नेपाल के प्रसिद्ध गायक सुरेश शाही और बबल आर्टिस्ट विक्रम बोरा रहेंगे विशेष आकर्षण, एमबी इंटर कॉलेज मैदान में तीन दिवसीय आयोजन
हल्द्वानी। उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों और पहाड़ी परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से हल्द्वानी में 17वें जोहार महोत्सव का भव्य आयोजन 30 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक किया जाएगा। एमबी इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय महोत्सव में जोहार क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक खानपान, लोकनृत्य और लोककलाओं के विविध रंग देखने को मिलेंगे।
जोहार सांस्कृतिक एवं वेलफेयर सोसायटी की ओर से आयोजित इस महोत्सव को लेकर आयोजकों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। महोत्सव के माध्यम से पहाड़ की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने के साथ युवाओं को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
महोत्सव के पहले दिन 30 अक्टूबर को जोहारी शौका समाज की पारंपरिक वेशभूषा में ढोल-दमाऊ के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद विधिवत शुभारंभ और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। शाम को लोकगायक फौजी ललित मोहन जोशी, दक्ष कार्की, कैलाश कुमार और गोविंद दिगारी सहित स्थानीय कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को लोकसंगीत की रंगीन दुनिया से रूबरू कराएंगे।
दूसरे दिन 31 अक्टूबर को महिलाओं और बच्चों के लिए विभिन्न सांस्कृतिक एवं पारंपरिक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इनमें झोड़ा-चांचरी, पहाड़ी व्यंजन, ऐपण और स्वेटर बुनाई प्रतियोगिताएं विशेष आकर्षण रहेंगी। शाम को जन जागृति सांस्कृतिक कला मंच बिंदुखत्ता की प्रस्तुति के साथ नेपाल के प्रसिद्ध गायक सुरेश शाही अपनी गायकी से महोत्सव में समां बांधेंगे।
महोत्सव के अंतिम दिन 1 नवंबर को झोड़ा-चांचरी प्रतियोगिता के साथ नर्सरी से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित होगी। बच्चों की फैंसी ड्रेस और युवाओं की पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिता भी कार्यक्रम का हिस्सा रहेंगी। शाम के सत्र में भारत के प्रथम बबल आर्टिस्ट के रूप में प्रचारित विक्रम बोरा अपनी अनूठी बबल कला का प्रदर्शन करेंगे। इसके अतिरिक्त लोकगायक गणेश मर्तोलिया, नीरज चुफाल और रुचि जंगपांगी की सांगीतिक प्रस्तुतियां भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
महोत्सव परिसर में पहाड़ी उत्पादों और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए जाएंगे, जहां लोगों को उत्तराखंड के पारंपरिक स्वाद और स्थानीय उत्पादों से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।
लोक संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल
जोहार महोत्सव केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक परंपराओं, पारंपरिक कला, वेशभूषा और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक दलों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलेगा। साथ ही नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक पहचान और पूर्वजों की विरासत को समझने का अवसर भी प्राप्त होगा।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | अवतार सिंह बिष्ट, उत्तराखंड देश-दुनिया की खबरों पर नजर
30 अक्टूबर से सजेगा 17वां जोहार महोत्सव, लोक संस्कृति और पहाड़ी परंपराओं की दिखेगी अनूठी झलक
