कराकास। वेनेजुएला में आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के लगातार दो शक्तिशाली भूकंपों ने पूरे देश को गहरे संकट में डाल दिया है। भूकंप के तीन दिन बाद भी राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। अब तक 1,430 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 68,900 से 69,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हजारों इमारतें ढह गई हैं और लाखों लोग बेघर हो चुके हैं। मलबे में दबे लोगों को जिंदा निकालने के लिए समय के खिलाफ दौड़ जारी है, क्योंकि विशेषज्ञों के अनुसार भूकंप के बाद शुरुआती 48 से 72 घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
20 देशों से पहुंचे 2,000 से ज्यादा बचावकर्मी
वेनेजुएला सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सहायता स्वीकार करने के बाद दुनिया के करीब 20 देशों से राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंच चुके हैं। शनिवार तक 17 विशेष विमानों के जरिए 1,600 से अधिक विदेशी रेस्क्यूकर्मी वेनेजुएला पहुंचे थे। इसके बाद अमेरिका, मेक्सिको, ब्राजील, फ्रांस, अल सल्वाडोर समेत अन्य देशों से अतिरिक्त टीमें भी पहुंचीं। अब कुल मिलाकर 2,000 से ज्यादा प्रशिक्षित बचावकर्मी प्रभावित इलाकों में लगातार अभियान चला रहे हैं।
इन टीमों के पास अत्याधुनिक खोजी उपकरण, भारी खुदाई मशीनें, थर्मल स्कैनर, लाइफ डिटेक्शन सिस्टम और स्निफर डॉग्स मौजूद हैं। इनकी मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश की जा रही है। कई स्थानों पर मशीनों के साथ-साथ हाथों से भी मलबा हटाया जा रहा है ताकि किसी जीवित व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे।
ला ग्वाइरा में सबसे ज्यादा तबाही
भूकंप का सबसे अधिक असर ला ग्वाइरा राज्य में देखने को मिला है। यहां बड़ी संख्या में मकान, बहुमंजिला इमारतें और सार्वजनिक ढांचे धराशायी हो गए। कई इलाकों में सड़कें टूट गई हैं और बिजली तथा संचार सेवाएं पूरी तरह बाधित हो गई हैं।
स्थानीय लोग अपने परिवार और पड़ोसियों को बचाने के लिए दिन-रात राहत कार्य में जुटे हुए हैं। कोई फावड़े से मलबा हटा रहा है, कोई रस्सियों के सहारे ढही इमारतों में प्रवेश कर रहा है, तो कहीं भारी मशीनों की मदद ली जा रही है। कई लोग टूटी हुई इमारतों के ऊपर चढ़कर अपने परिजनों के नाम पुकार रहे हैं, इस उम्मीद में कि अगर कोई जीवित होगा तो आवाज देगा।
धूल, तेज गर्मी और मलबे में फंसे शवों से उठ रही दुर्गंध के बीच बचावकर्मी लगातार काम कर रहे हैं। हालात बेहद कठिन हैं, लेकिन राहत दल हर संभव कोशिश कर रहे हैं कि अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
समय के साथ दौड़
संयुक्त राष्ट्र की राहत एजेंसियों का कहना है कि किसी भी बड़े भूकंप के बाद पहले 48 से 72 घंटे जीवन बचाने के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि मलबे में फंसे लोगों को हवा और पानी मिलता रहे तो उनके कई दिनों तक जीवित रहने की संभावना बनी रहती है।
इसी कारण बचाव दल बिना रुके लगातार अभियान चला रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हर घंटे के साथ जीवित लोगों को निकालने की संभावना कम होती जाती है, इसलिए राहत कार्य में किसी भी तरह की देरी गंभीर साबित हो सकती है।
सरकार के राहत कार्य पर उठे सवाल
भूकंप के बाद सरकार की तैयारियों और राहत कार्य को लेकर लोगों में नाराजगी भी बढ़ती जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों के कई लोगों का आरोप है कि सेना, पुलिस और प्रशासन इस स्तर की प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए तैयार नहीं थे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भूकंप के शुरुआती घंटों में सरकारी सहायता बहुत सीमित रही, जबकि उसी समय सबसे अधिक लोगों की जान बचाई जा सकती थी। लोगों का आरोप है कि यदि तत्काल राहत अभियान शुरू किया जाता तो मृतकों की संख्या कम हो सकती थी।
ला ग्वाइरा की रहने वाली मिलेडी रोमेरो ने कहा कि रात के समय कई लोग मलबे के नीचे जिंदा थे, लेकिन उन्हें समय पर बाहर नहीं निकाला जा सका। उन्होंने कहा कि यदि पर्याप्त बचाव दल पहले पहुंच जाते तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।
वहीं, येसन मार्कानो नाम के एक युवक ने आरोप लगाया कि कुछ सरकारी अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे, तस्वीरें खिंचवाईं और बिना कोई ठोस मदद किए वापस लौट गए। उनका कहना है कि पिछले तीन दिनों से स्थानीय लोग ही लगातार राहत कार्य चला रहे हैं।
कुछ इलाकों में लोगों का गुस्सा इतना बढ़ गया कि उन्होंने सरकारी खुदाई मशीनों को रोक दिया। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि प्रशासन केवल औपचारिकता निभा रहा है, जबकि वास्तविक राहत कार्य स्थानीय नागरिकों और विदेशी टीमों के भरोसे चल रहा है।
60 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित
इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) के अनुसार इस विनाशकारी भूकंप से 60 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें अकेले राजधानी कराकास के करीब 20 लाख लोग शामिल हैं।
लाखों लोगों के घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और बड़ी संख्या में परिवार अस्थायी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। कई इलाकों में पीने के पानी, भोजन, दवाइयों और बिजली की गंभीर कमी बनी हुई है। अस्पतालों पर भी भारी दबाव है और घायल लोगों का लगातार इलाज किया जा रहा है।
आफ्टरशॉक से बढ़ी दहशत
भूकंप के बाद शनिवार को 4.8 तीव्रता का एक और आफ्टरशॉक महसूस किया गया, जिससे पहले से डरे हुए लोगों में फिर से दहशत फैल गई। कई लोग अपने घरों में लौटने की बजाय खुले मैदानों और राहत शिविरों में रह रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों बड़े भूकंप कम गहराई में आए और उनके बीच समय का अंतर भी बहुत कम था। इसी वजह से जमीन पर कंपन का प्रभाव अधिक रहा और व्यापक स्तर पर इमारतें ढह गईं। इसके अलावा लगातार आ रहे झटकों से क्षतिग्रस्त भवनों के गिरने का खतरा अभी भी बना हुआ है।
मानवीय संकट गहराया
वेनेजुएला इस समय अपने इतिहास की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। हजारों परिवार अपने प्रियजनों की तलाश में अस्पतालों, राहत शिविरों और मलबे के आसपास भटक रहे हैं। बचावकर्मी लगातार उम्मीद के साथ मलबे की खुदाई कर रहे हैं कि कहीं कोई जीवन अब भी सांस ले रहा हो।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता और विशेषज्ञ बचाव दल भेजकर मदद का हाथ बढ़ाया है। हालांकि, राहत एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में भोजन, स्वच्छ पानी, दवाइयों और अस्थायी आवास की जरूरत और बढ़ेगी।
फिलहाल पूरे देश की निगाहें राहत एवं बचाव अभियान पर टिकी हैं। हर गुजरते घंटे के साथ उम्मीदें कमजोर जरूर पड़ रही हैं, लेकिन बचाव दल और स्थानीय लोग अब भी मलबे के नीचे जिंदगी की तलाश में पूरी ताकत से जुटे हुए हैं।
