संपादकीय:भ्रष्टाचार पर लगाम या सिर्फ निर्देशों की खानापूरी? रुद्रपुर में जिलाधिकारी के आदेश की पड़ताल”

पारदर्शिता बनाम परंपरागत ढर्रा उत्तराखंड के रुद्रपुर से 25 जुलाई 2025 को आई जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया की महत्वपूर्ण अधिसूचना प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप […]

उत्तराखण्ड क्रांति दल : राज्य निर्माण आंदोलन की रीढ़, लेकिन संघर्षशील भविष्य उत्तराखण्ड क्रांति दल (यूकेडी), उत्तराखण्ड का एक ऐसा क्षेत्रीय राजनीतिक संगठन है जिसने राज्य निर्माण की चिंगारी को सुलगाया और उसे जन आंदोलन में बदल दिया। 26 जुलाई 1979 को कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. डी.डी. पन्त की अध्यक्षता में नैनीताल में आयोजित एक ऐतिहासिक बैठक में इस दल की नींव रखी गई। इस बैठक में इंद्रमणि बडोनी, बिपिन चंद्र त्रिपाठी, काशी सिंह ऐरी जैसे दूरदर्शी नेता भी उपस्थित थे, जिन्होंने एक अलग पहाड़ी राज्य के स्वप्न को मूर्त रूप देने के लिए जीवन समर्पित किया। यूकेडी की स्थापना उत्तर प्रदेश की उपेक्षा और पर्वतीय क्षेत्रों की अनदेखी के विरोध में हुई थी। इसका प्रमुख उद्देश्य था – एक अलग राज्य का गठन जो स्थानीय जनता द्वारा शासित हो, ताकि पर्वतीय जनजीवन, संस्कृति, पर्यावरण और सामाजिक न्याय की रक्षा की जा सके। इस दल ने ‘क्षेत्रवाद’, ‘धर्मनिरपेक्षता’, ‘लोकतांत्रिक समाजवाद’ और ‘नागरिक राष्ट्रवाद’ जैसी विचारधाराओं को अपनाते हुए पर्वतीय जनमानस को संगठित किया। 1980 और 1990 के दशक में उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन का सबसे मुखर चेहरा बनकर उभरा यूकेडी, निरंतर सत्याग्रह, प्रदर्शन और जनजागरण अभियानों के माध्यम से सरकारों पर दबाव बनाता रहा। अंततः 9 नवम्बर 2000 को उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ, जिसे यूकेडी की ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जाता है। हालांकि, राज्य गठन के बाद यूकेडी ने 2002 के विधानसभा चुनावों में 4 सीटें जीतकर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की, परंतु समय के साथ यह दल आंतरिक गुटबाजी, नेतृत्व संकट और संगठनात्मक शिथिलता का शिकार होता चला गया। राष्ट्रीय दलों – कांग्रेस और भाजपा – के संसाधन और संगठनात्मक प्रभुत्व ने यूकेडी को हाशिये पर धकेल दिया। परिणामस्वरूप, आज यह दल उत्तराखण्ड विधानसभा में एक भी सीट नहीं रखता। फिर भी यूकेडी की प्रासंगिकता खत्म नहीं हुई है। यह आज भी क्षेत्रीय अस्मिता, पलायन, बेरोजगारी, स्थानीय अधिकार और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर मुखर है। यह पार्टी उत्तराखण्डी नागरिकता को समावेशी रूप में परिभाषित करती है, जातिवाद से दूर रहकर सभी स्थानीयों के हित की बात करती है – यह इसे वामपंथी राष्ट्रवादी दलों जैसे स्कॉटिश नेशनल पार्टी से जोड़ती है, हालांकि यूकेडी की नीति पूर्णतः संविधान सम्मत और गैर-अलगाववादी रही है। आज जब उत्तराखण्ड को बने 25 साल पूरे हो चुके हैं, यूकेडी के पास फिर से एक अवसर है – लोगों को यह बताने का कि जो सपना राज्य गठन के समय देखा गया था, वह अभी अधूरा है, और उसकी पूर्ति के लिए एक सशक्त क्षेत्रीय आवाज की जरूरत है। अगर यूकेडी आत्मावलोकन कर संगठन को एकजुट करे और अपनी ऐतिहासिक भूमिका को जनमानस तक पहुंचाए, तो यह दल भविष्य में भी उत्तराखण्ड की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

1979 को कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. डीडी पन्त की अध्यक्षता में नैनीताल में एक सभा हुयी थी. इस सभा में बिपिन चंद्र त्रिपाठी, इंद्रमणि बडोनी और काशी सिंह […]

देहरादून की हलचल से कुछ दूर, क्लेमेंट टाउन में स्थित है एक ऐसी जगह, जहाँ समय ठहर सा जाता है। यहाँ ना कोई राजनीतिक भाषण है, ना कोई भागमभाग। यहाँ सिर्फ है – मौन, मंत्र और ममता। हम बात कर रहे हैं माइंड रोलिंग मॉनेस्ट्री, जिसे आमजन बुद्ध मंदिर के नाम से जानते हैं। यह न केवल उत्तराखंड की आध्यात्मिक धरोहर है, बल्कि विश्व बौद्ध आस्था का एक जीवंत प्रतीक भी है। सन् 1959 के बाद जब तिब्बती धर्मगुरु और साधु भारत आए, तब उन्होंने अपनी परंपराओं को जीवित रखने के लिए देश के विभिन्न कोनों में बौद्ध मठों की स्थापना की। देहरादून का यह मंदिर 1965 में कोएन रिनपोछे और अन्य लामाओं द्वारा स्थापित किया गया। यह बौद्ध धर्म की न्योमा (Nyingma) परंपरा का मुख्य केंद्र है, जो महायान बौद्ध शाखा की सबसे पुरानी परंपरा मानी जाती है। बुद्ध मंदिर का मुख्य स्तूप, जिसकी ऊँचाई करीब 185 फुट है, पूरे भारत में सबसे ऊँचे स्तूपों में गिना जाता है। इसकी दीवारों पर उकेरे गए अष्टधातु चित्र, तिब्बती भित्तिचित्र (Murals), और सोने की परत से ढंकी बुद्ध प्रतिमा इसे नयनाभिराम बनाती है।पांच मंजिला इस संरचना में हर तल पर बुद्ध के जीवन, धर्मचक्र प्रवर्तन, और निर्वाण की कथाएं चित्रित की गई हैं। मंदिर परिसर में फैले बांस के झुरमुट, पुष्पवाटिका, और ध्यान स्थली मन को एक विलक्षण शांति प्रदान q यह मंदिर केवल एक पर्यटक स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत आध्यात्मिक केंद्र है। यहां प्रतिदिन: ध्यान सत्र मंत्र जाप तिब्बती ग्रंथों का पठन बौद्ध दर्शन पर प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यहां आने वाले साधु वर्षों तक रहकर “लुंग” (बौद्ध शास्त्रों का पाठ) और “रिगपा” (बोधि की स्थिति) की साधना करते हैं। — लोक आकर्षण: श्रद्धा और पर्यटन का मिलन बुद्ध मंदिर आम नागरिकों और पर्यटकों के लिए भी एक बड़ा आकर्षण है। मुख्य आकर्षण हैं: विशाल बुद्ध प्रतिमा और स्तूप रंग-बिरंगी प्रार्थना चक्र (Prayer Wheels) शांत उद्यान और कमल-ताल तिब्बती पुस्तकालय और ध्यान कक्ष परिसर में स्थित कैफे और हस्तशिल्प बाजार यहां हर वर्ष हजारों पर्यटक, साधक और विदेशी पर्यवेक्षक आते हैं। विशेष रूप से बुद्ध पूर्णिमा और तिब्बती नववर्ष (लोसर) पर हजारों श्रद्धालु यहां एकत्र होते हैं। शिक्षा और संस्कृति: परंपरा की पाठशाला मंदिर परिसर में स्थित Ngagyur Nyingma College में 300 से अधिक छात्र तिब्बती बौद्ध शास्त्रों, संस्कृत, ध्यान और तंत्र विद्या का अध्ययन करते हैं। यह कॉलेज तिब्बती संस्कृति के संरक्षण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। — देहरादून के लिए गौरव बुद्ध मंदिर ना केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और पर्यटन की दृष्टि से भी देहरादून की पहचान बन चुका है। क्लेमेंट टाउन के लोग इसे “शांति का द्वार” कहते हैं। जहाँ एक ओर देश के कोने-कोने में धार्मिक स्थलों की भीड़ और विवाद हैं, वहीं देहरादून का यह बुद्ध मंदिर हमें मौन में ध्यान, करुणा में शक्ति, और विनम्रता में क्रांति का संदेश देता है। यह स्थान हर उस व्यक्ति को आमंत्रण देता है जो जीवन की भीड़ में भीतर की शांति की तलाश में है।✍️ अवतार सिंह बिष्ट, संवाददाता,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी!

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के क्लेमेंट टाउन क्षेत्र में स्थित है। यह न केवल एक आकर्षक पर्यटन स्थल है, बल्कि आध्यात्मिक साधना और तिब्बती संस्कृति का भी प्रमुख केंद्र है। […]

संपादकीय लेख (हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स) पैराशूट प्रत्याशी बनाम ज़मीन से जुड़े नेता: जिला पंचायत चुनाव में जनता किसे चुने?”पैराशूट प्रत्याशी बनाम ज़मीन से जुड़े नेता:

प्रतापपुर जिला पंचायत,त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव लोकतंत्र की जड़ हैं। ये चुनाव केवल राजनीतिक समीकरणों या जातीय जोड़-घटाव तक सीमित नहीं होते, बल्कि इनका सीधा संबंध ज़मीन से जुड़े विकास, स्वास्थ्य, […]

सावन का पहला सोमवार: शिवमय हुआ उत्तराखंड, शिव शक्ति मंदिर रुद्रपुर में उमड़ा आस्था का सैलाब”रुद्रपुर (उधम सिंह नगर) सावन के पहले सोमवार पर प्रमुख शिवालयों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

सावन का महीना अपने साथ सिर्फ हरियाली नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तिभाव की गूंज लेकर आता है। भगवान शंकर की आराधना का यह विशेष काल उत्तराखंड में एक महापर्व […]

“सरकारी स्वास्थ्य सेवा में ईमानदारी की मिसाल: हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज का आदर्श उदाहरण” (लेखक: अवतार सिंह बिष्ट, विशेष संवाददाता — Hindustan Global Times/Shail Global Times)

उत्तराखंड जब देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल उठते हैं, निजी अस्पतालों की फीस आमजन की पहुंच से बाहर होती जा रही है, और सरकारी चिकित्सा संस्थान व्यवस्था के […]

मैनचेस्टर टेस्ट (Manchester Test) से पहले भारतीय टीम को एक बड़ा झटका लगा है। इंग्लैंड के खिलाफ एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी की चौथी भिड़ंत से ठीक पहले टीम के भरोसेमंद तेज गेंदबाज़ चोटिल हो गए हैं, जिससे चयनकर्ताओं को अचानक बदलाव करना पड़ा।23 जुलाई से शुरू हो रहे इस मुकाबले (Manchester Test) के लिए टीम इंडिया के स्क्वॉड में एक नया चेहरा जुड़ा है, जिसने हाल ही में आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स की ओर से खेलते हुए अपने प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया था।

BCCI की ओर से आधिकारिक तौर पर इस युवा खिलाड़ी को टीम… मैनचेस्टर टेस्ट (Manchester Test) से पहले भारतीय टीम को एक बड़ा झटका लगा है। इंग्लैंड के खिलाफ एंडरसन-तेंदुलकर […]

संपादकीय विशेष रिपोर्ट: 2027 का चुनाव पुष्कर सिंह धामी के सानिध्य में ही लड़ा जाएगा, अमित शाह ने इशारों में साफ कर दिया रास्ता रिपोर्टर: अवतार सिंह बिष्ट, हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर विशेष संस्करण

रुद्रपुर,उत्तराखंड निवेश उत्सव 2025 के ऐतिहासिक आयोजन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का संबोधन केवल एक औपचारिक वक्तव्य नहीं था, बल्कि यह उत्तराखंड की आगामी राजनीतिक दिशा […]

“उत्तराखंड निवेश उत्सव 2025” बना ऐतिहासिक: पंतनगर सिडकुल से लेकर रूड़की तक देश-विदेश की कंपनियों ने दिखाई भागीदारी

रुद्रपुर, 19 जुलाई 2025 (Hindustan Global Times ब्यूरो) –उत्तराखंड के औद्योगिक इतिहास में पहली बार निवेश की वास्तविक ग्राउंडिंग को उत्सव के रूप में मनाया गया। “उत्तराखंड निवेश उत्सव 2025” […]

सिडकुल इंटरप्रेन्योर वेलफेयर सोसाइटी ने किया केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का अभिनंदन,

रुद्रपुर, 19 जुलाई 2025:“उत्तराखंड निवेश उत्सव” के ऐतिहासिक अवसर पर सिडकुल इंटरप्रेन्योर वेलफेयर सोसाइटी (SIDCUL Entrepreneur Welfare Society) द्वारा केंद्रीय गृहमंत्री एवं देश के पहले सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह […]