कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में […]

फूलदेई त्यौहार (Phooldei festival) , का इतिहास व फूलदेई त्यौहार पर निबंध

उत्तराखंड वासियों का प्रकृति प्रेम जगविख्यात है। चाहे पेड़ बचाने के लिए चिपको आंदोलन हो या पेड़ लगाने के लिए मैती आंदोलन या प्रकृति का त्योहार हरेला हो। इसी प्रकार […]

सीएम धामी ने कैंची धाम के विकास के लिए 28 करोड़ किए स्वीकृत, व्यवस्था और सौंदर्यीकरण के लिए होगा कामउत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कैंची धाम तीर्थ में प्रकाश व्यवस्था और सौंदर्यीकरण के लिए 28 करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत की है। इस दौरान उन्होंने कहा कि कैंची धाम में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या साल दर साल बढ़ रही है।देश का श्रेष्ठ राज्य बनने की ओर अग्रसर उत्तराखंड, सीएम धामी ने किया 8275.51 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण

इसको ध्यान में रखते हुए यहां पर तमाम व्यवस्थाएं की जा रही हैं। मुख्यंमत्री धामी ने कहा कि हमारी सरकार केदारखंड और मानसखंड के अंतर्गत आने वाले समस्त मंदिरों के […]

किसी की मौत हो गई है या फिर वो समाधि में लीन है, ये कैसे पता चलेगा? जाहिर इस बारे में डॉक्टर बताएगा. लेकिन अब एक ऐसी मौत या यूं कहें कि समाधि का मामला सामने आया है, जो डॉक्टर के पास जाने से पहले ही कोर्ट पहुंच गया.

अब अदालत से एक लाश को सहेजकर रखने की इजाजत मांगी जा रही है. क्योंकि वो लाश कभी भी जिंदा हो सकती है. मामला आशुतोष महाराज की उस शिष्या का […]

शिव पुराण में महाशिवरा‍त्रि की शाम और रात की पूजा का विशेष महत्‍व बताया गया है. शास्त्रों की मानें तो महाशिवरात्रि की रात ही भगवान शिव करोड़ों सूर्यों के समान प्रभाव वाले ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे. इसके बाद से ही हर साल फाल्गुन माह में महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है. ऐसी मान्‍यता है कि महाशिवरात्रि की शाम को महादेव की पूजा के कुछ विशेष उपाय करने से जीवन सुखमय होता है और हर प्रकार की बाधा दूर हो जाती है.

इस शिवरात्रि पर्व पर कुछ खास संयोग बनने जा रहे हैं– सिद्धि योग, शिव योग एवं देव गुरु बृहस्पति मेष राशि में विराजमान होंगे एवं सूर्य देव, शुक्र, शनि महाराज […]

2024 : हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह को समर्पित एक पवित्र त्योहार है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, और भक्त उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए उपवास रखते हैं।

आइए जानते हैं कि महाशिवरात्रि 2024 , महाशिवरात्रि 2024 की तिथि (Mahashivratri kab hai) हिंदू पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि का पर्व हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी […]

  शिव-पार्वती के मिलन का महापर्व है महाशिवरात्रि, क्यों प्रिय हैं शिवजी को जल और बेलपत्रशिव-पार्वती के मिलन का महापर्व है महाशिवरात्रि, क्यों प्रिय हैं शिवजी को जल और बेलपत्र8 मार्च को मनाई जाएगी महाशिवरात्रि, ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से मिलेगा भोलेनाथ का आशीर्वाद 2024: भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रत्येक माह में मासिक शिवरात्रि तो आती ही है और महाशिवरात्रि साल में एक बार ही आती है. जो लोग प्रत्येक सप्ताह में आने वाले सोमवार, हर महीने में दो बार आने वाले प्रदोष में भी भगवान की पूजा किन्हीं कारणों से नहीं कर पाते हैं, तो उनके लिए महाशिवरात्रि का पर्व है.

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में त्रयोदशी के दिन होने वाली महाशिवरात्रि जो इस बार 8 मार्च को होगी, देवों के देव महादेव की पूजा कर उनकी कृपा पायी जा […]

शिवरात्रि हिंदू धर्म के लोगों के लिए महाशिवरात्रि का पर्व बेहद खास होता है। क्योंकि ये दिन देवों के देव महादेव को समर्पित है। इस दिन शिव भक्त उपवास रखते हैं और शिव जी की विधि विधान पूजा अर्चना करते हैं।

इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करने का भी विशेष महत्व माना गया है। बता दें इस साल महाशिवरात्रि पर्व 8 मार्च को मनाया जाएगा। ऐसे में भगवान शिव की कृपा […]

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप चारधाम यात्रा की राह सहज, सुगम, सुखद व सुरक्षित बनाने के दृष्टिगत मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए सभी विभागों को दो महीने की डेडलाइन दी है। साथ ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए प्रोत्साहित करने के साथ वीआईपी दर्शन के कारण जनसामान्य को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए सुव्यवस्थित प्रबंधन करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को यात्रा मार्ग पर सड़क सुरक्षा से संबंधित सभी पहलुओं विशेषकर क्रेश बैरियर लगवाने के प्रस्ताव शीघ्र शासन स्तर पर भेजने के निर्देश दिए। साथ ही […]

   बसंत पंचमी 2024वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि।मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणी विनायकौ॥सभी सनायनीय पाठकों, धर्मावलंबियों को सादर प्रणाम। अवगत कराना चाहूंगी दिनांक 14 फरवरी 2024 दिन बुधवार को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा।प्रतिवर्ष माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष बसंत पंचमी बुधवार को पड़ने से विद्यार्थी वर्ग को विशेष लाभ प्रदान करेगी। साथ ही बसंत पंचमी पर्व पर शुभ योग, गजकेशरी योग, लक्ष्मी नारायण योग तथा रोहिणी नक्षत्र पड़ने से इसका महत्व और भी बढ़ जाएगा। इस योग में शिक्षा तथा व्यापार से संबंधित कोई भी कार्य एवं शिशुओं के विद्यारंभ संस्कार हेतु अति शुभ दिन रहेगा।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां सरस्वती की उत्पत्ति हुई थी इसलिए बसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की पूजा अर्चना का विधान है। देवी सरस्वती को ज्ञान की देवी माना जाता है और बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा से ज्ञान की वृद्धि होती है। साथ ही बसंत पंचमी से बसंत ऋतु का आगमन होता है।बसंत पंचमी अबूझ मुहूर्तधार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी पर्व पर अबूझ मुहूर्त होता है। जिसमें सभी शुभ कार्य किए जा सकते हैं।मुहूर्तपंचमी तिथि प्रारंभ 13 फरवरी 2024 को अपराहन 2:44 से 14 फरवरी 2024 गुरुवार को प्रातः 12:11 तक।पूजा हेतु शुभ मुहूर्त प्रातः 7 बजे से 12:35 तक।

इस साल बसंत पंचमी का त्योहार 14 फरवरी दिन बुधवार यानी कल मनाया जाएगा। लेकिन इसी के साथ ही अगर बसंत पंचमी के दिन कुछ उपायों को किया जाए तो […]