गुवाहाटी/प्रतापगढ़। देश के दो अलग-अलग हिस्सों से सामने आईं दो घटनाओं ने प्रेम संबंध, परिवार की नाराजगी, सामाजिक दबाव तथा युवतियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। असम के गुवाहाटी में गौहाटी यूनिवर्सिटी की 22 वर्षीय छात्रा निमिषा ठाकुरिया की एक होमस्टे में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मौत से पहले उसके अपनी मां को कथित रूप से किए गए फोन ने मामले को और गंभीर बना दिया है। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में परिवार की इच्छा के खिलाफ प्रेम संबंध रखने वाली एक बालिग युवती से परिजनों ने नाता तोड़ते हुए उसकी जीवित रहते हुए प्रतीकात्मक ‘शव यात्रा’ निकाल दी।
‘मुझे मार डालेंगे’—आधी रात मां को फोन
गुवाहाटी में समाजशास्त्र की छात्रा निमिषा ठाकुरिया की मौत के मामले में पुलिस जांच कर रही है। जानकारी के अनुसार निमिषा गुवाहाटी के गराल-धारापुर इलाके स्थित एक होमस्टे में आसिफ अली के साथ ठहरी थी। शनिवार तड़के वह संदिग्ध परिस्थितियों में बेहोश मिली। उसे पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से गौहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
पुलिस ने निमिषा के साथ ठहरे आसिफ अली को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। पुलिस के अनुसार आसिफ का दावा है कि निमिषा ने पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या की थी। हालांकि पुलिस ने इस दावे को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना है। मौत की वास्तविक वजह पता लगाने के लिए घटनास्थल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा संबंधित लोगों के बयानों की जांच की जा रही है।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू निमिषा की कथित आखिरी फोन कॉल है। परिवार के मुताबिक, आधी रात के समय निमिषा ने अपनी मां को फोन कर बताया था कि उसके साथ मारपीट की गई है और उसे आशंका है कि उसे मार दिया जाएगा। इसके बाद उसका मोबाइल फोन बंद हो गया और परिवार का उससे संपर्क टूट गया।
परिवार की ओर से पुलिस को सूचना दिए जाने के बाद घटनाक्रम की जांच शुरू हुई। निमिषा की मौत की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या यह आत्महत्या थी, दुर्घटना थी या फिर किसी अन्य घटना का परिणाम—इसका उत्तर जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आना बाकी है।
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन की खबरें भी सामने आईं। NH-17 पर लोगों के जुटने की जानकारी सामने आई। कुछ संगठनों ने मामले को ‘लव जिहाद’ से जोड़कर प्रदर्शन किया, लेकिन इस तरह के आरोपों की पुलिस जांच में अभी पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मौत की वास्तविक वजह को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।
प्रतापगढ़ में जिंदा बेटी की निकाली ‘शव यात्रा’
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के जेठवारा थाना क्षेत्र से सामने आया मामला पारिवारिक विरोध की एक अलग तस्वीर पेश करता है। जानकारी के मुताबिक एक गांव की बालिग युवती का दूसरी बिरादरी के युवक से प्रेम संबंध था। युवती परिवार की इच्छा के विपरीत उसी युवक के साथ रहने की इच्छा जताती रही।
बताया गया कि युवती के घर से चले जाने के बाद परिजनों ने उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस ने तलाश शुरू की और युवती को बरामद कर लिया। जब दोनों पक्षों को थाने लाया गया तो युवती ने कथित तौर पर पुलिस के सामने स्पष्ट किया कि वह बालिग है तथा अपनी इच्छा से युवक के साथ रहना चाहती है।
युवती के इस फैसले से परिवार नाराज हो गया। सामाजिक प्रतिष्ठा और बिरादरी से जुड़े दबाव के बीच परिजनों ने उससे रिश्ता खत्म करने की घोषणा कर दी।
इसके बाद मामला और आगे बढ़ गया। परिवार की ओर से युवती को मृत मानकर प्रतीकात्मक रूप से उसकी ‘शव यात्रा’ निकाले जाने की बात सामने आई है। बताया गया कि चिता पर युवती की तस्वीर रखकर प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया गया। परिवार की ओर से उसकी ‘तेरहवीं’ की तैयारी किए जाने की बात भी सामने आई है।
जिंदा बेटी के साथ इस तरह का व्यवहार इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि परिवार और समाज की अपेक्षाओं से अलग अपनी जिंदगी का फैसला लेने वाले बालिग युवक-युवतियों के प्रति परिवार का रवैया किस हद तक जा सकता है।
दो घटनाएं, कई गंभीर सवाल
गुवाहाटी और प्रतापगढ़ की घटनाएं अलग-अलग परिस्थितियों से जुड़ी हैं, लेकिन दोनों में एक समान मुद्दा दिखाई देता है—प्रेम संबंध को लेकर परिवार तथा समाज में पैदा होने वाला तनाव। एक मामले में छात्रा की संदिग्ध मौत की जांच चल रही है, जबकि दूसरे मामले में बालिग युवती के परिवार द्वारा उससे सामाजिक रिश्ता खत्म करने की कार्रवाई सामने आई है।
गुवाहाटी मामले में सबसे अहम सवाल निमिषा की मौत की वास्तविक वजह का है। उसके परिवार द्वारा बताई गई आखिरी फोन कॉल जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है। वहीं प्रतापगढ़ में सवाल यह है कि किसी बालिग व्यक्ति द्वारा अपनी जिंदगी और साथी को लेकर लिया गया निर्णय परिवार की असहमति की स्थिति में किस तरह सामाजिक बहिष्कार का रूप ले सकता है।
दोनों मामलों में पुलिस और प्रशासन की जांच महत्वपूर्ण है। गुवाहाटी में पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा घटनास्थल से मिलने वाले साक्ष्य मौत की परिस्थितियों को स्पष्ट करने में मदद कर सकते हैं। प्रतापगढ़ मामले में भी पुलिस के रिकॉर्ड तथा संबंधित पक्षों के बयानों से घटना की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।
इन घटनाओं ने यह भी दिखाया है कि प्रेम संबंधों को लेकर पारिवारिक विवाद कभी-कभी बेहद गंभीर रूप ले लेते हैं। ऐसे मामलों में अफवाह, आरोप या सामाजिक धारणाओं के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय तथ्य सामने आने तक जांच पर भरोसा करना जरूरी है।
फिलहाल गुवाहाटी में निमिषा ठाकुरिया की मौत का रहस्य पुलिस जांच के केंद्र में है, जबकि प्रतापगढ़ में जिंदा युवती की प्रतीकात्मक ‘शव यात्रा’ का मामला सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। दोनों घटनाओं का अंतिम सच जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
