11 मौतों के बाद जागा ऊधम सिंह नगर प्रशासन, सड़क सुरक्षा के लिए सख्त निर्देश; सवाल—अब तक कहां सोया था सिस्टम?रुद्रपुर, 22 अक्टूबर 202611 मौतों के बाद प्रशासन की सक्रियता,


रुद्रपुर, 22 अक्टूबर 2026।
11 मौतों के बाद प्रशासन की सक्रियता, लेकिन सड़क सुरक्षा के इंतजामों पर उठे सवाल। ऊधम सिंह नगर में 21 अक्टूबर को विभिन्न दुर्घटनाओं में 11 लोगों की मौत के बाद जिला प्रशासन ने सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए सख्ती के निर्देश दिए हैं। अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्र ने ओवरलोडिंग, तेज रफ्तार, अनधिकृत कट, नशे में वाहन चलाने और बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वालों के खिलाफ अभियान चलाने को कहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ये कदम पहले क्यों नहीं उठाए गए?
जिला सभागार में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक लेते हुए अपर जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क दुर्घटनाओं की आशंका वाले स्थलों का संयुक्त निरीक्षण कर उनकी पहचान की जाए और समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाए। राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्य मार्गों पर मिलने वाली सड़कों के आसपास गति सीमा के संकेतक लगाने तथा जरूरत के अनुसार स्पीड ब्रेकर बनाने के निर्देश भी दिए गए।
अनधिकृत कट खोलने और डिवाइडर तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर


अपर जिलाधिकारी ने सड़कों पर बने अनधिकृत कटों का निरीक्षण कर उन्हें बंद करने के निर्देश दिए। बंद किए गए कटों को दोबारा खोलने और डिवाइडर तोड़ने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने को कहा गया है। सवाल यह है कि यदि ऐसे कट दुर्घटनाओं का कारण बन रहे थे, तो उनकी नियमित निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी?
नशे में ड्राइविंग और बिना हेलमेट पर सख्ती
प्रशासन ने मादक पदार्थों का सेवन कर वाहन चलाने वालों की जांच तेज करने और बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वालों के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। बैठक में ‘नो हेलमेट, नो पेट्रोल’ आदेश का पालन कराने पर भी जोर दिया गया। बिना हेलमेट वाहन चालकों को पेट्रोल देने वाले पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
ई-रिक्शा, आवारा पशु और जाम भी निशाने पर
अपर जिलाधिकारी ने कहा कि अनियंत्रित ई-रिक्शा संचालन से यातायात बाधित होने और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ती है। ऐसे में अनधिकृत ई-रिक्शा का सत्यापन कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित पशुओं को नगर निकायों के माध्यम से आश्रय स्थलों तक पहुंचाने तथा उनके गले में रिफ्लेक्टर पट्टी लगाने के निर्देश भी दिए गए।
विद्यालयों में सड़क सुरक्षा जागरूकता शिविर आयोजित करने और दुर्घटनाओं के बाद संबंधित विभागों, एआरटीओ तथा पुलिस को तत्काल मौके पर पहुंचकर घटनाओं का विश्लेषण करने और रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
हादसों के बाद निर्देश, लेकिन जवाबदेही कौन तय करेगा?
सड़क सुरक्षा केवल बैठक करने और आदेश जारी करने से सुनिश्चित नहीं होगी। असली परीक्षा इन निर्देशों के जमीन पर उतरने की है। ओवरलोडिंग पर रोक, तेज रफ्तार की निगरानी, खतरनाक कटों को बंद करना, ई-रिक्शा का सत्यापन और आवारा पशुओं की व्यवस्था जैसे उपाय पहले से नियमित रूप से लागू क्यों नहीं थे—यह सवाल प्रशासन और संबंधित विभागों से पूछा जाना चाहिए।
21 अक्टूबर की दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले 11 लोगों के नाम और घटनाओं का सत्यापित विवरण सार्वजनिक किए जाने की भी जरूरत है, ताकि प्रत्येक हादसे की परिस्थितियों की जानकारी सामने आ सके और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया पारदर्शी बने।
बैठक में अधीक्षण अभियंता लोक निर्माण विभाग अनिल पांगती, अधिशासी अभियंता गजेंद्र सिंह, सीओ वैभव सैनी, एआरटीओ संदीप वर्मा, मोहित कोठारी, नवीन सिंह, एनएचएआई के सोनू गुप्ता और मोहित कुशवाहा, एसीएमओ डॉ. हरीश पांडे तथा जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी कुलदीप सिंह बिष्ट सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की पड़ताल का सवाल: सड़क सुरक्षा के निर्देशों की निगरानी कौन करेगा? कितने खतरनाक कट बंद हुए, कितने ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई हुई और कितने दुर्घटना संभावित स्थलों को सुरक्षित बनाया गया? प्रशासन को इन सवालों के जवाब आंकड़ों के साथ सार्वजनिक करने चाहिए। क्योंकि सड़क सुरक्षा का मूल्यांकन बैठकों की संख्या से नहीं, बचाई गई जिंदगियों और रोकी गई दुर्घटनाओं से होना चाहिए।