मूल निवास 1950, सशक्त भू-कानून और ₹30 हजार मासिक पेंशन सहित कई मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
उत्तरकाशी। राज्य निर्माण आंदोलनकारियों की लंबित मांगों पर शासन-प्रशासन की कथित उदासीनता के विरोध में 4 नवंबर को चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति उत्तरकाशी के बैनर तले आंदोलनकारियों ने एक दिवसीय धरना दिया। इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के माध्यम से ज्ञापन भेजकर लंबित मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई।
अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर
समिति ने आरोप लगाया कि पूर्व में कई बार शासन-प्रशासन को ज्ञापन सौंपने के साथ 10, 6 और 30 दिवसीय अल्टीमेटम भी दिए गए, लेकिन निर्धारित समयसीमा बीतने के बावजूद मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे उत्तरकाशी जनपद के राज्य आंदोलनकारियों में नाराजगी व्याप्त है।
समिति की प्रमुख मांगें
ज्ञापन में डॉ. विजेंद्र सिंह पोखरियाल को न्यायालय से दोषमुक्त किए जाने के बावजूद रोकी गई सम्मान पेंशन और समस्त बकाया राशि तत्काल जारी करने की मांग उठाई गई। इसके साथ ही उत्तराखंड में मूल निवास 1950 की व्यवस्था लागू करने, हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर सशक्त भू-कानून बनाने और राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन संबंधी विसंगतियां दूर कर मासिक पेंशन 30 हजार रुपये करने की मांग की गई।
समिति ने राज्य निर्माण आंदोलनकारियों को आधिकारिक रूप से ‘राज्य सेनानी’ का दर्जा देने, 31 दिसंबर 2021 से पूर्व तहसीलों में जमा सभी लंबित आवेदनों की स्क्रूटनी कर पात्र लोगों का चिन्हीकरण करने तथा त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में राज्य आंदोलनकारियों को 30 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग भी उठाई।
ज्ञापन में देहरादून-वाया लम्यगांव-उत्तरकाशी मार्ग से संबंधित मांग का भी उल्लेख किया गया है।
समिति ने चेतावनी दी कि यदि मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो आंदोलन को व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा। इसकी नैतिक एवं कानूनी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
धरने एवं ज्ञापन के माध्यम से आंदोलनकारियों ने सरकार से सवाल किया कि जिस राज्य के निर्माण के लिए लोगों ने संघर्ष, त्याग और बलिदान दिया, उसी राज्य में उनके अधिकारों और सम्मान से जुड़े विषय वर्षों तक लंबित क्यों हैं?
समिति के पदाधिकारी एवं प्रमुख सदस्य
समिति के जिला अध्यक्ष विजय बहादुर रावत, केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. विजेंद्र पोखरियाल, गढ़-गंडल अध्यक्ष कृतिनिधि सजवाण, जिला कार्यकारी अध्यक्ष प्रताप सिंह चौहान, सलाहकार मायाराम सिंह कंडियाल, संरक्षक चतर सिंह राणा, कोषाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद पैन्यूली सहित विभिन्न पदाधिकारी एवं सदस्य इस मांगपत्र से जुड़े हैं।
समिति की ओर से महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष चंद्रकांता सेमवाल और उपाध्यक्ष सुशीला देवी असवाल सहित संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने भी आंदोलनकारियों की मांगों के समर्थन में आवाज उठाई।
जय उत्तराखंड!
