जंतर-मंतर से पीएम आवास तक: छात्र आंदोलन, सियासत और सत्ता का टकरावNEET पेपर लीक, शिक्षा सुधार और लोकतांत्रिक विरोध के बीच देश की राजनीति नए मोड़ पर? LIVE ? जंतर-मंतर से छात्र आंदोलन ने बदली देश की राजनीति

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नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर लोकतांत्रिक विरोध और राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गई। NEET-UG 2026 पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन मंगलवार को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में पहुंच गया। एक ओर हजारों छात्र और युवा भारी बारिश के बीच जंतर-मंतर पर डटे रहे, तो दूसरी ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास तक मार्च कर सरकार पर सीधा हमला बोला।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


दिनभर दिल्ली में घटनाक्रम तेजी से बदलता रहा। जंतर-मंतर पर भीड़ लगातार बढ़ती गई, प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना, विपक्षी नेताओं की हिरासत, सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किए जाने का फैसला, सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी, विभिन्न राज्यों में एकजुटता प्रदर्शन तथा छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता ने पूरे घटनाक्रम को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया।
आंदोलन का केंद्र बना जंतर-मंतर
सोमवार को “संसद चलो” मार्च के दौरान हुई झड़प, लाठीचार्ज और आंसू गैस के बाद प्रशासन ने जंतर-मंतर से अधिकांश अस्थायी ढांचे हटा दिए थे। इसके बावजूद मंगलवार सुबह से ही हजारों छात्र, अभ्यर्थी और समर्थक फिर से जंतर-मंतर पहुंचने लगे। भारी बारिश भी आंदोलन को रोक नहीं सकी।
स्वयंसेवकों ने रातभर धरना स्थल की सफाई की और आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील की। मंच क्षतिग्रस्त होने के बावजूद आंदोलन जारी रहा। टॉलस्टॉय मार्ग और दूसरे प्रवेश द्वार पर लंबी कतारें लगी रहीं।
राहुल गांधी का प्रधानमंत्री आवास तक मार्च
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कांग्रेस सांसदों और विपक्षी दलों के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री आवास तक मार्च किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, एनसीपी (एसपी), डीएमके और कई अन्य दलों के नेता इस प्रदर्शन में शामिल हुए।
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों का भविष्य दांव पर है और सरकार जवाब देने से बच रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग दोहराई।
कांग्रेस की चार प्रमुख मांगें
कांग्रेस ने सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं—
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद में बयान दें।
पेपर लीक और शिक्षा सुधार पर संसद में विस्तृत चर्चा हो।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।
छात्रों से सरकार सार्वजनिक रूप से माफी मांगे।
पीएम आवास के बाहर धरना और हिरासत
प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी और अखिलेश यादव धरने पर बैठ गए। दिल्ली पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनसे धरना समाप्त करने का अनुरोध किया। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन तथा केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी बातचीत की।
सरकार का दावा रहा कि राहुल गांधी ने बातचीत के दौरान अपनी मांगें बदल दीं। पहले संसद में चर्चा की मांग और बाद में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की नई शर्त रखी गई। सरकार ने इसे बातचीत में बदलाव बताया।
जब धरना समाप्त नहीं हुआ तो दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव सहित कई सांसदों और नेताओं को हिरासत में लिया। राहुल गांधी को छत्रसाल स्टेडियम तथा प्रियंका गांधी को मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया। अन्य सांसदों को अलग-अलग स्थानों पर रखा गया।
जंतर-मंतर पर विपक्षी नेताओं का जमावड़ा
प्रधानमंत्री आवास के बाहर कार्रवाई के बाद विपक्षी नेताओं का बड़ा समूह जंतर-मंतर पहुंचा।
जंतर-मंतर पहुंचने वालों में शामिल रहे—
शरद पवार
अरविंद केजरीवाल
उद्धव ठाकरे
शशि थरूर
महुआ मोइत्रा
वामपंथी दलों के सांसद
कई क्षेत्रीय दलों के प्रतिनिधि
इन नेताओं ने आंदोलनकारियों से मुलाकात कर उनका समर्थन व्यक्त किया और पुलिस कार्रवाई की आलोचना की।
सरकार का पलटवार
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों का राजनीतिक उपयोग कर रही है और संसद के मानसून सत्र को बाधित करने का प्रयास कर रही है।
प्रधान ने कहा कि सरकार बातचीत के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष टकराव चाहता है।
राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी कहा कि सरकार संसद में चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन राहुल गांधी ने अपनी मांगें बदल दीं।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री मोदी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि सरकार भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कदम उठा रही है और दोषियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे।
विपक्ष का आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाने के लिए पुलिस बल का प्रयोग किया गया।
पवन खेड़ा ने कहा कि सत्ता के आदेश पर छात्रों पर लाठियां बरसाने वालों को एक दिन संविधान का सामना करना पड़ेगा।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि सरकार को शिक्षा सुधारों और पेपर लीक रोकने के लिए नया कानून लाना चाहिए।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि सादे कपड़ों में मौजूद लोगों ने प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की।
शशि थरूर ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का अधिकार है और सरकार का रवैया असंवेदनशील है।
सोनम वांगचुक का मामला
आंदोलन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य भी प्रमुख मुद्दा बना रहा।
दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किया गया।
अस्पताल ने बताया कि उनके महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेत स्थिर हैं, हालांकि लंबे उपवास के कारण पोटेशियम स्तर कम तथा पैनसाइटोपेनिया की स्थिति बनी हुई है।
उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि नागरिक को अपने अस्पताल और चिकित्सक चुनने का अधिकार है।
डॉक्टरों की चिंता
सफदरजंग अस्पताल और एम्स के रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठनों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर कहा कि अस्पतालों को कानून-व्यवस्था लागू करने के स्थान के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
डॉक्टरों ने जंतर-मंतर की घटनाओं की स्वतंत्र जांच तथा अस्पतालों की स्वायत्तता बनाए रखने की मांग की।
पहली बार आंदोलन में उतरे युवा
दिलचस्प बात यह रही कि बड़ी संख्या में ऐसे छात्र भी आंदोलन में शामिल हुए जिन्होंने पहले कभी किसी प्रदर्शन में भाग नहीं लिया था।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखने के बाद कई युवा स्विमिंग गॉगल्स, एन-95 मास्क, हेलमेट और गीले तौलिये लेकर पहुंचे ताकि आंसू गैस और लाठीचार्ज से बचाव किया जा सके।
यह दृश्य आंदोलन की नई सामाजिक संरचना को दर्शाता है, जहां डिजिटल माध्यम युवाओं के संगठन का प्रमुख साधन बन गया है।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने बताया कि सोमवार की हिंसा के संबंध में कई एफआईआर दर्ज की गई हैं।
पुलिस के अनुसार—
118 पुलिसकर्मी घायल हुए।
लगभग 70 लोगों को हिरासत में लिया गया।
सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
पत्थरबाजी और हिंसा की घटनाएं हुईं।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन चलाने के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए उन्हें फर्जी बताया।
CJP का पक्ष
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि संगठन ने केवल जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण एकत्रीकरण का आह्वान किया था।
उन्होंने दावा किया कि दिल्ली के अन्य हिस्सों में उपद्रव करने वाले लोग आंदोलन से जुड़े नहीं हैं।
दिपके ने सोमवार की पुलिस कार्रवाई में घायल छात्रों से सार्वजनिक माफी भी मांगी।
सीजेपी ने अपनी प्रवक्ता विजेता दहिया को कथित असंवेदनशील व्यवहार के कारण पद से हटा दिया।
देशभर में समर्थन
दिल्ली के अलावा हैदराबाद, चेन्नई, शिमला सहित कई शहरों में छात्रों और विभिन्न संगठनों ने प्रदर्शन किए।
हैदराबाद में छात्र संगठनों ने “चलो लोक भवन” मार्च निकाला।
चेन्नई में तमिल रैपर अरिवु को विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया।
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस नेताओं ने गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन किया।
राजनीतिक महत्व
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्र आंदोलन अब केवल NEET या पेपर लीक तक सीमित नहीं रह गया है। यह शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, युवाओं के भविष्य और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार जैसे व्यापक मुद्दों का प्रतीक बनता जा रहा है।
दूसरी ओर भाजपा इसे विपक्ष द्वारा छात्रों के असंतोष का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास बता रही है।
आगे क्या?
अब सभी की नजरें संसद के मानसून सत्र, सरकार और छात्र संगठनों के बीच संभावित बातचीत तथा दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित याचिकाओं पर टिकी हैं।
यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो समाधान का रास्ता निकल सकता है, लेकिन यदि राजनीतिक टकराव इसी तरह जारी रहा तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और व्यापक रूप ले सकता है।
देश का युवा वर्ग, विपक्ष और सरकार—तीनों इस समय ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक संवाद की परीक्षा एक साथ हो रही है।


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