
करवा चौथ पर नीलम कांडपाल का विशेष संदेश: सोलह श्रृंगार से निखरेगा सौभाग्य, घर पर भी पाएं चेहरे पर चांद-सा निखार
आध्यात्मिक परंपरा, भारतीय संस्कृति और आधुनिक सौंदर्य का संगम; सुहागिन महिलाओं के लिए नीलम कांडपाल ने साझा किए सोलह श्रृंगार, मेहंदी और प्राकृतिक त्वचा देखभाल के खास सुझाव
रुद्रपुर | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स
हिंदू धर्म में करवा चौथ का पर्व प्रेम, विश्वास, समर्पण और वैवाहिक जीवन की मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। वर्ष 2026 में करवा चौथ का पर्व 29 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। पर्व को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह है। बाजारों में खरीदारी, मेहंदी, पारंपरिक आभूषणों और सुंदर परिधानों की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।
इसी अवसर पर उद्यमी एवं आध्यात्मिक संस्कारों से जुड़ीं नीलम कांडपाल ने महिलाओं के लिए सोलह श्रृंगार के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ घर पर ही त्वचा की देखभाल करने के कुछ आसान सुझाव साझा किए हैं। नीलम कांडपाल, महेश कांडपाल की पत्नी हैं और एक ऐसे ब्राह्मण परिवार से जुड़ी हैं, जहां धार्मिक परंपराओं, कर्मकांड, ज्योतिष और आध्यात्मिक संस्कारों को विशेष महत्व दिया जाता है। पारिवारिक संस्कारों के साथ उद्यमिता के क्षेत्र में उनकी सक्रियता महिलाओं के पारंपरिक मूल्यों और आधुनिक जीवनशैली के बीच संतुलन का संदेश देती है।
नीलम कांडपाल का कहना है कि करवा चौथ केवल व्रत रखने का अवसर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पारिवारिक आत्मीयता और दांपत्य जीवन के प्रति सम्मान को अभिव्यक्त करने का पर्व भी है। इस दिन सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व है। हालांकि, श्रृंगार का वास्तविक उद्देश्य केवल बाहरी सुंदरता नहीं, बल्कि मन में प्रसन्नता, श्रद्धा और सकारात्मक भाव बनाए रखना भी है।
सोलह श्रृंगार: भारतीय संस्कृति और सौभाग्य का प्रतीक
भारतीय परंपरा में सोलह श्रृंगार को नारी सौंदर्य, शुभता और वैवाहिक जीवन की मंगलकामनाओं से जोड़कर देखा जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार सोलह श्रृंगार की सूची में कुछ अंतर हो सकता है। सामान्य रूप से इसमें शामिल प्रमुख सामग्री का अपना सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है।
1. सिंदूर: विवाहित महिलाओं के लिए सिंदूर सुहाग और वैवाहिक प्रतिबद्धता का पारंपरिक प्रतीक है।
2. बिंदी: माथे पर लगाई जाने वाली बिंदी सौंदर्य और शुभता का प्रतीक मानी जाती है।
3. काजल: आंखों की सुंदरता बढ़ाने वाला काजल पारंपरिक श्रृंगार का अहम हिस्सा है।
4. मेहंदी: मेहंदी को प्रेम, उल्लास, सौभाग्य और उत्सव से जोड़ा जाता है। करवा चौथ से पहले महिलाएं हाथों में आकर्षक मेहंदी रचवाती हैं।
5. चूड़ियां: रंग-बिरंगी चूड़ियां पारंपरिक भारतीय परिधान और सुहाग के श्रृंगार को पूर्णता प्रदान करती हैं।
6. मंगलसूत्र: मंगलसूत्र वैवाहिक बंधन और दांपत्य जीवन का महत्वपूर्ण प्रतीक है।
7. मांग टीका: माथे पर सजाया जाने वाला मांग टीका पारंपरिक रूप को आकर्षक बनाता है।
8. गले का हार: हार या पारंपरिक आभूषण श्रृंगार की शोभा बढ़ाते हैं।
9. बिछिया: पैरों की उंगलियों में पहनी जाने वाली बिछिया विवाहित महिलाओं के पारंपरिक आभूषणों में शामिल है।
10. बाजूबंद और कमरबंद: ये पारंपरिक आभूषण विशेष अवसरों पर श्रृंगार को अलग पहचान देते हैं।
11. पायल: पैरों में पहनी जाने वाली पायल भारतीय नारी के पारंपरिक आभूषणों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
12. फूलों का गजरा: बालों में ताजे फूलों का गजरा उत्सव की सुंदरता और सुगंध बढ़ाता है।
13. आलता: पैरों को लाल रंग से सजाने की यह परंपरा विशेष रूप से कई भारतीय क्षेत्रों में प्रचलित है।
14. पारंपरिक साड़ी या परिधान: लाल, मरून और अन्य शुभ रंगों के परिधान करवा चौथ के अवसर पर विशेष पसंद किए जाते हैं।
15. नथ: नाक में पहना जाने वाला पारंपरिक आभूषण दुल्हन और सुहागिनों के श्रृंगार का अहम हिस्सा है।
16. कानों के झुमके: झुमके चेहरे की सुंदरता और पारंपरिक पहनावे को निखारते हैं।
नीलम कांडपाल के अनुसार, सोलह श्रृंगार का महत्व हमारी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा है। महिलाएं अपनी पसंद, सुविधा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार श्रृंगार कर सकती हैं। किसी विशेष आभूषण या सामग्री का उपयोग न कर पाने से व्रत की श्रद्धा कम नहीं होती।
करवा चौथ पर मेहंदी का विशेष महत्व
करवा चौथ की तैयारियों में मेहंदी का स्थान बेहद खास है। महिलाएं व्रत से पहले हाथों और कभी-कभी पैरों पर भी मेहंदी लगाती हैं। इसकी सुंदर आकृतियां त्योहार के उत्साह को बढ़ाती हैं और पारंपरिक श्रृंगार को आकर्षक बनाती हैं।
भारतीय लोकपरंपराओं में मेहंदी के गहरे रंग को प्रेम और शुभता से जोड़कर देखा जाता है। कई परिवारों में इसे दांपत्य जीवन की खुशहाली और सौभाग्य की कामना का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, मेहंदी का रंग पति के प्रेम या वैवाहिक जीवन की गुणवत्ता का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसका महत्व मुख्य रूप से सांस्कृतिक मान्यताओं, भावनाओं और उत्सवी परंपराओं में निहित है।
नीलम कांडपाल का संदेश है कि महिलाएं मेहंदी लगाते समय उसकी गुणवत्ता का ध्यान रखें। प्राकृतिक मेहंदी को प्राथमिकता दें और त्वचा पर जलन या एलर्जी की आशंका होने पर पहले थोड़ी मात्रा में परीक्षण करें। तथाकथित ब्लैक मेहंदी से बचना बेहतर है, क्योंकि उसमें मिलाया जाने वाला पैराफेनिलीनडायमीन (PPD) त्वचा पर गंभीर प्रतिक्रिया पैदा कर सकता है।
पार्लर जाने का समय नहीं? घर पर ऐसे पाएं ताजगी और निखार
करवा चौथ के दिन सुंदर दिखने की तैयारी में कई महिलाएं ब्यूटी पार्लर जाती हैं, लेकिन घर और परिवार की जिम्मेदारियों के कारण हर किसी को पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। ऐसे में घर पर साधारण त्वचा देखभाल की जा सकती है। नीलम कांडपाल की ओर से साझा किए गए सुझावों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि त्वचा के साथ कोमलता बरती जाए और किसी भी घरेलू नुस्खे को चमत्कारी उपचार न समझा जाए।
1. चेहरे की सफाई और क्लींजिंग
चेहरे को साफ करने के लिए अपनी त्वचा के अनुकूल सौम्य क्लींजर का इस्तेमाल करें। बेसन और दूध का मिश्रण कुछ लोग घरेलू देखभाल में उपयोग करते हैं, लेकिन यह हर त्वचा के लिए उपयुक्त नहीं होता। संवेदनशील या मुंहासों वाली त्वचा पर रगड़कर लगाने से जलन हो सकती है। इसलिए किसी नए मिश्रण को पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर जांचना बेहतर है।
चेहरे पर उबलते पानी की सीधी भाप लेने से बचें। इससे जलने और त्वचा में लालिमा का खतरा हो सकता है। चेहरे को साफ करने के लिए गुनगुने पानी का उपयोग पर्याप्त है।
2. हल्की एक्सफोलिएशन से बचें कठोर रगड़ने से
चावल के आटे से स्क्रब करने का घरेलू नुस्खा प्रचलित है, लेकिन इसके खुरदरे कण त्वचा पर सूक्ष्म खरोंच और जलन पैदा कर सकते हैं। खासकर संवेदनशील त्वचा, मुंहासों या एलर्जी की समस्या होने पर स्क्रब से बचना चाहिए।
यदि त्वचा को एक्सफोलिएट करना जरूरी लगे, तो त्वचा के अनुकूल तैयार उत्पाद का सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करें। करवा चौथ से ठीक पहले कोई नया या तेज उपचार आजमाने के बजाय नियमित और सौम्य देखभाल बेहतर विकल्प है।
3. फेस पैक से पहले त्वचा की जरूरत समझें
बेसन, हल्दी, दही और शहद से बने फेस पैक का उपयोग कई घरों में किया जाता है। हालांकि, इससे हर व्यक्ति को तत्काल निखार मिलने की गारंटी नहीं है। हल्दी से दाग पड़ सकते हैं, जबकि दही, शहद या अन्य सामग्री कुछ लोगों में जलन या एलर्जी पैदा कर सकती है।
यदि आप पहले से किसी ऐसे घरेलू मिश्रण का इस्तेमाल करती हैं और वह आपकी त्वचा को अनुकूल है, तो सावधानी बरत सकती हैं। किसी नए फेस पैक को पहली बार त्योहार के दिन लगाने से बचें। त्वचा में जलन महसूस होने पर उसे तुरंत धो दें।
4. एलोवेरा जेल और मॉइश्चराइजर
चेहरा साफ करने के बाद त्वचा के अनुकूल मॉइश्चराइजर लगाने से त्वचा मुलायम और आरामदायक महसूस कर सकती है। एलोवेरा जेल भी कुछ लोगों को अनुकूल लगता है, लेकिन इसे इस्तेमाल करने से पहले उसकी सामग्री जांचें और संवेदनशीलता होने पर उपयोग न करें।
बर्फ को सीधे चेहरे पर लगाने से बचें। इससे त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है। ताजगी के लिए ठंडे पानी से चेहरा धोना या ठंडे, साफ कपड़े से हल्की सिकाई करना अधिक सुरक्षित विकल्प है।
करवा चौथ पर खूबसूरती के साथ सेहत का भी रखें ध्यान
नीलम कांडपाल का संदेश है कि त्योहार की तैयारी में महिलाओं को अपनी सेहत और आराम को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। व्रत के दौरान परिवार की जिम्मेदारियों और पूजा की तैयारियों के बीच पर्याप्त आराम जरूरी है। सरगी में अपनी परंपरा के अनुसार पौष्टिक भोजन और पर्याप्त पानी लेना उपयोगी रहता है। व्रत खोलने के बाद भी संतुलित भोजन करें।
यदि किसी महिला को मधुमेह, गर्भावस्था या ऐसी स्वास्थ्य समस्या है जिसमें लंबे समय तक भोजन और पानी से दूर रहना जोखिम भरा हो सकता है, तो व्रत रखने के तरीके को लेकर चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
करवा चौथ का वास्तविक सौंदर्य प्रेम, विश्वास, आपसी सम्मान और परिवार की खुशहाली में है। सोलह श्रृंगार और मेहंदी इस भावना को सांस्कृतिक रंग देते हैं, जबकि त्वचा की उचित देखभाल महिलाओं को त्योहार के दिन सहज और आत्मविश्वासी महसूस करने में मदद कर सकती है।
नीलम कांडपाल की ओर से सभी सुहागिन महिलाओं को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं। यह पर्व सभी के जीवन में प्रेम, सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि लेकर आए।
अवतार सिंह बिष्ट हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया की खबरों पर नजर
