राज्य आंदोलनकारियों ने उत्तरकाशी कलेक्ट्रेट में भरी हुंकार, मांगें पूरी न होने पर 2027 विधानसभा चुनाव में सरकार को जवाब देने की चेतावनी

मूल निवास 1950, सशक्त भू-कानून, राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन और राज्य सेनानी का दर्जा देने सहित विभिन्न मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन। जिलाधिकारी ने छूटे हुए आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण पर दिया सकारात्मक आश्वासन।

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर

उत्तरकाशी, 4 नवंबर 2026।

चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति उत्तराखण्ड केन्द्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं मूल निवास हितैषी डॉ. विजेन्द्र पोखरियाल के नेतृत्व में बुधवार, 4 नवंबर को उत्तरकाशी जिला मुख्यालय स्थित जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में राज्य आंदोलनकारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान आंदोलनकारियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नाराजगी व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी उत्तरकाशी श्री प्रशांत आर्य के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन प्रेषित किया।

धरने को संबोधित करते हुए केन्द्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. विजेन्द्र पोखरियाल ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों की मांगों को लेकर सरकार को कई बार ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन आज तक उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी जिलाधिकारी कार्यालय में ज्ञापन देने के बाद भी आंदोलनकारियों को यह जानकारी तक उपलब्ध नहीं कराई जाती कि उनके ज्ञापन पर क्या कार्रवाई हुई। कई बार जिलाधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी के समक्ष विषय उठाने के बावजूद कार्यालय से लिखित रूप में कोई जानकारी नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे राज्य आंदोलनकारियों में भारी आक्रोश है।

डॉ. पोखरियाल ने प्रदेश सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि राज्य आंदोलनकारियों और मूल निवासियों की जायज मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में उत्तरकाशी जनपद के लगभग 2300 राज्य आंदोलनकारी मूल निवासी अपने मताधिकार के माध्यम से सरकार को जवाब देंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सचिवालय में बैठे अधिकारी और कर्मचारी मुख्यमंत्री के आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं, तो केवल घोषणाएं करने से प्रदेश का विकास कैसे होगा? उन्होंने सरकार से अपने आसपास ऐसे लोगों को बढ़ावा देने के बजाय उत्तराखण्ड के आम जनमानस की समस्याओं और विकास पर ध्यान देने की मांग की।

डॉ. पोखरियाल ने प्रमुखता से उठाईं ये मांगें—

  1. सरकारी नौकरियों में मूल निवास वर्ष 1950 को अनिवार्य करने के लिए शीघ्र कानून बनाया जाए।
  2. हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखण्ड में भी सशक्त भू-कानून लागू किया जाए।
  3. शासन स्तर पर लंबित राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन को शीघ्र स्वीकृति प्रदान कर जारी किया जाए।
  4. राज्य आंदोलनकारियों को सम्मानपूर्वक राज्य सेनानी का दर्जा दिया जाए।
  5. त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में राज्य आंदोलनकारियों को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।
  6. राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन में सम्मानजनक वृद्धि की जाए।
  7. तहसील स्तर पर 31 दिसंबर 2021 से पूर्व जमा किए गए छूटे हुए राज्य आंदोलनकारियों के आवेदन स्वीकार कर उनका शीघ्र चिन्हीकरण किया जाए।
  8. जिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण लंबित है, उनकी जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।

धरने के दौरान छूटे हुए राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण का मामला भी प्रमुखता से उठाया गया। इस पर जिलाधिकारी श्री प्रशांत आर्य ने प्रस्तुत प्रमाणों का अवलोकन करते हुए सकारात्मक आश्वासन दिया कि जिन लोगों का चिन्हीकरण विभागीय स्तर पर लंबित है, उनके प्रकरणों का तत्काल परीक्षण कर चिन्हीकरण की कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी के इस आश्वासन पर उपस्थित छूटे हुए राज्य आंदोलनकारियों ने उनका आभार व्यक्त किया।

डॉ. विजेन्द्र पोखरियाल ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान से बना है। आज उन्हीं आंदोलनकारियों को अपने अधिकारों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मूल निवास 1950 और सशक्त भू-कानून केवल राजनीतिक मुद्दे नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड की पहचान, जमीन, रोजगार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े सवाल हैं। इन मांगों को लेकर संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक न्याय नहीं मिलता।

धरना-प्रदर्शन में ये रहे उपस्थित

चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति उत्तराखण्ड के केन्द्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. विजेन्द्र पोखरियाल, जिला अध्यक्ष विजय बहादुर रावत, जिला उपाध्यक्ष धर्म सिंह महर, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद पैन्यूली, विष्णुपाल सिंह रावत, संतोष सेमवाल, मूल चन्द सिंह पंवार, राम लाल गजोली, घनश्याम प्रसाद भट्ट, मोहनानंद बिजल्वाण, कृपाल सिंह महर, तेग सिंह राणा, लाखी राम नौटियाल, गैण सिंह राणा, दिनेश चौहान, हरदेव रावत, जगदीश प्रसाद भट्ट, खुशहाल सिंह बिष्ट, अशर्फी देवी, गुड्डी देवी, मांदोदरी देवी, सुरमा देवी, सोना देवी, दशरथ सिंह राणा, गोपाल सिंह राणा, रमेश सिंह राणा, रविन्द्र प्रसाद भट्ट, शर्मानंद नौटियाल, शिवानन्द भट्ट, विक्रम सिंह रावत, प्रताप सिंह चौहान, शुरबीर सिंह राणा, भरत सिंह राणा, चतर सिंह राणा, मोहन सिंह गुसाईं, चैता देवी सिरसा, विजेन्द्र सिंह खरसाडा सहित बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी उपस्थित रहे।