जनभावनाओं के आगे झुकी धामी सरकार, देहरादून-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना में पेड़ों का कटान फिलहाल स्थगित

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देहरादून, 18 जुलाई।
देहरादून-ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना को लेकर पर्यावरण प्रेमियों, स्थानीय नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लगातार उठ रहे विरोध के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि परियोजना के तहत प्रस्तावित पेड़ों का कटान फिलहाल स्थगित रखा जाएगा। साथ ही सभी हितधारकों, जनप्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों से दोबारा विस्तृत संवाद किया जाएगा।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि यह परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की महत्वपूर्ण अवसंरचना योजना है, जिस पर उच्च न्यायालय के निर्देशों और सभी वैधानिक एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियों के अनुरूप कार्यवाही की जा रही थी। उन्होंने बताया कि परियोजना में लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा हाथी अंडरपास तथा छोटे वन्यजीवों के लिए विशेष कल्वर्ट जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल हैं, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि प्रदेश का विकास आवश्यक है, लेकिन जनभावनाओं, पर्यावरण और स्थानीय हितों को समान महत्व दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी पक्षों के साथ व्यापक संवाद स्थापित किया जाए और उच्च न्यायालय के निर्देशों का पूर्ण सम्मान करते हुए आगे की कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक सभी पक्षों के बीच विश्वास और संतोषजनक सहमति का वातावरण तैयार नहीं हो जाता, तब तक पेड़ों का कटान स्थगित रहेगा।
पर्यावरण प्रेमियों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है। उनका कहना है कि जनदबाव, शांतिपूर्ण आंदोलन और लगातार उठाई गई आवाज के बाद सरकार ने कदम पीछे खींचा है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह निर्णय संवाद और जनहित को प्राथमिकता देने की नीति के तहत लिया गया है।
इस फैसले के बाद परियोजना को लेकर आगे की दिशा सभी हितधारकों के साथ होने वाले संवाद और सहमति पर निर्भर करेगी।
संपादकीय: विकास और पर्यावरण का संतुलन ही उत्तराखंड का भविष्य
उत्तराखंड केवल एक भौगोलिक प्रदेश नहीं, बल्कि प्रकृति, आस्था और संस्कृति का जीवंत स्वरूप है। यहां का प्रत्येक वृक्ष, प्रत्येक नदी और प्रत्येक पर्वत हमारी पहचान का हिस्सा है। यदि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तो उत्तराखंड का अस्तित्व भी सुरक्षित रहेगा।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स मैं अवतार सिंह बिष्ट पिछले कई दिनों से पेड़ कटान के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। यह किसी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित अभियान नहीं था, बल्कि हमारी सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी थी। एक संपादक होने के साथ-साथ एक उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी होने के नाते इस विषय ने मुझे व्यक्तिगत रूप से भी गहराई से प्रभावित किया। हमारी टीम ने लगातार समाचार प्रकाशित किए, वीडियो तैयार किए और लगभग दो हजार लोगों तक व्यक्तिगत रूप से यह संदेश पहुंचाया। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी सहित अनेक कैबिनेट मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों तक भी यह विषय लगातार पहुंचाया गया।
मुख्यमंत्री द्वारा अंततः पेड़ कटान से जुड़े निर्णय पर पुनर्विचार करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की सकारात्मक मिसाल है। जनभावनाओं का सम्मान करते हुए लिया गया यह निर्णय स्वागत योग्य है। यह संदेश भी देता है कि संवेदनशील मुद्दों पर सरकार जनता की आवाज सुनने को तैयार है।
अब आवश्यकता केवल एक निर्णय तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि ऐसी दीर्घकालिक नीति बनाने की है जिसमें विकास परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित हो। सड़कें, उद्योग और आधारभूत सुविधाएं आवश्यक हैं, परंतु इनके साथ जंगल, जलस्रोत और जैव विविधता की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।
हमारी अपेक्षा है कि भविष्य में उत्तराखंड में होने वाला प्रत्येक विकास कार्य पर्यावरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़े। यही देवभूमि के प्रति सच्ची श्रद्धा होगी और यही आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ी विरासत भी। प्रकृति की रक्षा ही उत्तराखंड की रक्षा है।


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