि अमरदीप ने उसका गला दबाया। इसके बाद हत्या को प्राकृतिक सर्पदंश से हुई मौत का रूप देने के लिए बिस्तर के पास चारपाई पर सांप छोड़ दिया गया।
बताया गया कि अमित के बिस्तर में उसकी कमर के नीचे ‘घोड़ापछाड़’ सांप की पूंछ दबा दी गई थी। पूंछ दबने पर सांप ने उसे पांच बार डसा। शरीर पर सांप के काटने के निशान मिलने के कारण शुरुआत में ग्रामीणों ने इसे सामान्य सर्पदंश से हुई मौत समझ लिया। हालांकि, पोस्टमार्टम और पुलिस की आगे की जांच में मामला संदिग्ध पाया गया और हत्या की साजिश का खुलासा हुआ।
कॉल डिटेल और सपेरे की गवाही बनी अहम कड़ी
जांच के दौरान विवेचक दारोगा इंदू वर्मा ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को जोड़ते हुए मामले की कड़ियों को सामने रखा। रविता और अमरदीप की कॉल डिटेल से उनके बीच संपर्क और प्रेम संबंधों से जुड़ी जानकारी सामने आई। वहीं, सपेरे प्रीतमनाथ की गवाही को भी मुकदमे में महत्वपूर्ण माना गया।
अदालत में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फरजाना मकसूद ने अभियोजन पक्ष की ओर से साक्ष्य प्रस्तुत किए। जांच के दौरान जुटाए गए तथ्यों, गवाहों के बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने आरोपों को अदालत के समक्ष रखा।
86 तारीखों तक चली सुनवाई
अमित कश्यप हत्याकांड में फैसला आने से पहले अदालत में 86 तारीखों तक सुनवाई चली। मुकदमे में 12 गवाहों की गवाही दर्ज की गई। इसके बाद अदालत ने 7 अक्टूबर को रविता और अमरदीप को दोषी करार दिया। शुक्रवार को दोनों को फांसी की सजा सुनाए जाने की जानकारी सामने आई।
यह मामला इस बात का उदाहरण है कि किसी संदिग्ध मौत की जांच में शुरुआती धारणा पर निर्भर रहने के बजाय वैज्ञानिक जांच, पोस्टमार्टम, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और गवाहों के बयान कितने महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इस प्रकरण में दारोगा इंदू वर्मा की जांच और अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में रखे गए साक्ष्यों ने अहम भूमिका निभाई।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स
उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर