उत्तराखंड रुद्रपुर। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक ओर युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए ‘नशा मुक्त उत्तराखंड’ अभियान को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया, तो दूसरी ओर गायक दलेर मेहंदी और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बीच हुए विवाद पर भी अपनी बात रखी। शुक्रवार को मुख्यमंत्री ने ओएनजीसी के डॉ. बी.आर. अंबेडकर मैदान में ‘नशा मुक्त उत्तराखंड’ वॉकथॉन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। वहीं, दलेर मेहंदी प्रकरण पर उन्होंने उत्तराखंड की अतिथि सत्कार की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी गलतफहमी को आपसी संवाद और सौहार्द से दूर किया जाना चाहिए। इस बीच गायक मीका सिंह ने अपने भाई दलेर मेहंदी के समर्थन में मंत्री सुबोध उनियाल से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।
अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर 83930 21000
नशे के खिलाफ जन आंदोलन बनाने की अपील
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार, पुलिस या किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी जरूरी है। युवाओं, विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों को मिलकर नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलानी होगी।
उन्होंने कहा कि ‘नशे को ना कहें, जीवन को हां कहें’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य का संदेश है। इस संदेश को प्रदेश के प्रत्येक घर तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में आने से बचे और अपने सपनों को साकार कर सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशीले पदार्थों का सेवन व्यक्ति के स्वास्थ्य और भविष्य को नुकसान पहुंचाने के साथ परिवारों की खुशियां भी छीन लेता है। नशे की लत से प्रभावित व्यक्ति के सपने टूटते हैं, परिवार मानसिक और आर्थिक परेशानियों से गुजरते हैं तथा सामाजिक व्यवस्था पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
युवाओं के हाथ में किताबें और कंप्यूटर हों, नशा नहीं
मुख्यमंत्री ने युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास, अच्छे संस्कार और शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की मजबूती उसकी युवा पीढ़ी की क्षमता, ऊर्जा और चरित्र पर निर्भर करती है। युवाओं को ऐसे अवसर मिलने चाहिए, जिनसे वे अपनी प्रतिभा का उपयोग देश और समाज के विकास में कर सकें।
उन्होंने संदेश दिया कि युवाओं के हाथों में किताबें और कंप्यूटर होने चाहिए, न कि नशीले पदार्थ। वॉकथॉन के माध्यम से लोगों को नशामुक्त जीवन अपनाने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का संदेश दिया गया।
धामी ने स्पष्ट किया कि नशामुक्त उत्तराखंड का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है, जब परिवार अपने बच्चों के व्यवहार पर ध्यान दें, विद्यालयों और महाविद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम चलें तथा समाज नशे की समस्या को गंभीरता से लेते हुए सामूहिक जिम्मेदारी निभाए।
दलेर मेहंदी प्रकरण में मुख्यमंत्री ने किया हस्तक्षेप
दूसरी ओर, उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और प्रसिद्ध गायक दलेर मेहंदी के बीच हुए विवाद ने राजनीतिक और मनोरंजन जगत में चर्चा पैदा कर दी है। नई टिहरी के कुंजापुरी क्षेत्र में आयोजित एक लाइव कार्यक्रम के दौरान मंत्री सुबोध उनियाल ने दलेर मेहंदी के प्रदर्शन पर नाराजगी जताई थी।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने आरोप लगाया था कि गायक पूरा गाना नहीं गा रहे थे और लिप-सिंकिंग के सहारे प्रस्तुति दी जा रही थी। उन्होंने मंच पर ही दलेर मेहंदी को फटकार लगाई और उनकी स्थिति पर सवाल उठाए। मंत्री की ओर से उनके शराब के नशे में होने की बात भी कही गई थी। इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर विवाद बढ़ गया और कई लोगों ने कलाकार के साथ सार्वजनिक मंच पर किए गए व्यवहार पर आपत्ति जताई।
दलेर मेहंदी के समर्थन में उनके भाई और गायक मीका सिंह सहित मनोरंजन जगत की कई हस्तियों ने प्रतिक्रिया दी। अनुपम खेर, राजपाल यादव, बादशाह, कपिल शर्मा और रजा मुराद समेत कई कलाकारों के नाम भी इस प्रकरण पर सामने आए।
मीका सिंह की मांग—दलेर मेहंदी से माफी मांगें मंत्री
गायक मीका सिंह ने अपने भाई दलेर मेहंदी के समर्थन में कहा कि कलाकारों को सम्मान और गरिमा मिलनी चाहिए। उन्होंने मंत्री सुबोध उनियाल से दलेर मेहंदी से माफी मांगने की मांग की। मीका के अनुसार, किसी कलाकार के प्रदर्शन को लेकर असहमति हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक मंच पर उसके साथ किए जाने वाले व्यवहार में मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है।
विवाद सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मामले में हस्तक्षेप किया। उन्होंने मीका सिंह से फोन पर बातचीत की और आपसी संवाद के माध्यम से गलतफहमी दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मीका सिंह ने मुख्यमंत्री की पहल का स्वागत करते हुए उनके प्रति आभार जताया, हालांकि उन्होंने मंत्री से माफी की मांग भी रखी।
मुख्यमंत्री बोले—उत्तराखंड में अतिथि देवो भवः की परंपरा
भाजपा प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी यह मामला मुख्यमंत्री के सामने उठा था। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उन्हें उस समय दलेर मेहंदी की तबीयत खराब होने की जानकारी नहीं थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सदैव ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना के साथ आगे बढ़ता आया है।
उनका संदेश था कि किसी भी प्रकार की गलतफहमी को आपसी बातचीत, सद्भाव और समझदारी से दूर किया जाना चाहिए। हालांकि मुख्यमंत्री की पहल के बावजूद मीका सिंह की माफी की मांग के कारण विवाद पर चर्चा जारी है।
दो मुद्दे, एक संदेश—जिम्मेदारी और मर्यादा जरूरी
मुख्यमंत्री धामी के सामने एक ओर नशे के खिलाफ युवाओं को जागरूक करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर राज्य की अतिथि सत्कार की छवि और सार्वजनिक व्यवहार की मर्यादा से जुड़ा सवाल भी है। नशामुक्त उत्तराखंड अभियान का उद्देश्य युवाओं को स्वस्थ जीवन की दिशा में प्रेरित करना है, जबकि दलेर मेहंदी प्रकरण ने यह बहस छेड़ दी है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में कलाकारों, आयोजकों और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद किस प्रकार होना चाहिए।
नशे के खिलाफ अभियान हो या किसी कार्यक्रम में उत्पन्न विवाद, दोनों परिस्थितियों में संवाद, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री की पहल से विवाद सुलझने की उम्मीद जरूर बनी है, लेकिन अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि मंत्री सुबोध उनियाल और दलेर मेहंदी के बीच मामले का समाधान किस रूप में निकलता है।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | अवतार सिंह बिष्ट, रुद्रपुर
