भारतीय राजनीति भी अजब-गजब है। यहां कभी चाय की दुकान चर्चा में रहती है, तो कभी साइकिल के पंचर की दुकान सुर्खियों में आने की संभावना पैदा कर देती है। अब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम से जोड़े जा रहे कथित वीडियो में पिक्चर की दुकान पर काम करने के जिक्र को लेकर हास्य की नई गुंजाइश बन गई है।
भाई साहब, साइकिल के ट्यूब की हवा निकल जाए तो उसे पंचर कहते हैं। लेकिन राजनीति में किसी की हवा निकल जाए, तो उसे क्या कहेंगे? यह सवाल अपने आप में ऐसा है कि राजनीतिक व्यंग्यकारों की कलम चल पड़े!
चाय वाले के बाद पंचर वाले की बारी?
देश की राजनीति में चाय बेचने के अनुभव का जिक्र खूब चर्चा में रहा है। अब पिक्चर की दुकान और पंचर की दुकान को लेकर काल्पनिक राजनीतिक चुटकुले बनाए जा सकते हैं।
व्यंग्य की भाषा में सवाल उठता है—अगर चाय की दुकान से देश की राजनीति में चर्चा हो सकती है, तो पंचर की दुकान से प्रदेश की राजनीति में हास्य क्यों नहीं?
लेकिन जरा ठहरिए! यहां पिक्चर की दुकान और पंचर की दुकान का अंतर समझना जरूरी है। पिक्चर की दुकान का मतलब फिल्म या तस्वीरों से जुड़ा कारोबार हो सकता है, जबकि पंचर की दुकान पर साइकिल और वाहनों के टायर-ट्यूब ठीक किए जाते हैं। दोनों को एक समझ लेना भी राजनीति की तरह शब्दों का पंचर कर सकता है!
पेंशन की हवा या वादों का पंचर?
उत्तराखंड में पेंशन, रोजगार, महंगाई और विकास जैसे मुद्दे जनता के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में राजनीतिक व्यंग्य में पूछा जा सकता है कि नेताओं के भाषणों में वादों की हवा कितनी भरी है और जमीन पर उनके परिणाम कितने दिखाई देते हैं।
जनता को ऐसी राजनीति चाहिए, जिसमें रोजगार की साइकिल आगे बढ़े, विकास के टायर मजबूत रहें और वादों का ट्यूब बार-बार पंचर न हो!
धामी जी, राजनीति की साइकिल दौड़ती रहनी चाहिए!
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर व्यंग्य करते हुए कहा जा सकता है कि राजनीति की सड़क पर चलने के लिए केवल हवा से काम नहीं चलता। साइकिल के टायर में हवा भी चाहिए, ट्यूब दुरुस्त भी होना चाहिए और रास्ता भी ठीक होना चाहिए।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स का पंचर व्यंग्य:
“चाय की दुकान हो, पिक्चर की दुकान हो या पंचर की दुकान—काम कोई छोटा नहीं होता। लेकिन राजनीति में जनता की उम्मीदों का ट्यूब पंचर हो जाए, तो उसे ठीक करने की जिम्मेदारी नेताओं की ही होती है!”
पहले प्रधानमंत्री निकले चाय वाले, अब धामी की पंक्चर वाली पिक्चर!सियासत में गजब का हास्य: साइकिल के ट्यूब की हवा निकले तो पंचर, अब राजनीति में किसकी हवा निकलेगी?
