धामी सरकार की उपलब्धियों के दावों के बीच अटका जमरानी बांध, यूपी से 688 करोड़ का इंतजार
देहरादून। उत्तराखंड सरकार जहां विकास और ऐतिहासिक उपलब्धियों के दावे कर रही है, वहीं प्रदेश की बहुप्रचारित जमरानी बांध परियोजना अब पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से मिलने वाली 688.65 करोड़ रुपये की राशि के इंतजार में अटकी हुई दिखाई दे रही है।
करीब 3808 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को क्षेत्र के किसानों और सिंचाई व्यवस्था के लिए गेम-चेंजर बताया गया था। बांध निर्माण के लिए टनल का काम लगभग पूरा हो चुका है और मुख्य बांध की नींव रखने की तैयारी भी चल रही है, लेकिन वित्तीय साझेदारी का एक अहम हिस्सा अभी तक कागजों और बैठकों तक ही सीमित है।
अनुबंध के अनुसार उत्तर प्रदेश को अपने हिस्से की 688.65 करोड़ रुपये की राशि जमा करनी है। दिलचस्प बात यह है कि परियोजना पर वर्षों से चर्चा हो रही है, विभागीय स्तर पर लगातार बैठकें भी हो रही हैं, लेकिन भुगतान का रास्ता अब तक नहीं खुल पाया है।
परियोजना पूरी होने पर उत्तर प्रदेश के रामपुर और बरेली जिलों के 684 गांवों की 47,607 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलना है। साथ ही हर साल 238 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी भी उपलब्ध कराया जाना है। मगर फिलहाल किसानों तक पानी पहुंचने से पहले फाइलों को मंजिल तक पहुंचने का इंतजार है।
सवाल यह है कि जब परियोजना को विकास का प्रतीक बताया जा रहा है, तब क्या सरकार उत्तर प्रदेश से अपना बकाया दिलाने में सफल होगी, या फिर उपलब्धियों की सूची में यह परियोजना भी केवल घोषणाओं और बैठकों तक सीमित रह जाएगी?
फिलहाल जमरानी बांध का पानी नहीं, बल्कि 688 करोड़ रुपये सबसे ज्यादा चर्चा में हैं।
यूपी से 688 करोड़ नहीं मिले, जमरानी बांध परियोजना पर संकट के बादल
उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी जमरानी बांध परियोजना को लेकर सरकार भले ही विकास के बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि परियोजना अब भी उत्तर प्रदेश से मिलने वाली 688.65 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी का इंतजार कर रही है। 3808 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस बांध में केंद्र सरकार और उत्तराखंड अपने हिस्से की राशि खर्च कर रहे हैं, जबकि अनुबंध के अनुसार यूपी को भी योगदान देना है। बताया जा रहा है कि अब तक यूपी की ओर से एक रुपये का भी भुगतान नहीं हुआ है।
परियोजना के तहत गौला नदी पर बांध निर्माण के लिए एक टनल का काम पूरा हो चुका है और दूसरी टनल अंतिम चरण में है। मानसून के बाद मुख्य बांध की नींव रखने की तैयारी है, लेकिन वित्तीय अनिश्चितता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। बांध बनने के बाद यूपी के रामपुर और बरेली जिलों के 684 गांवों की 47,607 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा तथा हर वर्ष 238 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
इस बीच दोनों राज्यों के सिंचाई विभागों के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं, लेकिन भुगतान पर सहमति नहीं बन सकी है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकारी दावों के बावजूद परियोजना समय पर पूरी हो पाएगी।
उत्तराखंड में गौला नदी पर जमरानी बांध परियोजना का निर्माण कार्य अटका हुआ है। 3808 करोड़ से बन रहे बांध के लिए उत्तराखंड को 1432.40 करोड़ खर्च करने हैं। अनुबंध के अनुसार अभी तक उत्तराखंड को यूपी की तरफ से एक रुपये का भी भुगतान नहीं हुआ।
