नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) को बड़ा झटका देते हुए परीक्षा को स्थगित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने प्रारंभिक परीक्षा में पूछे गए सवालों को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया है।

प्रीलिम्स परीक्षा के चार सवालों पर आपत्ति दर्ज होने के बाद यह फैसला लिया गया है। उम्मीदवारों द्वारा दायर याचिका के आधार पर कोर्ट ने सवाल नंबर 70 को हटाने […]

भटकता बचपन, बिखरता भविष्य और बढ़ती ‘नज़र’ की बहस? बुरी नज़र: आस्था, अनुभव और वैज्ञानिक दृष्टि के बीच सच्चाई। 

बुरी नज़र:भारतीय समाज में “बुरी नज़र” की अवधारणा सदियों पुरानी है। आज भी जब कोई बच्चा अचानक पढ़ाई से मन हटाने लगे, जिद्दी हो जाए, गलत संगत या नशे की […]

उत्तराखंड में शिवसेना की दस्तक, मिशन 2027 का आगाज़?7 दिसंबर को रुद्रपुर में ऐतिहासिक बैठक, ज्वलंत मुद्दों पर बनेगी ठोस रणनीति!शिवसेना का लक्ष्य: देवभूमि की अस्मिता, सुरक्षा और स्वाभिमान

रुद्रपुर।देवभूमि उत्तराखंड की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। आगामी 7 दिसंबर 2025, रविवार को रुद्रपुर में आयोजित होने जा रही शिवसेना की महत्वपूर्ण प्रदेश […]

उत्तराखंड कीलोक-सांस्कृतिक पहचान उसके पारंपरिक नृत्यों में गहराई से समाई हुई है। कुमाऊँ और गढ़वाल दोनों ही क्षेत्रों में नृत्य जीवन के आनंद, संघर्ष, वीरता और अध्यात्म के अभिव्यक्ति माध्यम हैं। झोड़ा, चांचरी, झुमैलो और चौंफुला जैसे सामूहिक नृत्य सामाजिक एकता और उल्लास को दर्शाते हैं, जबकि छोलिया और रणभूत जैसे नृत्य शौर्य, युद्धकला और वीरगति का सम्मान प्रस्तुत करते हैं। पांडव नृत्य महाभारत की कथाओं पर आधारित एक अनूठी लोक-नाट्य परंपरा है, जिसमें पौराणिक पात्रों की ऊर्जा कलाकारों में समाहित होने की लोकमान्यता भी जुड़ी है। वहीं थड़िया, मंडाण, सरौं, हारुल, भगनोल और मुखोटा नृत्य अलग-अलग अवसरों, ऋतुओं और देव-उत्सवों से संबंध रखते हैं। इन सभी नृत्यों में प्रकृति के प्रति प्रेम, सामाजिक सामूहिकता, अध्यात्म और लोक-स्मृतियों के संरक्षण का भाव प्रमुख रूप से दिखाई देता है। उत्तराखंड के लोक नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों की सांस्कृतिक विरासत, आस्था और पहचान के जीवंत प्रतीक हैं।

उत्तराखंड के लोकनृत्य — परंपरा, आध्यात्म, सामाजिकता और सामुदायिक चेतना की अनंत यात्रा ✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड की आत्मा […]

भारत और साउथ अफ्रीका (IND vs SA) के बीच 3 मैचों की वनडे सीरीज खेली जा रही है, इस सीरीज का पहला मैच महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) के घर रांची में खेला गया, भारतीय टीम (Team India) ने इस मैच में बेहद ही शानदार प्रदर्शन किया.

पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने 349 रन बना डाले. भारतीय टीम की जीत में सबसे बड़ी भूमिका विराट कोहली (Virat Kohli) की रही. ✍️ अवतार सिंह बिष्ट | […]

खरमास साल में 2 बार आता है, जब सूर्य धनु और मीन राशि में होते हैं. यह 2 महीने का समय दिसंबर मध्‍य से जनवरी में मकर संक्रांति तक और मार्च के मध्‍य से अप्रैल के मध्‍य तक रहता है.

हिंदू धर्म में खरमास के समय को अशुभ माना गया है और इसलिए इस दौरान कोई भी शुभ-मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. 16 दिसंबर 2025 को धनु संक्रांति से […]

राज्य लोक सेवा आयोग ने तकनीकी खामियों के चलते सोमवार को पीसीएस मुख्य परीक्षा का परिणाम निरस्त कर दिया। हालांकि, साथ ही संशोधित परिणाम भी जारी किया गया है।

आयोग की ओर से 29 नवंबर को परीक्षा का परिणाम जारी किया गया था। ✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी बता दें […]

क्रिकेट के इतिहास में नया मील का पत्थरदक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चल रही तीन वनडे मैचों की श्रृंखला के पहले मुकाबले में, विराट कोहली ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।

उन्होंने पहले मैच में शतक बनाकर मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के 51 टेस्ट शतकों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। अब कोहली के वनडे में कुल 52 शतक हो गए […]

आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 (ICC T20 World Cup 2026) के लिए आज आईसीसी ने आज शेड्यूल का ऐलान कर दिया है. इस बार टूर्नामेंट में कुल 20 टीमें हिस्सा लेने वाली हैं, जिन्हें 5-5 के 4 ग्रुप में रखा गया है.

भारत के ग्रुप में पाकिस्तान, नामीबिया, नीदरलैंड और अमेरिका की टीम को जगह दिया गया है. भारतीय टीम (Team India) ने पिछली बार रोहित शर्मा की कप्तानी में टी20 विश्व […]

मनुष्य जन्म लेते ही किसी अदृश्य शक्ति की शरण में चला जाता है। सांसें शरीर को जीवित रखती हैं, पर जीवन की दिशा वह दिव्य ऊर्जा संचालित करती है जिसे हम इष्ट देव कहते हैं। इष्ट देव वही हैं जिनके नाम से मन शांत होता है और आत्मा सुरक्षित महसूस करती है। जब मन स्मरण व भक्ति में स्थिर रहता है, तब निर्णयशक्ति मजबूत होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन सहज दिशा पकड़ लेता है। पर जब जीवन की व्यस्तता, अहंकार या भौतिकता व्यक्ति को इष्ट से दूर ले जाती है, तब बेचैनी, भ्रम, अवरोध और असंतोष बढ़ने लगते हैं। इष्ट देव कोई बाहरी सत्ता नहीं, आत्मा की मौलिक शक्ति हैं। उनका स्मरण प्रार्थना से ज़्यादा मन की ऊर्जा को जागृत करने का माध्यम है। भक्ति प्रदर्शन में नहीं, समर्पण में बसती है। जब मन प्रेम से अपने इष्ट की ओर लौटता है, तो भाग्य, शांति और समृद्धि स्वयं लौट आती है — यही जीवन का सनातन सत्य है।

30 November 2025): 30 नवंबर 2025, रविवार का दिन, हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि रात 9 बजकर 29 मिनट तक रहेगी, फिर एकादशी […]