उत्तराखंड के 26 साल: 26 ज्वलंत सवाल, सरकारें बदलीं, क्या पहाड़ की तकदीर बदली?हिमालय क्रांति पार्टी ने 26 वर्षों के विकास पर उठाए सवाल, भाजपा-कांग्रेस से मांगा जनता के मुद्दों पर जवाब


उत्तराखंड के 26 साल: 26 ज्वलंत सवाल, सरकारें बदलीं, क्या पहाड़ की तकदीर बदली

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर


हिमालय क्रांति पार्टी ने 26 वर्षों के विकास पर उठाए सवाल, भाजपा-कांग्रेस से मांगा जनता के मुद्दों पर जवाब
श्रीनगर (गढ़वाल)। उत्तराखंड राज्य स्थापना के 26 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हिमालय क्रांति पार्टी ने प्रदेश की राजनीतिक व्यवस्था और विकास के दावों पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने प्रदेश की भाजपा और कांग्रेस सरकारों से पूछा है कि इन 26 वर्षों में सत्ता तो बदलती रही, लेकिन क्या पहाड़ों की तकदीर और आम जनता की जिंदगी में वास्तव में कोई बड़ा बदलाव आया?
हिमालय क्रांति पार्टी की ओर से जारी ’26 Burning Questions from 26 Years of Uttarakhand’ अभियान के तहत प्रदेश की जनता से जुड़े 26 ज्वलंत सवाल उठाए गए हैं। पार्टी का कहना है कि अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और घोषणाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि जनता को विकास का वास्तविक हिसाब देना होगा।
पार्टी ने अंकिता भंडारी प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा दिलाने, उर्मिला सनावर, जेनी और रेखा आर्य से जुड़े मामलों पर कार्रवाई, महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान तथा वन्यजीवों के हमलों से आम लोगों की रक्षा जैसे सवाल उठाए हैं।
इसके साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं के लिए सड़क, अस्पताल और एंबुलेंस की सुविधा, अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती और प्रत्येक गर्भवती महिला के लिए सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
युवाओं, किसानों और पलायन पर भी सवाल
हिमालय क्रांति पार्टी ने पूछा है कि आखिर प्रदेश के युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार कब मिलेगा? भर्ती घोटालों और पेपर लीक पर पूरी तरह रोक कब लगेगी? पलायन रोककर खाली होते गांवों को दोबारा आबाद करने की ठोस योजना कब बनेगी? शिक्षा व्यवस्था में सुधार कब होगा? किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य, सिंचाई की सुविधा और जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा कब मिलेगी?
पार्टी ने जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा, मजबूत भू-कानून, मूल निवास और स्थानीय हितों के अनुरूप नीतियां बनाने की आवश्यकता भी उठाई है।
विकास परियोजनाओं और बढ़ते कर्ज पर जवाब मांगा
पार्टी ने जलविद्युत परियोजनाओं से स्थानीय लोगों को मिलने वाले लाभ, एक्सप्रेस-वे का पहाड़ी गांवों तक पहुंचने वाला फायदा, अवैध खनन और पर्यावरण प्रदूषण पर कार्रवाई तथा प्रदेश पर बढ़ते कर्ज को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। जारी सवालों में प्रदेश का कर्ज लगभग 1.22 लाख करोड़ रुपये होने का उल्लेख करते हुए इसे नियंत्रित करने की योजना पूछी गई है।
इसके अलावा विकास परियोजनाओं में स्थानीय युवाओं को रोजगार, बुजुर्गों, दिव्यांगों और पूर्व सैनिकों के सम्मानजनक जीवन का अधिकार तथा उत्तराखंड की भाषा, संस्कृति और महान विभूतियों के सम्मान को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
उक्रांद सरकार क्यों नहीं बना पाया, इस पर भी आत्ममंथन
हिमालय क्रांति पार्टी ने उत्तराखंड क्रांति दल के सत्ता तक नहीं पहुंच पाने के कारणों पर भी सवाल उठाया है। साथ ही भाजपा, कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों से पूछा है कि वे जनता के सामने अपना ठोस कार्ययोजना आधारित विकास मॉडल कब रखेंगे?
पार्टी की मांग है कि प्रदेश के 26 जनप्रतिनिधि प्रत्येक तीन महीने में जनता के सामने अपने कामकाज का हिसाब प्रस्तुत करें, ताकि चुनावी वादों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर स्पष्ट हो सके।
सवाल उठाने वाले कौन हैं?
इन 26 सवालों को सामने रखने वाले रविंद्र प्रसाद जुयाल, पीएमएमएस, एयूएसपी, सेवानिवृत्त सहायक कमांडेंट बीएसएफ हैं। वे पौड़ी गढ़वाल में हिमालय क्रांति पार्टी के जिला उपाध्यक्ष हैं और विधानसभा क्षेत्र संख्या 38 श्रीनगर से पार्टी के प्रत्याशी हैं।
पार्टी का संदेश है—’हिमालय से प्रेरित, क्रांति से सृजन की ओर।’
उत्तराखंड के 26 वर्षों के सफर पर उठाए गए ये सवाल अब राजनीतिक दलों के सामने एक बड़ी चुनौती हैं। प्रदेश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि राज्य निर्माण के सपनों को पूरा करने के लिए अब तक क्या किया गया और आने वाले वर्षों में पहाड़, युवा, महिलाएं, किसान और गांवों के भविष्य के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर

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